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यौन शोषण के मामलों पर मंत्री समूह गठित

महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान हेतु सरकार प्रतिबद्ध

तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट देगा मंत्री समूह

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Thursday 25 October 2018 01:45:46 PM

government of india

नई दिल्ली। भारत सरकार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन शोषण से जुड़े मामलों को निपटाने हेतु मौजूदा कानून एवं संस्थागत रूपरेखा की जांच के लिए मंत्री समूह यानी जीओएम का गठन कर दिया है। मंत्री समूह इस बारे में मौजूदा प्रावधानों के प्रभावी क्रियांवयन के साथ ही कार्यस्थल पर यौन शोषण से जुड़े मामलों को निपटाने के लिए मौजूदा कानूनी एवं संस्थागत रूपरेखा को मजबूत करने के लिए आवश्यक सुझाव देगा। यौन शोषण से जुड़े मुद्दे पर विस्तृत सलाह मशविरा की जरूरत महसूस होने, समय-समय पर उचित सिफारिशें देने, समग्र कार्य योजना बनाने एवं उसे समयबद्ध तरीके से लागू करना सुनिश्चित करने के परिप्रेक्ष्य में मंत्री समूह का गठन किया गया है।
मंत्री समूह की अध्यक्षता केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। मंत्री समूह के सदस्य हैं-सड़क परिवहन एवं राजमार्ग जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण और महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी। भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि वह कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से बचाने और यौन शोषण की शिकायतों के प्रभावी निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध एवं सुधार) कानून एक प्रमुख कानून है।
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने एक इलेक्ट्रॉनिक शिकायत पेटिका लॉंच की हुई है, जिससे महिलाएं, चाहे वे किसी भी हैसियत से काम करती हों, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने में सक्षम हुईं हैं। शी-बॉक्स में शिकायत एक बार जमा हो गईं तो वो सीधे मामले में कार्रवाई करने के अधिकार वाली अथॉरिटी के पास जाती हैं, ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि ताकि शिकायतों पर नियमित निरीक्षण किया जा सके। मंत्री समूह अपने गठन के तीन महीने के भीतर महिलाओं की सुरक्षा के मौजूदा प्रावधानों, उन्हें और अधिक मजबूत करने और उनके प्रभावी क्रियांवयन की स्थित की जांच करेगा। भारत सरकार ने इस मामले को बड़ी गंभीरता से लिया है और पूरी पड़ताल और सिफारिश के लिए मंत्री समूह का गठन किया गया है, ताकि ऐसे मामलों की गाइडलाइन निश्चित हो सके।
गौरतलब है कि मी टू अभियान के तहत यौन शोषण और छेड़छाड़ के कुछ मामले सामने आए हैं, जिनके कारण मोदी सरकार में विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर को इस्तीफा देना पड़ा है, इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रों जैसे कारपोरेट, फिल्मी दुनिया के विभिन्न कलाकारों और फिल्म निर्माताओं के एक एककर यौन शोषण के मामले सामने आए हैं और सामने आ रहे हैं। ये मामले कोई तीस साल पुराने हैं और कोई इन कुछ वर्षों के हैं। आरोप लगाने वाली महिलाएं खासतौर से वो हैं, जिनका ग्लैमर की दुनिया से संबंध है। इतने समय बाद मुंह खोलने से इनपर प्रश्नचिन्ह भी लगा है कि उस समय यौन शोषण और दुर्व्यवहार की शिकायत क्यों नहीं की गई और अब एक विदेशी अभियान में शामिल होने का क्या मतलब है? भारत सरकार इस मामले की गंभीरता को समझती है, जिसका दूसरा पक्ष यह भी है कि ऐसी स्थिति के और भी ज्यादा भयानक परिणाम हो सकते हैं और इस आशंका को अनदेखा नहीं किया जा सकता कि भविष्य में नि‌जी क्षेत्र में महिलाओं को नौकरी मिलने में दिक्कतें आ सकती हैं।

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