उपराष्ट्रपति ने सिद्ध चिकित्सा में वैज्ञानिक रिसर्च के लिए प्रोत्साहित किया
चेन्नई में 9वें सिद्ध दिवस समारोह में महान ऋषि अगस्त्य को श्रद्धांजलिस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Sunday 4 January 2026 02:50:12 PM
चेन्नई। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने चेन्नई में 9वें सिद्ध दिवस समारोह में महान ऋषि अगस्त्य को श्रद्धांजलि देते हुए आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में सिद्ध चिकित्सा प्रणाली की स्थायी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उपराष्ट्रपति ने देश-विदेश के सिद्ध चिकित्सकों, शोधकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए कहाकि सिद्ध चिकित्सा प्रणाली भारत के सभ्यतागत ज्ञान की गहराई में निहित है। उन्होंने कहाकि आयुष केतहत सिद्ध, आयुर्वेद, यूनानी और योग जैसी पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियां अतीत की अवशेष नहीं हैं, बल्कि समय से उपयोगी साबित हो रही कार्य प्रणालियां हैं। उन्होंने कहाकि सिद्ध प्रणाली, शरीर मन और प्रकृति केबीच सामंजस्य पर अपने जोर केसाथ स्वास्थ्य, निवारक देखभाल और जीवनशैली प्रबंधन केलिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान करती है, जो जीवनशैली संबंधी विकारों, तनाव और पर्यावरणीय चुनौतियों से चिन्हित युग में विशेष रूपसे प्रासंगिक है।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि सिद्ध चिकित्सा बीमारियों को जड़ से खत्म करने पर ध्यान केंद्रित करती है। उन्होंने कहाकि यह प्रणाली अपने व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण के कारण बीमारी के जड़ से खत्म होने और पूरी तरह ठीक होने की उम्मीद देती है। पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों को बचाने और बढ़ावा देने पर ज़ोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने शोधकर्ताओं, डॉक्टरों और शैक्षणिक संस्थानों से सिद्ध ज्ञान को डॉक्यूमेंट करने, आधुनिक बनाने और दुनियाभर में शेयर करने केलिए मिलकर काम करने का आग्रह किया, साथही इसके नैतिक और दार्शनिक आधारों की भी रक्षा करने को कहा। उन्होंने खास तौरपर युवा छात्रों और शोधकर्ताओं को सिद्ध में वैज्ञानिक रिसर्च करने केलिए प्रोत्साहित किया, ताकि उन बीमारियों का इलाज ढूंढा जा सके, जिन्हें लाइलाज माना जाता है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि चिकित्सा की हर प्रणाली की अपनी ताकत और फायदे होते हैं। उन्होंने मानवता के फायदे केलिए सभी चिकित्सा प्रणालियों की संबंधित ताकतों का इस्तेमाल करके उनके प्रति सकारात्मक और समावेशी दृष्टिकोण अपनाने के महत्व पर ज़ोर दिया। समारोह का विषय ‘वैश्विक स्वास्थ्य केलिए सिद्ध’ था।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि सिद्ध दिवस एक महत्वपूर्ण याद दिलाता हैकि एक स्वस्थ, अधिक संतुलित और टिकाऊ समाज बनाने केलिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान केसाथ जोड़ने की आवश्यकता है। इससे पहले उपराष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल पर आयुष मंत्रालय की प्रदर्शनी का दौरा किया। उन्होंने सिद्ध चिकित्सा प्रणाली की समृद्ध विरासत को दर्शाने वाले सिद्ध पांडुलिपियों, पुस्तकों, कच्चे माल और हर्बल दवाओं के विशाल संग्रह को प्रदर्शित करने केलिए आयुष मंत्रालय की सराहना की। सिद्ध दिवस समारोह का आयोजन आयुष मंत्रालय केतहत संस्थानों, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिद्ध और सेंट्रल काउंसिल फॉर रिसर्च इन सिद्ध ने तमिलनाडु सरकार के भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी निदेशालय केसाथ मिलकर किया। सिद्ध चिकित्सा पद्धति के क्षेत्रमें असाधारण और सराहनीय योगदान केलिए पांच जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर आयुष मंत्रालय में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में राज्यमंत्री प्रतापराव जाधव, तमिलनाडु सरकार के स्वास्थ्य मंत्री, आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा डैश और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।