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आंध्रा की सुप्रसिद्ध पोंडुरु खादी को जीआई टैग

मोदी नेतृत्व में खादी फैशन स्टेटमेंट व आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक

केवीआईसी के अध्यक्ष का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आभार व्यक्त

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 17 January 2026 06:29:40 PM

andhra pradesh's renowned ponduru khadi receives gi tag.

श्रीकाकुलम (आंध्र प्रदेश)। केंद्रीय सूक्ष्म लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने आंध्र प्रदेश की सुप्रसिद्ध पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग प्रदान किए जाने पर कहा हैकि जीआई टैग मिलने से पोंडुरु खादी को न केवल राष्ट्रीय, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तरपर पहचान मिलेगी और इससे कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और नए रोज़गार सृजित होंगे। उन्होंने कहाकि पोंडुरु खादी महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों से गहराई से जुड़ी हुई है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज खादी एक फैशन स्टेटमेंट एवं आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक बन चुकी है, जो गांधी से मोदी युग तककी वैचारिक निरंतरता को दिखाता है।
केवीआईसी अध्यक्ष ने कहाकि जीआई टैग प्राप्त होने केबाद अब पोंडुरु खादी को नकली उत्पादों से कानूनी संरक्षण मिलेगा, जिससे उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं प्रामाणिक उत्पाद की गारंटी मिलेगी और कारीगरों को उनके श्रम का उचित मूल्य सुनिश्चित होगा। मनोज कुमार ने कहाकि केवीआईसी भारत के पारंपरिक खादी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तरपर पहचान दिलाने केलिए निरंतर प्रयासरत है। मनोज कुमार ने बतायाकि यह जीआई मान्यता इस दुर्लभ हस्तकारी वस्त्र को कानूनी संरक्षण प्रदान करती है और इसकी विशिष्ट प्रामाणिकता को सुरक्षित रखती है। मनोज कुमार ने बतायाकि पोंडुरु खादी को जीआई टैग प्रदान किया जाना संपूर्ण खादी क्षेत्र केलिए गर्व का विषय है, यह पीढ़ियों से इस परंपरा को संजोए कारीगरों के योगदान को सम्मान देता है। उन्होंने कहाकि यह उपलब्धि खादी को वैश्विक पहचान दिलाने के सतत प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहाकि वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों ने देशभर के पारंपरिक कारीगरों में एक नई ऊर्जा, सम्मान और पहचान का संचार किया है।
मनोज कुमार ने बतायाकि पोंडुरु खादी आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव में तैयार किया जाने वाला एक पारंपरिक हस्तनिर्मित सूती कपड़ा है, जिसे स्थानीय लोग पटनुलु कहते हैं, यह कपड़ा पहाड़ी कपास, पुनासा कपास और लाल कपास से बनाया जाता है, जो इसी क्षेत्रमें उगाई जाती हैं। मनोज कुमार ने बतायाकि कपास की सफाई, कताई और बुनाई की पूरी प्रक्रिया हाथों से की जाती है, जिससे सदियों पुराना पारंपरिक कौशल सुरक्षित रहता है। उन्होंने बतायाकि इसकी सबसे अनोखी विशेषता यह हैकि कपास की सफाई केलिए वालुगा मछली के जबड़े की हड्डी का उपयोग किया जाता है, जो विश्व में केवल यहीं देखने को मिलता है। मनोज कुमार ने बतायाकि पोंडुरु खादी अपनी अत्यधिक उच्च धागा संख्या (यार्न काउंट) लगभग 100-120 केलिए जाना जाता है, जो इसकी बेहद बारीक गुणवत्ता को दर्शाती है। इस अवसर पर मनोज कुमार ने पोंडुरु खादी से जुड़े कामगारों से मुलाकात की। 

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