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कादियां ब्यास रेल लाइन परियोजना पुनर्जीवित

पंजाब में संपर्क, पर्यटन एवं विकास को मिलेगा बड़ा बढ़ावा

रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने दी विस्तृत जानकारी

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Thursday 18 June 2026 06:56:20 PM

minister of state for railways ravneet singh bittu

नई दिल्ली। पंजाब के माझा क्षेत्र केलिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूपमें भारत सरकार ने लंबित कादियां-ब्यास रेल लाइन परियोजना को पुनर्जीवित कर दिया है। आज रेल भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस महत्वपूर्ण परियोजना केलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहाकि पंजाब में रेलवे अवसंरचना को सुदृढ़ करने और क्षेत्रीय विकास को गति देने केलिए केंद्र सरकार निरंतर प्रतिबद्ध है। रवनीत सिंह बिट्टू ने बतायाकि प्रस्तावित रेल लाइन गुरदासपुर जिले के कादियां को अमृतसर जिले के ब्यास से जोड़ेगी। लगभग 39.68 किलोमीटर लंबी इस ब्रॉडगेज रेल लाइन की अनुमानित लागत करीब ₹1,400 करोड़ है। परियोजना का क्रियांवयन उत्तरी रेलवे करेगा।
रेल राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बतायाकि प्रस्तावित रेल मार्ग कादियां, धपाई, घुमान, बुटाला, सठियाला और ब्यास जैसे महत्वपूर्ण कस्बों एवं गांवों से होकर गुजरेगा। उन्होंने कहाकि इससे माझा क्षेत्र के अनेक इलाकों को पहलीबार रेल नेटवर्क से सीधा जुड़ाव मिलेगा, स्थानीय लोगों की आवाजाही और परिवहन सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्होंने कहाकि परियोजना के अंतर्गत अत्याधुनिक रेलवे अवसंरचना विकसित की जाएगी, जिसमें घुमान और बुटाला में दो क्रॉसिंग स्टेशन, 11 प्रमुख पुल, 121 लघु पुल, 54 रोड अंडर ब्रिज, आधुनिक सिग्नलिंग, दूरसंचार प्रणाली और स्वदेशी ट्रेन टक्कररोधी प्रणाली ‘कवच’ का प्रावधान शामिल है। रवनीत सिंह बिट्टू ने कहाकि कादियां-ब्यास रेल लिंक की परिकल्पना ब्रिटिश काल में की गई थी, वर्ष 1928-29 में तत्कालीन नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे ने इस परियोजना को स्वीकृति दी थी और 1930 के दशक के प्रारंभ तक निर्माण कार्य का एक बड़ा हिस्सा पूरा भी कर लिया गया था, हालांकि बाद में बदलती परिस्थितियों और विकास की प्राथमिकताओं के कारण यह परियोजना बंद कर दी गई।
रवनीत सिंह बिट्टू ने बतायाकि परियोजना के रणनीतिक एवं विकासात्मक महत्व को देखते हुए इसे बादमें सामाजिक रूपसे वांछनीय रेल संपर्क परियोजना के रूपमें पुनर्जीवित किया गया तथा वर्ष 2010-11 के पूरक रेल बजट में शामिल किया गया। विभिन्न कारणों और प्रक्रियागत बाधाओं के चलते परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी, लेकिन अब इसे पुनः गति प्रदान की गई है तथा लगभग ₹1,400 करोड़ की संशोधित विस्तृत अनुमान रिपोर्ट तैयार की गई है। रवनीत सिंह बिट्टू ने कहाकि यह रेल लाइन केवल क्षेत्रीय संपर्क को ही मजबूत नहीं करेगी, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में अमृतसर-पठानकोट रेलखंड के वैकल्पिक मार्ग के रूपमें भी कार्य करेगी, जिससे उत्तरी भारत में रेलवे संचालन की मजबूती और लचीलापन बढ़ेगा। उन्होंने कहाकि इस परियोजना से क्षेत्रकी अर्थव्यवस्था को व्यापक लाभ मिलेगा, किसानों को अपनी कृषि उपज केलिए बेहतर बाजार उपलब्ध होंगे, परिवहन एवं लॉजिस्टिक्स सुविधाएं सुदृढ़ होंगी, व्यापार, वाणिज्य एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, निर्माण और संचालन चरणों में रोज़गार के नए अवसर सृजित होंगे। इसके अतिरिक्त माझा क्षेत्रमें निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रवनीत सिंह बिट्टू ने कहाकि यह परियोजना कई प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक स्थलों तक पहुंच को भी आसान बनाएगी, जिनमें अहमदिया मुस्लिम समुदाय के जन्मस्थल कादियां, डेरा बाबा जैमल सिंह, ब्यास, श्रीदरबार साहिब डेरा बाबा नानक, गुरुद्वारा अचल साहिब, गुरुद्वारा भक्त नामदेवजी (घुमान), गुरुद्वारा साहिब पातशाही पंजवीं (बुर्ज साहिब), गुरुद्वारा बाबा राजा रामजी, पंडोरी धाम, राम शरणम मंदिर तथा शिरडी साईं मंदिर (गुरदासपुर) प्रमुख हैं। उन्होंने कहाकि बेहतर रेल संपर्क से धार्मिक पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा, देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों की यात्रा अधिक सुगम होगी। रवनीत सिंह बिट्टू ने कादियां, ब्यास, घुमान, बुटाला, सठियाला तथा पूरे माझा क्षेत्र के लोगों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि केलिए बधाई दी और आश्वस्त कियाकि केंद्र सरकार परियोजना से संबंधित सभी आवश्यक स्वीकृतियां शीघ्र प्राप्तकर इसके समयबद्ध क्रियांवयन केलिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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