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राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से 'शौर्य विजय यात्रा' शुरू

कारगिल की दुर्गम चोटियों पर सैनिकों ने रचा वीरता का इतिहास

भारत की एकता, वीरता और राष्ट्रीय चेतना का उत्सव-रक्षामंत्री

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 14 July 2026 03:52:37 PM

'shaurya vijay yatra' flagged off from the national war memorial

नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हैकि पाकिस्तान के नापाक मंसूबों को जमींदोज करने वाला ‘ऑपरेशन विजय’ भारतीय सेनाओं के अदम्य साहस, अद्वितीय पराक्रम और राष्ट्र केप्रति सर्वोच्च समर्पण का स्वर्णिम अध्याय है। उन्होंने कहाकि कारगिल की दुर्गम चोटियों पर विपरीत परिस्थितियों में हमारे वीर जवानों ने पराक्रम का जो इतिहास रचा उसे देश आजभी सम्मान और गौरव केसाथ याद करता है। रक्षामंत्री ने ये उद्गार कारगिल विजय दिवस-2026 के राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत आज राष्ट्रीय युद्ध स्मारक नई दिल्ली से लद्दाख के द्रास में कारगिल युद्ध स्मारक तक 13 दिवसीय 'शौर्य विजय यात्रा' को झंडी दिखाने के दौरान व्यक्त किए। शौर्य विजय यात्रा में सेवारत और सेवानिवृत्त रक्षाबल के कर्मियों सहित 28 बाइक सवार और उनके परिवार के सदस्य उत्तरी हिमालय के दुर्गम भूभाग से गुजरते हुए 1,900 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। यह यात्रा 1999 के कारगिल युद्ध में विजय सुनिश्चित करने वाले भारतीय वीरों के अदम्‍य साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि अर्पित करती है। शौर्य विजय यात्रा का आदर्श वाक्य है 'एक सवारी, एक राष्ट्र, एक सलाम'।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वीर शहीद सैनिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहाकि 'शौर्य विजय यात्रा' भारत की एकता, वीरता और राष्ट्रीय चेतना का उत्सव है। उन्होंने कहाकि देश के सैनिकों ने अदम्‍य साहस, धैर्य, अनुशासन और अद्वितीय देशभक्ति का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा है, जिसका विश्वभर की सेनाएं भी अध्ययन और सम्मान करती हैं। उन्होंने कहाकि लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई और माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक गिरते तापमान में हमारे सैनिकों ने साहस और दृढ़ता केसाथ अपने लक्ष्य को प्राप्त किया, उन्होंने दुश्मन के कब्जे से हर चोटी, पहाड़ी और बंकर को वापस ले लिया और तिरंगे का गौरव बनाए रखा। रक्षामंत्री ने कहाकि यह विजय हमारी भूमि, पहचान और सम्मान पर किसीभी शत्रुतापूर्ण दुस्‍साहस का पूरी शक्ति से जवाब देने के भारत के अटूट संकल्प का प्रतीक है। राजनाथ सिंह ने परमवीर चक्र से सम्मानित भारतीय वीर सैनिकों-कप्तान विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर (मानद कप्तान) संजय कुमार (सेवानिवृत्त) को युद्ध में विजय सुनिश्चित करने में उनके अमूल्य योगदान केलिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। रक्षामंत्री ने कहाकि ये वीर सैनिक युवाओं केलिए प्रेरणास्रोत हैं और आनेवाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करते रहेंगे।
शौर्य विजय यात्रा के दौरान राइडर्स चंडीमंदिर युद्ध स्मारक, रेजांग ला युद्ध स्मारक और लेह युद्ध स्मारक सहित प्रमुख सैन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे वीरांगनाओं से भेंट करेंगे और उनके साहस और दृढ़ता को पहचानते हुए उन्हें सम्मानित भी करेंगे। शौर्य विजय यात्रा का समापन 26 जुलाई 2026 को कारगिल विजय दिवस पर कारगिल युद्ध स्मारक पर होगा। इस दौरान सवार राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की पवित्र मिट्टी से भरा कलश लेकर चलेंगे, जिसे शहीदों की स्मृति में कारगिल में अर्पित किया जाएगा। रक्षामंत्री ने इसपर कहाकि जब यहां की मिट्टी कारगिल की मिट्टी से मिलेगी तो यह राष्ट्र की वर्तमान पीढ़ी की श्रद्धा और राष्ट्र के नायकों की वीरता के संगम का प्रतीक होगी। शौर्य विजय यात्रा के एक महत्वपूर्ण पहलू का उल्‍लेख करते हुए राजनाथ सिंह ने कहाकि यह यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों से सेवारत अधिकारियों, पूर्व सैनिकों और नागरिकों को एकसाथ लाती है। उन्होंने कहाकि विभिन्न पृष्ठभूमि, भाषाएं और परंपराएं फिरभी एक तिरंगा, एक राष्ट्र और हमारे नायकों केप्रति साझा श्रद्धा यही हमारे देश की पहचान है।
ध्वजारोहण समारोह में राष्ट्रीय कैडेट कोर के कैडेटों की उपस्थिति में रक्षामंत्री ने विश्वास व्यक्त कियाकि यह शौर्य विजय यात्रा लोगों विशेषकर युवाओं में देशभक्ति की भावना को और जागृत करेगी। उन्होंने कहाकि यह भावी पीढ़ियों को यह संदेश देगीकि राष्ट्र की स्वतंत्रता और सम्मान की रक्षा केवल सीमाओं पर ही नहीं, बल्कि हमारी स्मृतियों और मूल्यों में भी निहित है। उन्होंने कहाकि शौर्य विजय यात्रा ऑपरेशन विजय के दौरान प्रदर्शित मूल्यों को आगे बढ़ाने केलिए भारतीय सेना की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। रक्षामंत्री ने कहाकि यह आनेवाली पीढ़ियों को कर्तव्य, सम्मान और नि:स्वार्थ सेवा मूल्यों को बनाए रखने केलिए प्रेरित करती रहेगी। शौर्य विजय यात्रा के शुभारंभ पर रक्षा प्रमुख जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थलसेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी-कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। 

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