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लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ

'एक दशक में मौसम पूर्वानुमान अवसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ'

मिशन मौसम केतहत देशभर में सौ डॉप्लर मौसम रडार होंगे-डॉ जितेंद्र

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Monday 8 June 2026 06:12:28 PM

inauguration of the new regional meteorological centre in lucknow

लखनऊ। भारत सरकार में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केसाथ लखनऊ में नए क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र का शुभारंभ किया। डॉ जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहाकि इस एक दशक में भारत के मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में अभूतपूर्व विस्तार हुआ है, जिससे देशभर में अधिक सटीक, स्थान विशिष्ट और प्रभाव आधारित मौसम पूर्वानुमान सेवाएं संभव हो पाई हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि मौसम पूर्वानुमान और अवलोकन प्रणालियों में हासिल की प्रगति ने नागरिकों, आपदा प्रबंधन एजेंसियों, किसानों, पर्यटकों और विमानन क्षेत्र को मौसम सेवाएं प्रदान करने के तरीके को बदल दिया है। उन्होंने बतायाकि 2014 में भारत में केवल 17 डॉप्लर मौसम रडार थे, जबकि जम्मू-कश्मीर, पंजाब और उत्तराखंड सहित कई राज्यों में एक भी रडार नहीं था। उन्होंने जानकारी दीकि अब यह नेटवर्क बढ़कर 50 डॉप्लर मौसम रडार तक पहुंच गया है और मिशन मौसम केतहत 50 और रडार प्रस्तावित हैं, जिससे अगले दो वर्ष में कुल संख्या लगभग 100 हो जाएगी।
पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री ने कहाकि इस विस्तार से देशभर में वास्तविक समय में मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मौसम पूर्वानुमान सेवाओं में हुई प्रगति पर डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि मौसम पूर्वानुमान व्यापक क्षेत्रीय पूर्वानुमानों से विकसित होकर अब अत्यधिक स्थानीय और समय विशिष्ट पूर्वानुमानों तक पहुंच गया है। उन्होंने कहाकि अब नागरिक अगले कुछ घंटों की मौसम स्थितियों सहित सटीक अल्पकालिक पूर्वानुमान प्राप्त कर सकते हैं, जिससे बेहतर योजना बनाने और तैयारी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहाकि मौसम पूर्वानुमानों पर जनता का बढ़ता विश्वास अवलोकन नेटवर्क, पूर्वानुमान मॉडल और प्रसार प्रणालियों में किए गए महत्वपूर्ण सुधारों का परिणाम है। उत्तर प्रदेश का विशेष रूपसे उल्लेख करते हुए डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि राज्य की भौगोलिक विविधता और जलवायु परिवर्तनशीलता इसे उन्नत मौसम विज्ञान सेवाओं केलिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक बनाती है। उन्होंने कहाकि उत्तर प्रदेश बाढ़, सूखा, लू, आंधी-तूफान और अन्य चरम मौसम घटनाओं केप्रति अत्यधिक संवेदनशील है, इसलिए जनसुरक्षा और आपदा तैयारियों केलिए समय पर पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणाली अत्यंत महत्वपूर्ण है।
डॉ जितेंद्र सिंह ने इस एक दशक में उत्तर प्रदेश में मौसम विज्ञान संबंधी बुनियादी ढांचे में हुई उल्लेखनीय वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बतायाकि जहां 2014 में राज्य में केवल एक डॉप्लर मौसम रडार था, वहीं अब तीन चालू हैं और कई अन्य चालू किए जा रहे हैं। उन्होंने कहाकि राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की संख्या 59 से बढ़कर 107 हो गई है, स्वचालित वर्षामापी स्टेशनों की संख्या 132 से बढ़कर 140 हो गई है और बिजली गिरने के सेंसरों की संख्या 0 से बढ़कर 7 हो गई है। उन्होंने बतायाकि राज्य में विमानन बुनियादी ढांचे के बढ़ते विस्तार को दर्शाते हुए अब उत्तर प्रदेश के ग्यारह हवाई अड्डों पर विमानन मौसम विज्ञान सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने उत्तराखंड में मौसम विज्ञान सेवाओं के विस्तार पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बतायाकि बाढ़, बादल फटने, भूस्खलन और हिमस्खलन जैसी आपदाओं केप्रति संवेदनशील होने के बावजूद, राज्य में पहले कोई डॉप्लर मौसम रडार नहीं था। उन्होंने कहाकि ऐसे तीन रडार स्थापित किए जा चुके हैं और 'मिशन मौसम' केतहत अतिरिक्त प्रणालियों की योजना बनाई जा रही है। उन्होंने कहाकि स्वचालित मौसम स्टेशनों, हवाईअड्डे मौसम वेधशालाओं और बिजली गिरने का पता लगाने वाली प्रणालियों की संख्या में भी काफी वृद्धि हुई है, जिससे हिमालयी क्षेत्रमें मौसम की निगरानी क्षमता मजबूत हुई है।
लखनऊ में मौसम विज्ञान केंद्र पर डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि यह केंद्र मौसम विज्ञान सेवाओं के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय पूर्वानुमान क्षमताओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने बतायाकि यह केंद्र उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करेगा, जिससे मौसम संबंधी जानकारी की अधिक केंद्रित निगरानी, पूर्वानुमान और प्रसार संभव हो सकेगा। उन्होंने बतायाकि राज्य सरकार के सहयोग से उन्नत डॉप्लर मौसम रडार और पवन प्रोफाइलर प्रणालियों सहित समर्पित बुनियादी ढांचे के विकास की योजनाएं चल रही हैं। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि बेहतर पूर्वानुमान प्रणालियां अचानक आनेवाली बाढ़, बादल फटने, आंधी-तूफान, बिजली गिरने, हिमस्खलन और अन्य चरम मौसम संबंधी घटनाओं की अग्रिम चेतावनी प्रदान करके आपदा जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहाकि पूर्वानुमान की सटीकता में काफी सुधार हुआ है, लेकिन मौसम सेवाओं की प्रभावशीलता अंततः स्थानीय प्रशासन की समय पर की गई कार्रवाई और मौसम विज्ञान एजेंसियों की जारी सलाह और चेतावनियों का जनता द्वारा पालन करने पर निर्भर करती है।
पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री ने नागरिकों, स्थानीय अधिकारियों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों से मौसम पूर्वानुमानों का पूरा उपयोग करने और विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों से उपलब्ध प्रारंभिक चेतावनियों को गंभीरता से लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहाकि मौसम संबंधी जानकारी अब जिलों, स्थानीय प्रशासनों और पंचायतों तक वास्तविक समय में पहुंच रही है, इसे योजना और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहाकि लखनऊ में क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र की घोषणा भारत की मौसम एवं जलवायु सेवाओं की संरचना को मजबूत करने की दिशामें एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। डॉ जितेंद्र सिंह ने कहाकि उम्मीद हैकि यह केंद्र पूर्वानुमान क्षमताओं को बढ़ाएगा, मौसम संबंधी सलाहों के प्रसार में सुधार करेगा और पूरे क्षेत्रमें आपदा प्रबंधन, कृषि, विमानन और सार्वजनिक सुरक्षा को सहयोग प्रदान करेगा।

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