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एमआईएफएफ में फ़िल्म गुदगुदी का प्रीमियर

उम्मीद, खुद को अपनाने और भावनात्मक स्वास्थ्य का संदेश!

फ़िल्म मेकर्स का प्लान सिनेमाघरों में भी रिलीज़ करने का है

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 20 June 2026 05:11:06 PM

premiere of the film 'gudgudi' at miff

मुंबई। उन्नीसवें मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव में हिंदी लघु फ़िल्म गुदगुदी का एशिया प्रीमियर हुआ। करीब 21 मिनट की यह हिंदी लघु फ़िक्शन फ़िल्म मनीषा मकवाना के निर्देशन में बनी पहली फ़िल्म है। फ़िल्म के प्रीमियर पर एनएफडीसी ने निर्देशक मनीषा मकवाना, निर्माता हर्षवर्धन पटेल, मुख्य कलाकार एहसास चन्ना और हृदांश पारेख और क्रू मेंबर्स को सम्मानित किया। इससे पहले निर्देशक मनीषा मकवाना और निर्माता हर्षवर्धन पटेल ने मीडिया से बातचीत में फ़िल्म के बनने, इसके विषयों और महोत्सव की यात्रा के बारेमें जानकारी साझा की। फिल्म के नाम गुदगुदी का महत्व बताते हुए मनीषा मकवाना ने कहाकि यह खुशी और उम्मीद की भावना का प्रतीक है। उन्होंने कहाकि फ़िल्म का समापन बच्चे के किरदार आरव के ये कहने केसाथ होता हैकि उसे अपने दिल में 'गुदगुदी' महसूस हो रही है, यही भावना कहानी के सार को दर्शाती है। निर्देशक मनीषा मकवाना कहती हैंकि यह फिल्म उनके दिल के बहुत करीब है और उन्हें उम्मीद हैकि फ़िल्म देखने पर हर किसीको गुदगुदी का अहसास कराएगी।
फ़िल्म 'गुदगुदी' रितु नाम की एक युवा महिला की कहानी है, जो एक एम्यूज़मेंट पार्क में मैस्कॉट के तौरपर काम करती है। अपने काम को लेकर शर्मिंदगी और निजी ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबी रितु, अपनी अहमियत को लेकर उलझन में रहती है। आरव नाम के एक बच्चे केसाथ बातचीत केबाद वह अपनी ज़िंदगी और काम को एक नए नज़रिए से देखने लगती है। निर्देशक के मुताबिक मैस्कॉट की पोशाक एक तरह के फ़िल्टर का काम करती है, जो रितु की असली भावनाओं और अंदरूनी संघर्षों को दुनिया से छिपाए रखती है। गुदगुदी का मुख्य किरदार रितु सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि यह हर मध्यम वर्ग के बच्चे की कहानी है। आरव, जो उसकी पोशाक के पीछे छिपी रितु को देख पाता है, उसके साथ उसका शांत रिश्ता फिल्म का भावनात्मक केंद्र बन जाता है और धीरे-धीरे उसकी आवाज़ को वापस बाहर लाता है।
निर्देशक की बारीकी हाई एंगल शॉट्स के इस्तेमाल में दिखती है, जो रितु की घटती हुई आत्मछवि को दिखाते हैं, जबकि एकदूसरे पर चढ़ते और अस्तव्यस्त दृश्य उसके अंदर की उथल-पुथल को दर्शाते हैं। एक दिलचस्प बदलाव के तौरपर आमतौर पर बिना आवाज़ वाला मैस्कॉट सिर्फ़ 'वॉयसओवर' में बोलता है, जिससे उसके बाहरी मुखौटे और निजी कमज़ोरी केबीच का फ़र्क और गहरा हो जाता है। आख़िरकार रितु आरव के सामने अपना मैस्कॉट वाला सिर हटाती है, वही आरव जिसने उसे सच में देखा है, असलियत में भी और भावनात्मक रूपसे भी। फ़िल्म एक खुले अंत केसाथ ख़त्म होती है और दर्शकों को संदेश देती हैकि वे अपनी गुदगुदी खोजें, जो उम्मीद और खुशी का प्रतीक है और उस खुशी को फिरसे पाने के अपने-अपने नज़रिए को अपनाने का न्योता देती है। अंत में फ़िल्म असल ज़िंदगी के मैस्कॉट्स की कड़ी मेहनत की तारीफ़ करते हुए उन्हें खास तौरपर धन्यवाद देती है। निर्देशक ने कहाकि फ़िल्म की कहानी उनके अपने निजी अनुभवों से प्रेरित है। उन्होंने कहाकि रितु और आरव का सफर दिखाता हैकि कभी-कभी अपने भावनाओं के बोझ को उतार देना ठीक है। यह फ़िल्म दर्शकों में उम्मीद जगाती है और लोगों को अपने करीबियों से खुलकर बात करने केलिए प्रेरित करती है।
फ़िल्म के डायलॉग्स में गुजराती लहज़ा है, जिससे निर्देशक का निजी जुड़ाव भी इसमें झलकता है जैसाकि उन्होंने कहाकि यह फ़िल्म उनके अपने निजी अनुभवों पर आधारित है। फ़िल्म गुदगुदी की शूटिंग अहमदाबाद के बाल वाटिका पार्क में हुई है, इसमें कई ऐसे सरल से पल और उसी वक्त किए गए सुधार शामिल हैं, जो शूटिंग के दौरान अपने-आप सामने आए। निर्देशक ने फ़िल्म के सबसे असरदार पल के तौरपर उस सीन का ज़िक्र किया, जिसमें रितु आखिरकार अपनी ज़िंदगी को जैसी है, वैसी ही अपना लेती है और आज़ादी का एहसास करती है। फ़िल्म के मुख्य संदेश पर बात करते हुए निर्माता हर्ष पटेल ने लोगों से अपने अंदर की दुनिया पर ध्यान देने को कहा। उन्होंने कहाकि लोगों को भरोसेमंद दोस्तों और परिवार के सदस्यों से खुलकर बात करनी चाहिए, भावनात्मक तौरपर स्वस्थ होने की शुरुआत ईमानदार बातचीत से होती है। लीड रोल केलिए अभिनेत्री एहसास चन्ना को लेने पर निर्देशक मनीषा मकवाना ने कहाकि स्क्रिप्ट उन्हें ही ध्यान में रखकर ही लिखी गई थी। उन्होंने कहाकि एहसास उन कलाकारों में से नहीं है, जो दिखावा करते हैं। कलाकारों को आमतौर पर अपना चेहरा दिखाना पसंद होता है, लेकिन इस फिल्म में उनका चेहरा ज़्यादातर समय एक मैस्कॉट मास्क के पीछे छिपा रहता है और सिर्फ़ कुछ मिनटों केलिए ही दिखाई देता है, शायद अपनी कला पर उनके भरोसे ने ही उन्हें यह रोल चुनने केलिए प्रेरित किया।
निर्देशक मनीषा मकवाना ने बाल कलाकार हृदांश की कास्टिंग के बारेमें भी बात की, जिन्हें कास्टिंग निर्देशक ने उनके पिछले प्रोजेक्ट में किए गए काम से प्रभावित होने केबाद चुना। मनीषा मकवाना ने कहाकि ऑनलाइन और ऑफ़लाइन ज़िंदगी केबीच संतुलन बनाने के दबाव की वजह से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। उन्होंने बतायाकि यह फ़िल्म लोगों को सोचने-समझने, खुदको स्वीकार करने और भावनाओं को खुलकर ज़ाहिर करने केलिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने यहभी बतायाकि उन्होंने पहले 'स्त्री' और 'द फ़ैमिली मैन' जैसे मशहूर प्रोजेक्ट्स पर काम किया है और सिनेमा जगत में फ़िल्ममेकर्स राज निदिमोरु और कृष्णा डीके (राज और डीके) को अपना गुरू मानती हैं। गुदगुदी को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। फ़िल्म को कान फ़िल्म फ़ेस्टिवल के शॉर्ट फ़िल्म कॉर्नर में भी दिखाया गया था। निर्माता हर्ष पटेल ने कहाकि मेकर्स इस फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज़ करने पर विचार कर रहे हैं। निर्माता और निर्देशक ने यह भी बतायाकि यह फ़िल्म अभी कुछ समय तक अलग-अलग फिल्म समारोहों में हिस्सा लेती रहेगी।

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