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'डाक विभाग से सतीश गुजराल का रिश्ता गहरा'

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शताब्दी वर्ष पर जारी किया स्मारक डाक टिकट

डाक टिकटों में प्रगति, सशक्तिकरण और राष्ट्रीय विकास को जीवंत किया

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 4 August 2026 01:29:52 PM

commemorative postage stamp on satish gujral's centenary year

नई दिल्ली। भारतीय डाक विभाग ने प्रसिद्ध कलाकार, वास्तुकार, मूर्तिकार, लेखक और पद्मविभूषण से सम्मानित श्रीयुत सतीश गुजराल के शताब्दी वर्ष पर बीकानेर हाउस नई दिल्ली में एक विशेष समारोह में स्मारक डाक टिकट जारी किया। यह टिकट केंद्रीय संचार तथा उत्तरी पूर्वी क्षेत्र विकास राज्यमंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जारी किया। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने डाक विभाग केसाथ सतीश गुजराल के लंबे और प्रिय संबंधों को स्मरण करते हुए सतीश गुजराल को एक रचनात्मक प्रतिभा बताया और कहाकि उनका जीवन दृढ़ता, नवाचार और उत्कृष्टता का परिचायक रहा। उन्होंने उनके चित्रकार, मूर्तिकार, वास्तुकार, मूर्तिकार और लेखक के रूपमें असाधारण योगदानों को उजागर किया और कहाकि उनके कार्य भारत व विश्वभर में पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं।
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बतायाकि सतीश गुजराल सिर्फ कला नहीं रचते थे, बल्कि अपने डाक टिकट डिजाइनों से विचारों को प्रभावशाली दृश्य कथाओं में भी बदल देते थे। उन्होंने स्मरण करायाकि बीएसएनएल के 125वे वार्षिकोत्सव पर जारी स्मारक डाक टिकट में सतीश गुजराल ने संचार के विचार को प्रभावशाली दृश्यों में रूपांतरित किया था, इसी तरह वित्तीय समावेशन के डाक टिकट में उन्होंने प्रगति, सशक्तिकरण और राष्ट्रीय विकास के विषयों को सूचक प्रतीकों से जीवंत किया था। डाक टिकटों के स्थायी महत्व पर केंद्रीय मंत्री ने कहाकि डाक टिकट आकार में बहुत छोटे होते हैं, पर वे देश की आत्मा को समेटे रहते हैं, वे 140 करोड़ लोगों का जज्बा लेकर शहर से शहर, गांव से गांव, तालुका से तालुका तक यात्रा करते हैं और पीढ़ियों तक देश के इतिहास, संस्कृति और सामूहिक स्मृतियों को पहुंचाते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि यह स्मारक डाक टिकट सतीश गुजराल की विरासत को संरक्षित करेगा और आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा। स्मारक डाक टिकट पर सतीश गुजराल की एक मुद्रित आकृति है, जिसमें वह बैठकर हाथ में सक्रिय रूपसे पेंटब्रश थामे हुए दिखाई देते हैं, जो उनकी जीवनभर की कला और रचनात्मकता केप्रति लगन का प्रतीक है।
स्मारक डाक टिकट में उनकी विचारशील मुद्रा उनकी कलात्मक दृष्टि की गहराई और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाती है। यह टिकट डिजाइनर अनुज कुमार ने डिज़ाइन किया है और इसका प्रस्ताव रसील गुजराल अंसल ने रखा था। सतीश गुजराल भारत के सबसे प्रमुख रचनात्मक विभूतियों में से एक थे, जिनका करियर सात दशक से अधिक वर्ष तक फैला हुआ था। उन्होंने भारतीय कला, वास्तुकला और संस्कृति में अनुकरणीय योगदान दिया और ऐसी विरासत छोड़ गए, जो विश्वभर के कलाकारों केलिए प्रेरणा बन गई। यह स्मारक डाक टिकट उनके जीवन, उपलब्धियों और भारत की सांस्कृतिक विरासत में उनके स्थायी योगदान का उत्सव मनाता है। इस मौके पर पोस्टमास्टर जनरल (डायरेक्टर जनरल पोस्टल सर्विसेज) जितेंद्र गुप्ता, मुख्य डाकपाल महानिदेशक दिल्ली सर्कल कर्नल अखिलेश कुमार पांडेय, प्रख्यात भारतीय चित्रकार, मूर्तिकार पद्मभूषण जतिन दास, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट के पूर्व निदेशक डॉ राजीव लोचन, गुजराल परिवार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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