सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने साझा किया विवरण
वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में शानदार प्रदर्शनस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 30 July 2026 05:00:32 PM
नई दिल्ली। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में प्रदर्शन पिछले साल की तुलना में मुनाफे में आई भारी उछाल के बारेमें ही नहीं है, बल्कि यह इस बारेमें हैकि कैसे वित्तीय सूझबूझ और प्रचालन दूरदर्शिता ने मिलकर यह परिणाम दिया है। सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ अशोक कुमार पंडा ने सेल के शानदार प्रदर्शन पर कहाकि यह प्रदर्शन कंपनी की एकीकृत रणनीति की ताकत को दर्शाता है, भलेही मध्य-पूर्व में अस्थिरता के कारण वैश्विक बाधाओं ने चुनौतियां खड़ी कीं, लेकिन हमने वित्तीय सूझबूझ और सक्रिय प्रचालन उपायों के तालमेल से दृढ़ता दिखाई। उनका कहना हैकि इस तिमाही का प्रदर्शन कार्यकुशलता में सुधार की दिशा में एक सचेत प्रयास को दिखाता है, उतना ही महत्वपूर्ण कंपनी का कैश फ्लो प्रबंधन, सख्त वित्तीय नियंत्रण और बेहतर वर्किंग कैपिटल प्रक्रियाओं केप्रति अनुशासित दृष्टिकोण होना रहा। ज्ञातव्य हैकि सेल भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के अधीन एक प्रमुख महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है। यह भारत की सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनियों में से एक है।
सेल की वित्तीय प्रबंधन रणनीति पर उन्होंने कहाकि पहली तिमाही के दौरान कंपनी ने अपनी दीर्घकालिक वित्तीय साख और कैश फ्लो व कर्ज के बेहतर प्रबंधन से उधारी को सीमित रखा और उधारी की लागत को कम किया। डॉ अशोक कुमार पंडा ने कहाकि लिक्विडिटी मजबूत बनी रही और डेट-इक्विटी रेशियो तथा नेट डेट-एबिटडा प्रोफाइल दोनों में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जो मुनाफे को बनाए रखते हुए उधारी के जोखिम को कम करने में सेल की सफलता को उजागर करते हैं। उन्होंने कहाकि वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही कंपनी के प्रोडक्ट मिक्स और निवेश प्राथमिकताओं में प्रगति को दिखाता है, कंपनी के कुल विक्रेय स्टील में फिनिश्ड स्टील का अनुपात वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बेहतर होकर 89 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में 86 प्रतिशत था। यह कंपनी के कुल उत्पाद बास्केट में सेमी-फिनिश्ड स्टील की धीरे-धीरे कम होती मात्रा को दर्शाता है। कंपनी के वैल्यू-एडेड स्टील की आपूर्ति का प्रतिशत भी पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.5 प्रतिशत बढ़ा है, जो गुणवत्ता आधारित विकास पर सेल के फोकस को मजबूती प्रदान करता है।
सेल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने बतायाकि कैपेक्स पूंजीगत व्यय ₹2,306 करोड़ के लक्ष्य से अधिक होकर ₹2,575 करोड़ तक पहुंच गया, जो क्षमता विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में रणनीतिक निवेश और संसाधनों के सक्रिय आवंटन केप्रति कंपनी की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहाकि इस तिमाही ने रणनीतिक योजना को प्रचालन संबंधी मजबूती में बदलने की सेल की क्षमता को भी प्रदर्शित किया, ब्लास्ट फर्नेस की उत्पादकता में सुधार हुआ, फेरो-अलॉय और फ्लक्स के अनुकूलतम खपत के जरिये इस्पात उत्पादन की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली और आनेवाली तिमाहियों में स्थिरता सुनिश्चित करने केलिए निर्धारित कैपिटल रिपेयर्स को समय से पहले सक्रिय रूपसे पूरा किया गया। डॉ अशोक कुमार पंडा ने बतायाकि प्रचालन दूरदर्शिता पर फोकस ने सप्लाई चेन के व्यवधानों के बावजूद निर्बाध प्रदर्शन सुनिश्चित किया, जहां लाइमस्टोन की आवश्यकताओं को स्वदेशी और बाहरी स्रोतों के संतुलित मिश्रण से पूरा किया गया, वहीं प्रोपेन गैस की वैकल्पिक व्यवस्थाओं ने निरंतरता को बनाए रखा। खनन कार्यों पर विशेष ध्यान देने से सेल की कैप्टिव खदानों की पूरी क्षमता का उपयोग करने में महत्वपूर्ण परिणाम मिले।
डॉ अशोक कुमार पंडा ने बतायाकि लौह अयस्क के बढ़े हुए उत्पादन ने कंपनी को कच्चे माल की अपनी आंतरिक जरूरतों की सारी आवश्यकता को पूरा करने केसाथ घरेलू बाजार में सरप्लस अयस्क बेचने में भी सक्षम बनाया। परिणामस्वरूप वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान लौह अयस्क की बिक्री में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 269 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई। उन्होंने कहाकि इस असाधारण प्रदर्शन ने कंपनी के शुद्ध लाभ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सेल के एकीकृत व्यापार मॉडल की रणनीतिक ताकत को रेखांकित किया, जिसमें खनन और इस्पात मूल्य श्रृंखला में मूल्य सृजन सीधे तौरपर बेहतर प्रचालन और वित्तीय प्रदर्शन में तब्दील होता है। डॉ अशोक कुमार पंडा ने कहाकि सेल न केवल वित्तीय सुदृढ़ता प्रदान कर रहा है, बल्कि अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को भी नया आकार दे रहा है और भविष्य केलिए तैयार बुनियादी ढांचे में निवेश कर रहा है, जिससे अस्थिर वैश्विक माहौल में सेल निरंतर प्रतिस्पर्धात्मकता की नींव रख रहा है।