संयुक्त संसदीय समिति का सुझावों पर गहन विचार विमर्श
पाली से सांसद पीपी चौधरी की अध्यक्षता में हुई बैठकस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 16 July 2026 12:50:01 PM
लखनऊ। देश में 'एक राष्ट्र एक चुनाव' से संबंधित संविधान (संशोधन) विधेयकों पर गठित संयुक्त संसदीय समिति की लखनऊ में तीन दिवसीय विचार विमर्श बैठक बुधवार को संपन्न हो गई। अंतिम दिन समिति ने प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों के कुलपतियों, निदेशकों, विधि एवं राजनीति विज्ञान के विशेषज्ञों सहित विभिन्न विभागों के प्रमुखों केसाथ विस्तृत संवादकर उनसे सुझाव प्राप्त किए। समिति प्राप्त वृहद सुझावों और अभिमतों पर आगामी चरणों में विचार करेगी। गौरतलब हैकि उत्तर प्रदेश राज्य अध्ययन दौरे के अंतर्गत राजस्थान के पाली निर्वाचन क्षेत्र से सांसद प्रेम प्रकाश चौधरी ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' पर गठित संयुक्त संसदीय समिति की अध्यक्षता करते हुए यह बैठक की।
संयुक्त संसदीय समिति की बैठक में शिक्षाविदों ने प्रस्तावित विधेयकों के लगभग सभी प्रमुख प्रावधानों पर अपने विचार साझा किए। चर्चा में केंद्र-राज्य संबंध, मध्यावधि चुनावों की स्थिति, शेष कार्यकाल, एकसाथ चुनावों की प्रणाली की स्थिरता एवं दीर्घकालिक व्यवहार्यता, निर्वाचन आयोग को प्रस्तावित शक्तियां, चुनावी सुधारों से जुड़े विभिन्न संवैधानिक और प्रशासनिक पहलुओं पर विस्तार से विचार विमर्श हुआ। संयुक्त संसदीय समिति के सदस्यों ने विशेषज्ञों के प्रस्तुत सुझावों और टिप्पणियों पर गहन चर्चा करते हुए अनेक बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगे। कई प्रश्नों के उत्तर बैठक के दौरान ही उपलब्ध करा दिए गए, जबकि कुछ जटिल विषयों पर संबंधित विशेषज्ञों के अनुरोध पर समिति ने बादमें लिखित रूपमें उत्तर प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की। इसके उपरांत समिति ने प्रदेश के पद्म पुरस्कार विजेताओं, नागरिक समाज के प्रतिनिधियों तथा मीडिया जगत की प्रमुख हस्तियों केसाथ भी संवाद किया।
एक राष्ट्र एक चुनाव की संयुक्त संसदीय समिति ने जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित करते हुए उनके विचारों और सुझावों को गंभीरता से सुना। समिति के सदस्यों ने 'एक राष्ट्र एक चुनाव' के प्रस्तावित संवैधानिक संशोधनों एवं उनके विभिन्न आयामों से भी उन्हें अवगत कराया। समिति के समक्ष अपने विचार रखने वाले प्रमुख संस्थानों में डॉ राममनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय लखनऊ, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी, डॉ राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय प्रयागराज, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय लखनऊ, लखनऊ विश्वविद्यालय, भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ, और इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रयागराज के प्रतिनिधि उपस्थित थे।