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एएसआई और कोपेनहेगन ने किया समझौता

भारत और डेनमार्क करेंगे अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज पर रिसर्च

दुर्घटनाग्रस्त डेनिश जहाज 'ओरेसंड' के अवशेषों का लगाएंगे पता

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 16 June 2026 04:35:48 PM

asi and copenhagen sign agreement

नई दिल्ली। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग और डेनमार्क के नेशनल म्यूज़ियम के न्योर्ड सेंटर फ़ॉर मैरीटाइम एंड अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज (कोपेनहेगन) ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य 1619 ईस्वी में पुडुचेरी के कराईकल तट केपास दुर्घटनाग्रस्त ऐतिहासिक डेनिश जहाज 'ओरेसंड' के अवशेषों का पता लगाने और उनका दस्तावेजीकरण करने केलिए जलमग्न पुरातात्विक परियोजना शुरू करना है। समुद्री इतिहास में ओरेसंड का विशेष महत्व है, क्योंकि यह भारत पहुंचने वाला पहला डेनिश जहाज़ माना जाता है।
भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने के कुछही समय बाद यह जहाज़ कराईकल केपास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, इस वजह से यह डेनमार्क और भारत केबीच शुरुआती समुद्री संबंधों और 17वीं सदी की शुरुआत में हिंद महासागर में समुद्री यात्रा और व्यापार के व्यापक इतिहास को समझने केलिए एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्रोत बन गया है। डेनमार्क और भारत केबीच समझौता ज्ञापन की शर्तों केतहत यह परियोजना जहाज के मलबे के संभावित अवशेषों का पता लगाने केलिए आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके नॉन इनवेसिव पुरातत्व सर्वेक्षण पर ध्यान केंद्रित करेगी। यह अन्वेषण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण का अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग डेनमार्क के नेशनल म्यूज़ियम के सहयोग से किया जाएगा।
भारत और डेनमार्क केबीच यह सहयोग अंडरवाटर आर्कियोलॉजी विंग केलिए एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि यह किसी अंतर्राष्ट्रीय संगठन केसाथ उसकी पहली संयुक्त पुरातात्विक परियोजना है। उम्मीद हैकि इस साझेदारी से भारत और डेनमार्क के बीच अंडरवाटर कल्चरल हेरिटेज पर रिसर्च के क्षेत्र में अकादमिक और वैज्ञानिक सहयोग मजबूत होगा। यह पहल अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और नॉन इनवेसिव वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से जलमग्न सांस्कृतिक विरासत के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और अध्ययन केप्रति दोनों संस्थाओं की साझी प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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