कारवार में भव्य कमीशनिंग समारोह में भारतीय नौसेना में शामिल
छत्रपति शिवाजी की शानदार विरासत लिए 'आईएनएस मालवन'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 23 July 2026 02:49:11 PM
कारवार (कर्नाटक)। आईएनएस मालवन ने भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाई। देश में डिजाइन और निर्मित माहे श्रेणी का पनडुब्बीरोधी पोत आईएनएस मालवन उथले पानी के जलपोतों में दूसरा है। कारवार में कमीशनिंग समारोह में वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह, फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वेस्टर्न नेवल कमांड वाइस एडमिरल संजय वत्सायन, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, कोचिन शिपयार्ड लिमिटेड कोच्चि के प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में इसे कमीशन किया गया। आईएनएस मालवन का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत बड़ा है, क्योंकि इसका नाम महाराष्ट्र के ऐतिहासिक तटीय शहर मालवन पर है, जो छत्रपति शिवाजी महाराज की शानदार समुद्री विरासत से जुड़ा हुआ है। यह पोत अपने पूर्ववर्ती जलपोत की विरासत को समेटे हुए है, जो एक तटीय भारतीय नौसेना की माइनस्वीपर था और 2003 तक सेवा में रहा।
आईएनएस मालवन आठ एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी में से दूसरा जलपोत है, जिसे कोच्चि सीएसएल ने देश में ही बनाया है। लगभग 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री केसाथ यह जहाज आत्मनिर्भर भारत विज़न और नौसेना डिजाइन, उपकरण, प्रणालीगत एकीकरण के बढ़ते इकोसिस्टम और रक्षा जहाज निर्माण में बढ़ती आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। यह जहाज पानी के अंदर निगरानी, पनडुब्बीरोधी युद्ध परिचालन और निम्न तीव्रता समुद्री परिचालन में सक्षम है, इसमें खान युद्ध क्षमता भी है। आशा हैकि यह जहाज तटीय रक्षा, समुद्र तट सुरक्षा को और मजबूत करेगा तथा समुद्री क्षेत्र जागरुकता को बढ़ाएगा। आईएनएस मालवन के शिखर पर 'बाघ नखा' (बाघ का पंजा) है, जो बहादुरी, युद्ध रणनीति, चपलता और साहस का प्रतीक है और यह इस सोच को दर्शाता हैकि तेजीसे हमला करें और चुपचाप वार करें। 'बाघ नखा' के चारों ओर की लहरें समुद्र की विशालता और भारतीय नौसेना के अडिग संकल्प को दर्शाती हैंकि वह हमेशा चौकस, तैयार, देश के समुद्रों और संप्रभुता की रक्षा केलिए प्रतिबद्ध रहे। जहाज का आदर्श वाक्य-'शांत पंजे' घातकता, चुपके और प्रतिद्वंद्वी पर तेजीसे हमला करने की क्षमता का प्रतीक है।
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने इस मौके पर समुद्री संचार लाइनों की सुरक्षा की अहमियत पर जोर दिया, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं केबीच समुद्री व्यापार में कोई रुकावट न आए। उन्होंने भारतीय नौसेना की प्रभावशाली प्रगति, खासकर युद्धपोत की 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी निर्माण पर आत्मनिर्भर पहल केप्रति उसकी प्रतिबद्धता की सराहना की। भारतीय नौसेना के उस मॉडल से प्रेरित होकर जिसमें अधिकारियों को सीधे जहाजनिर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जाता है, एयर चीफ ने सुझाव दियाकि ऐसे तरीके व्यापक रक्षा इकोसिस्टम में आत्मनिर्भरता को गति देते हैं। उन्होंने भारतीय सेना नौसेना और वायुसेना केबीच सहज साझेदारी का आह्वान किया, ताकि भविष्य के संघर्षों में देश एकीकृत शक्ति के रूपमें सफल हो सके। बड़े सतही युद्धपोतों, पनडुब्बियों और हवाई संरचनाओं केसाथ सहज रूपसे काम करने की क्षमता केसाथ आईएनएस मालवन का शामिल होना भारतीय नौसेना को युद्ध केलिए तैयार, भरोसेमंद, एकजुट और भविष्य केलिए सक्षम बनाता है, ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो और भारत के समुद्री हितों की हर समय और हर जगह रक्षा की जा सके।