उपराष्ट्रपति ने किया पूर्व महालेखा परीक्षक की पुस्तक का विमोचन
'लेखापरीक्षा लोकतंत्र को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 4 June 2026 01:19:24 PM
नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारत के पूर्व नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक विनोद राय की पुस्तक ‘व्हेन ऑडिट मैटर्स: सीएजी इंटरवेंशन्स दैट मेड ए डिफरेंस’ का उपराष्ट्रपति भवन में समारोहपूर्वक विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने लेखापरीक्षा को लोकतंत्र को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण साधन बताया और कहाकि यह नागरिकों को आश्वस्त करता हैकि सार्वजनिक धन का उपयोग कानून, दक्षता और निष्पक्षता के अनुरूप सार्वजनिक हित केलिए किया जा रहा है। उन्होंने कहाकि लेखापरीक्षा न केवल सरकारों को प्रणालियों में सुधार करने और कमियों को दूर करने में मदद करती है, बल्कि राज्य और नागरिकों केबीच विश्वास को भी मजबूत करती है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि सार्वजनिक जीवन में नैतिकता और लेखापरीक्षा का संयोजन परिवर्तनकारी हो सकता है, इससे सार्वजनिक सेवाओं में सुधार, सार्वजनिक संसाधनों का कुशल उपयोग, अधिक लचीलापन और जनता के विश्वास में वृद्धि हो सकती है। उन्होंने कहाकि शासन प्रणाली जनहित केलिए बनाई गई है और नैतिक शासन को लोक प्रशासन का नैतिक आधार बनना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहाकि भारत की जवाबदेही और नैतिक शासन की परंपराएं धर्म, राजधर्म और जन कर्तव्य की अवधारणाओं में गहराई से निहित हैं। उन्होंने जिक्र कियाकि यह भारतीय महाकाव्यों और शास्त्रों में प्रतिबिम्बित है, कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वित्तीय निगरानी और जवाबदेही के सिद्धांत प्रतिपादित हैं। उन्होंने कहाकि स्वतंत्रता केबाद संविधान में इन आदर्शों को संस्थागत रूप दिया गया और इसने विधि का शासन, वित्तीय जवाबदेही और संसदीय निगरानी के अधीन एक स्वतंत्र नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की स्थापना की।
उपराष्ट्रपति ने संसदीय लोकतंत्र में जवाबदेही चक्र के महत्व के बारेमें कहाकि इसकी शुरुआत बजट की विधायी स्वीकृति से होती है और लोक लेखा समितियों की लेखापरीक्षा और जांच के माध्यम से जारी रहती है। उन्होंने कहाकि यह प्रक्रिया राजकोषीय निगरानी का एक व्यापक ढांचा स्थापित करती है और सार्वजनिक वित्त पर लोकतांत्रिक नियंत्रण को मजबूत करती है। लेखापरीक्षा प्रणालियों में निरंतर सुधार की आवश्यकता के बारेमें बताते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रशिक्षण, प्रौद्योगिकी उन्नयन, प्रदर्शन मूल्यांकन, डेटा विश्लेषण और क्षेत्रीय विशेषज्ञता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि लेखापरीक्षकों को स्वयं भी सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने पूर्व वरिष्ठ लेखापरीक्षा अधिकारियों के अनुभवों को संकलित करने और महत्वपूर्ण लेखा परीक्षाओं से जुड़ी कहानियों को सरल और रोचकशैली में प्रस्तुत करने केलिए विनोद राय और उनके सहयोगियों की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह प्रकाशन सिंगापुर राष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान की एक परियोजना केतहत दक्षिण एशिया में शासन और जवाबदेही का विश्लेषण करता है। उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त कियाकि पुस्तक को व्यापक रूपसे पढ़ा जाएगा। उन्होंने कहाकि यह प्रकाशन सार्वजनिक चर्चा को समृद्ध करता है और एक जीवंत लोकतंत्र में संस्थागत जवाबदेही के स्थायी महत्व को सुदृढ़ करता है। इस अवसर पर सिंगापुर में दक्षिण एशियाई अध्ययन संस्थान के निदेशक डॉ इकबाल सिंह सेविया, रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा, भारतीय लेखापरीक्षा और पुस्तक में योगदान देनेवाले लेखासेवा के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।