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'असम का मूगा रेशम बनेगा लग्जरी ब्रांड'

ज्योतिरादित्य सिंधिया और मुख्यमंत्री का 'सेनेहजोरी' मिशन शुरू

दुनिया का दुर्लभ और भारत का पहला जीआई-टैग प्राप्त मूगा रेशम

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Wednesday 3 June 2026 02:34:32 PM

assam's muga silk to become a luxury brand

गुवाहाटी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा केसाथ मिशन ‘सेनेहजोरी-असम मूगा सिल्क यूएसपी’ का शुभारंभ किया है। मुगा रेशम को दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक रूपसे सुनहरा रेशम और भारत का पहला जीआई-टैग प्राप्त रेशम माना जाता है। यह असम में लगभग 2.6 लाख रेशम पालकों और बुनकरों के परिवारों को आजीविका प्रदान करता है। अपनी दुर्लभता और वैश्विक मान्यता के बावजूद यह क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से काफी पिछड़ा हुआ है। मिशन सेनेहजोरी एक प्रीमियम, पता लगाने योग्य और निर्यात-उन्मुख मुगा रेशम अर्थव्यवस्था का निर्माण करके इस मूल्य अंतर को पाटने का प्रयास करता है। मिशन में जोरहाट, शिवसागर, लखीमपुर, धेमाजी, डिब्रूगढ़, तिनसुकिया, माजुली और सुआलकुची सहित प्रमुख मूगा रेशम उत्पादक जिलों को शामिल है और ये क्लस्टर आधारित दृष्टिकोण से आगे बढ़ रहा है।
पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय और केंद्रीय मंत्रालयों व संगठनों के समन्वय से संचालित यह मिशन मेजबान पौधे की खेती और रेशमकीट केबीज उत्पादन से रीलिंग, बुनाई, ब्रांडिंग, निर्यात संवर्धन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी और पर्यटन तक संपूर्ण मूगा रेशम मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने का प्रयास करता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहाकि नरेंद्र मोदी सरकार पूर्वोत्तर क्षेत्र की अनूठी खूबियों और उत्पादों को वैश्विक मान्यता दिलाने और स्थानीय समुदायों केलिए स्थायी आजीविका उत्पन्न करने केलिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहाकि असम का मूगा रेशम केवल एक वस्त्र उत्पाद नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत है। ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बतायाकि मिशन सेनेहजोरी की परिकल्पना न केवल संपूर्ण सरकारी सिद्धांत पर आधारित है, बल्कि इसमें केंद्रीय मंत्रालयों, असम सरकार, तकनीकी संस्थानों और निजी क्षेत्रके भागीदारों केबीच समन्वय करते हुए संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण को अपनाया गया है। तीन वर्ष की अवधि में लगभग 396-411 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश केसाथ मिशन का उद्देश्य विश्वस्तर पर मान्यता प्राप्त लग्जरी मूगा रेशम इकोसिस्टम का निर्माण करना, उत्पादकों केलिए मूल्य प्राप्ति को बढ़ाना, असम को रेशम आधारित सांस्कृतिक और अनुभवात्मक पर्यटन केलिए एक अग्रणी गंतव्य के रूपमें स्थापित करना है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बतायाकि अष्टलक्ष्मी महोत्सव में असम के मूगा रेशम (केवल कपड़ा ही नहीं, बल्कि तैयार वस्त्र भी) के प्रदर्शन वाले एक स्टॉल पर ही मिशन सेनेहजोरी का विचार सही मायने में आकार ले पाया। उन्होंने कहाकि असम विश्व के मूगा रेशम उत्पादन का 90 प्रतिशत हिस्सा है, इस क्षेत्रकी अनूठी विशेषताएं इसका प्राकृतिक सुनहरा रंग, असाधारण टिकाऊपन और जीआई प्रमाणित ट्रेसबिलिटी इसे वैश्विक स्तरपर विलासितापूर्ण वस्त्रों में एक अलग ही स्थान देती हैं। उन्होंने कहाकि किसानों और उद्यमियों के अथक प्रयासों के बावजूद उत्पादक मूगा रेशम से केवल 18000-21000 रुपये प्रतिवर्ष कमाते हैं और मिशन सेनेहजोरी इस वास्तविकता को निर्णायक रूपसे बदलने केलिए बनाया गया है। केंद्रीय मंत्री ने मिशन के पीछे मार्गदर्शक सिद्धांत के रूपमें प्रधानमंत्री के समग्र सरकारी, समग्र भारतीय दृष्टिकोण पर बल दिया, जिसका अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना हैकि मूगा रेशम का पूरा प्रीमियम मूल्य खेत से लेकर विदेशी तटों तक पहुंचे। उन्होंने आश्वासन दियाकि हम योगदान देंगे और यह सुनिश्चित करेंगेकि मूल्य श्रृंखला से जुड़े सभी लोग एकसाथ आएं, ताकि मुगा रेशम को असम के कोकून से निकालकर विश्वस्तर पर पहुंचाया जा सके।
असम के मुख्यमंत्री ने मिशन सेनेहजोरी की परिकल्पना और समर्थन केलिए एमडीओएनईआर की सराहना की और इसे असम के पारंपरिक रेशम क्षेत्र केलिए ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहाकि मूगा रेशम असम की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है और यह मिशन राज्य की समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए किसानों, पालकों, बुनकरों, कारीगरों और उद्यमियों केलिए नए अवसर प्रदान करेगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्यमंत्री डॉ सुकांता मजूमदार ने कहाकि भारत सरकार ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास को अभूतपूर्व प्राथमिकता दी है। उन्होंने मिशन सेनेहजोरी को एक परिवर्तनकारी पहल बताया, जो असम को उच्चगुणवत्ता वाले रेशम उत्पादन के वैश्विक स्तरपर मान्यता प्राप्त केंद्र के रूपमें स्थापित करने में सहायक होगी, साथही रोज़गार सृजन, उद्यमिता प्रोत्साहन और टिकाऊ ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देगी। पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास सचिव संजय जाजू ने प्रामाणिक मूगा रेशम के एकमात्र उत्पादक के रूपमें असम को मिलने वाले अनूठे लाभ केसाथ मिशन के कार्यांवयन ढांचे के बारेमें विस्तार से बताया। उन्होंने कहाकि मिशन का मुख्य उद्देश्य मेजबान पौधे के पुनर्जनन को मजबूत करना, बीज सुरक्षा में सुधार करना, रीलिंग अवसंरचना का आधुनिकीकरण करना, जीआई प्रमाणीकरण को बढ़ावा देना, डिजिटल ट्रेसिबिलिटी सिस्टम स्थापित करना, ब्रांडिंग और निर्यात से बाजार पहुंच को बढ़ाना होगा।
सेनेहजोरी मिशन का उद्देश्य 2028 तक कई प्रमुख लक्ष्यों को प्राप्त करना है, इनमें पांच आधुनिक मुगा रीलिंग इकाइयों और एक मुगा स्पन मिल की स्थापना, 30 किसान उत्पादक संगठन और 1180 से अधिक किसान हित समूहों का निर्माण, 5000 हेक्टेयर में सोम और सोआलू प्रजाति के पौधों का पुनर्जनन, जीआई-लिंक्ड सिस्टम से व्यापार किए गए 80 प्रतिशत से अधिक मुगा रेशम का प्रमाणीकरण, 8000 से अधिक परिवारों केलिए डिजिटल ट्रेसबिलिटी तंत्र का निर्माण और मुगा रेशम के निर्यात को प्रतिवर्ष 2000 किलोग्राम से अधिक तक विस्तारित करना शामिल है। मिशन सेनेहजोरी का उद्देश्य मुगा सिल्क ट्रेल के विकास, सिल्क टूरिज्म पार्क की स्थापना और वार्षिक मुगा उत्सवों के आयोजन से सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना भी है। इससे असम को रेशम विरासत पर्यटन केलिए एक प्रमुख गंतव्य के रूपमें स्थापित किया जा सके। शुभारंभ कार्यक्रम में वस्त्र राज्यमंत्री पबित्रा मार्गेरिटा, केंद्र सरकार, असम सरकार, केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र और रेशम उत्पादन संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी, उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि, बुनकर, उद्यमी और मूगा रेशम मूल्य श्रृंखला से जुड़े हितधारक भी उपस्थित थे।

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