मंगोलिया में भगवान बुद्ध के शिष्यों के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी
गंडांटेगचेनलिंग मठ उलानबटार में बैसाखी से विधिपूर्वक स्थापितस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 1 June 2026 12:29:58 PM
उलानबटार। भारत और मंगोलिया के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक संबंधों में महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूपमें तथागत भगवान गौतम बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामोग्गलाना के पवित्र अवशेषों को बुद्ध पूर्णिमा (बैसाखी) 2026 पर उलानबटार के गंडांटेगचेनलिंग मठ में विधिपूर्वक स्थापित किया गया था। इसी के तहत 31 मई से 10 जून 2026 तक चलने वाली दस दिवसीय प्रदर्शनी का उद्घाटन असम के राज्यपाल लक्ष्मणप्रसाद आचार्य, मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मलहारी गोत्सर्वे, मंगोलिया सरकार, प्रख्यात बौद्ध नेताओं, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के प्रतिनिधियों, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और बौद्ध जगत के विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में किया गया है। प्रदर्शनी की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2025 में मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख की भारत यात्रा के दौरान की थी। यह पहल भगवान बुद्ध की शिक्षाओं में निहित भारत और मंगोलिया केबीच साझा गहरे आध्यात्मिक और सभ्यतागत संबंधों को दर्शाती है।
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहाकि ये पवित्र अवशेष ज्ञान के जीवंत प्रकाश का प्रतीक हैं, जो शांति करुणा और सद्भाव का सार्वभौमिक संदेश देते हैं। उन्होंने कहाकि सांची के पवित्र स्तूपों में सदियों से संरक्षित अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामोग्गलाना के अवशेष भारत की सबसे अनमोल सभ्यतागत धरोहरों में से हैं। उन्होंने कहाकि मंगोलिया में इनका अवलोकनार्थ कार्यक्रम दोनों देशों केबीच विश्वास, आदर और मित्रता का गहरा प्रतीक है। भारत-मंगोलिया की अटूट साझेदारी का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस कथन को याद कियाकि भारत और मंगोलिया सदियों से बौद्ध धर्म के जरिए जुड़े हुए ‘आध्यात्मिक पड़ोसी’ हैं। उन्होंने कहाकि यह प्रदर्शनी ऐसे महत्वपूर्ण समय में हो रही है, जब दोनों देश राजनयिक संबंधों के 70 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी के 10 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मलहारी गोत्सुर्वे ने भगवान बुद्ध की शांति, सद्भाव, सामाजिक न्याय और तर्कसंगत चिंतन की शिक्षाओं की शाश्वत प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
राजदूत अतुल मलहारी गोत्सुर्वे ने कहाकि भारत मंगोलिया रणनीतिक साझेदार और आध्यात्मिक भाई-बहन के रूपमें पवित्र कंजूर पांडुलिपियों के उपहार, वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन, एशियाई बौद्ध शिखर सम्मेलन, बौद्ध पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण और नालंदा विश्वविद्यालय व गंडांटेगचेनलिंग मठ केबीच अकादमिक सहयोग से बौद्ध विरासत के संरक्षण और संवर्धन में सहयोग को और गहरा कर रहे हैं। अतुल मलहारी गोत्सुर्वे ने कहाकि अर्हत सारिपुत्र और अर्हत महामोग्गलाना के अवशेष इससे पहले केवल एकबार 2024 में थाईलैंड गए थे, इसलिए मंगोलिया में यह प्रदर्शनी एक विशेष रूपसे महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने बतायाकि प्रोटोकॉल और सुरक्षा के लिहाज से राष्ट्राध्यक्ष का दर्जा प्राप्त ये अवशेष भारतीय वायुसेना के विशेष IL-76 गजराज विमान से मंगोलिया पहुंचे। उन्होंने कहाकि यह मिशन भारतीय वायुसेना ने मित्र देशों केसाथ सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के भारत के प्रयासों के समर्थन में चलाया। यह एयरलिफ्ट भारतीय वायुसेना की राष्ट्रीय उद्देश्यों का समर्थन करने और भारत की वैश्विक सांस्कृतिक पहुंच की पहलों में योगदान देने की क्षमता को दर्शाता है।
गंडांटेगचेनलिंग मठ में ‘प्रकाश के पात्र: प्रतिमा विज्ञान, अवशेष और धम्म का मार्ग-भारत के संग्रहालय संग्रहों के माध्यम से शाक्यमुनि बुद्ध की यात्रा’ शीर्षक से एक विशेष प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया गया। राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली की संकलित यह प्रदर्शनी भारत के संग्रहालय संग्रहों से चयनित कलाकृतियों से भगवान बुद्ध के जीवन, शिक्षाओं और कलात्मक प्रस्तुतियों का समृद्ध दृश्य वर्णन प्रस्तुत करती है। यह प्रदर्शनी भारत की समृद्ध बौद्ध विरासत और समकालीन समय में इसकी निरंतर प्रासंगिकता को उजागर करती है। यह प्रदर्शनी भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय, राष्ट्रीय संग्रहालय नई दिल्ली, मध्य प्रदेश सरकार, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ, श्रीलंका की महाबोधि सोसाइटी और गंडांटेगचेनलिंग मठ के संयुक्त प्रयासों से भारत मंगोलिया की सरकारों के सहयोग से आयोजित की गई है। पवित्र अवशेष 10 जून तक मंगोलिया के श्रद्धालुओं के दर्शन केलिए सार्वजनिक प्रदर्शन पर रहेंगे। इसमें हजारों बौद्ध अनुयायियों और आगंतुकों के भाग लेने की उम्मीद है, जिससे भारत मंगोलिया के सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी और दोनों देशों के लोगों को जोड़ने वाली साझा बौद्ध विरासत की पुष्टि होगी।