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रेलवे ने स्टेशनों को स्थानीय उद्यम केंद्रों में बदला

एक स्टेशन एक उत्पाद के तहत स्थानीय शिल्प कौशल को बढ़ावा

तेनकासी रेलवे स्टेशन पर हस्तनिर्मित शिल्प कौशल का प्रदर्शन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 20 January 2026 06:16:32 PM

handcrafted artifacts are on display at tenkasi railway station

तेनकासी (तमिलनाडु)। भारतीय रेलवे की 'एक स्टेशन एक उत्पाद' पहल स्थानीय शिल्प कौशल को बढ़ावा देने केलिए एक सशक्त मंच के रूपमें उभरी है। यह देशभर में जमीनी स्तरपर उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है, इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को भारत की समृद्ध क्षेत्रीय विविधता के जीवंत प्रदर्शन केंद्रों में बदलना है और ऐसा ही तेनकासी रेलवे स्टेशन तमिलनाडु में वहां की पारंपरिक कारीगरी को प्रदर्शित किया गया है। स्थानीय विरासत को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क केसाथ एकीकृत करके एक स्टेशन एक उत्पाद न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाता है, बल्कि समावेशी आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देता है।
रेलवे स्टेशनों पर एक स्टेशन एक उत्पाद पहल के अंतर्गत 19 जनवरी 2026 तक 2002 आउटलेट स्थापित किए जा चुके हैं, इनमें से कुल 2326 आउटलेट कार्यरत हैं। ये आउटलेट हजारों स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों केलिए आजीविका का स्रोत बन गए हैं, जिनका अब प्रतिदिन लाखों यात्रियों से सीधा संपर्क है। इसके अतिरिक्त 2022 में ओएसओपी की शुरुआत केबाद से इस पहल ने भारतभर में 1.32 लाख से अधिक लाभार्थियों केलिए प्रत्यक्ष आर्थिक अवसर सृजित किए हैं। ओएसओपी उन पारंपरिक शिल्पों और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को पुनर्जीवित करने में मदद कर रही है, जो कभी लुप्त हो रही थीं।
पूर्वोत्तर में हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तनों और बांस की कलाकृतियों से लेकर अन्य क्षेत्रों में मसालों, हथकरघा उत्पादों और स्थानीय मिठाइयों तक ये उत्पाद यात्रियों को प्रत्येक क्षेत्र का सारतत्व प्रदान करते हैं। वाणिज्य केसाथ संस्कृति को समेकित करके भारतीय रेलवे ने स्टेशनों को स्थानीय उद्यम के केंद्रों में बदल दिया है। 'एक स्टेशन एक उत्पाद' पहल वोकल फॉर लोकल का एक सच्चा उदाहरण है, जो समुदायों को सशक्त बनाने के साथ-साथ देश में यात्रियों के यात्रा अनुभव को समृद्ध करती है।

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