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देशभर में राजमार्गों पर निर्माण गुणवत्ता की जांच

विश्वस्तरीय गुणवत्ता सुरक्षा और भरोसेमंद सड़क निर्माण केंद्रित पहल

मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन राजमार्ग मंत्रालय की प्रायोगिक योजना

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Tuesday 24 February 2026 12:37:27 PM

quality check on highways across the country

नई दिल्ली। अबसे देशभर के राजमार्ग शब्दों से नहीं, बल्कि आंकड़ों, डायग्नोस्टिक्स और महत्वपूर्ण कार्रवाई केसाथ बोल सकेंगे। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की एक प्रायोगिक परियोजना इस दिशामें स्पष्ट कदम है, जिसमें मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन (एमक्यूसीवी) के माध्यम से राजमार्गों पर निर्माण गुणवत्ता पर करीब से नज़र रखी जाएगी। जैसे-जैसे देशभर में बहुत बड़े पैमाने पर सड़कें बन रही हैं, अब ध्यान सिर्फ़ नेटवर्क बढ़ाने से हटकर विश्वस्तरीय गुणवत्ता, सुरक्षा और भरोसेमंद सड़क निर्माण पर केंद्रित हो गया है। यह प्रायोगिक परियोजना चार राज्यों राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक और ओडिशा में लागू हो चुकी है। मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन का इस्तेमाल वर्तमान में जारी राष्ट्रीय राजमार्गों के कार्यों की गुणवत्ता का जल्दी पता लगाने केलिए किया जा रहा है।
मोबाइल गुणवत्ता नियंत्रण वैन चलती फिरती प्रयोगशाला की तरह कार्य करती है, यह नॉन डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट्स से पूरी तरह लैस है। वैन में अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर, रिबाउंड हैमर, एस्फाल्ट डेंसिटी गेज और रिफ्लेक्टोमीटर इत्यादि शामिल हैं। वैन में एडवांस्ड नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग इंस्ट्रूमेंट्स का सेट होता है, जिससे निर्माण में रुकावट डाले बिना गुणवत्ता जांची जा सकती है। रिबाउंड हैमर टेस्ट का इस्तेमाल सतह की कठोरता का पता लगाने और साइट पर सख्त कंक्रीट स्ट्रक्चर की मजबूती का अनुमान लगाने केलिए किया जाता है। अल्ट्रासोनिक पल्स वेलोसिटी मीटर कंक्रीट में ध्वनि की तरंगें भेजता है, जिससे छिपी हुई दरारें, खाली जगहें और कमियां पता चलती हैं। एस्फाल्ट डेंसिटी गेज पोर्टेबल डिवाइस है, जो सही एस्फाल्ट कॉम्पैक्शन और पेवमेंट की लंबी उम्र सुनिश्चित करने केलिए साइट पर तेजी से नॉन न्यूक्लियर टेस्टिंग करना सुगम बनाते हैं। लाइट वेट डिफ्लेक्टोमीटर कॉम्पैक्ट मिट्टी और दानेदार सबबेस के घनत्व का अनुमान लगाने में मदद करता है, ताकि लंबे समय तक चलने वाले राजमार्गों केलिए स्थिर आधार सुनिश्चित किया जा सके। रिफ्लेक्टोमीटर सड़क के संकेतों और चिन्हों की दृश्यता का आकलन करता है। यह सुनिश्चित करता हैकि वे दिनरात मोटर चालकों केलिए स्पष्ट रूपसे पठनीय रहें।
भारत के राजमार्गों पर ये प्रौद्योगिकी गुणवत्ता नियंत्रण को रिएक्टिव प्रोसेस से बदलकर सुरक्षा, टिकाऊपन और विश्वास का अतिसक्रिय, ऑनसाइट आश्वासन देती है। परीक्षण के निष्कर्ष राजमार्ग मंत्रालय अपने क्षेत्र कार्यालय केसाथ साझा करेगा और अगर गुणवत्ता में कोई कमी पाई जाती है तो क्षेत्र कार्यालय सही कार्रवाई करेगा। जैसे-जैसे प्रायोगिक परियोजना अपने अगले चरण में जाएगी मंत्रालय राष्ट्रीय राजमार्ग गुणवत्ता निगरानी पोर्टल बना रहा है, जो इन वैन से बनी टेस्ट रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध कराएगा। यह पोर्टल मोबाइल वैन की रियलटाइम जीपीएस ट्रैकिंग देता है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर गुणवत्ता जांच की पारदर्शी निगरानी और आंकड़ों पर आधारित अनुवीक्षण हो सकेगा। इस प्रणाली का विस्तार और राज्यों में भी होने वाला है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले ही 11 राज्यों में एमक्यूसीवी के अगले चरण की योजना बना ली है, इनमें उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम और मेघालय शामिल हैं। आशा हैकि जून 2026 तक एमक्यूसीवी के जरिए देश के राजमार्ग न सिर्फ़ तेज़ी से बनेंगे, बल्कि गुणवत्तापूर्ण बनाए जाएंगे।

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