स्वतंत्र आवाज़
word map

भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल पूरे!

राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत-हरिवंश

आईआईएमसी की प्रमुख शोध पत्रिका का विशेषांक जारी

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 6 May 2026 12:00:33 PM

harivansh

नई दिल्ली। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) की प्रमुख शोध पत्रिका ‘संचार माध्यम’ के विशेष स्मारक अंक का विमोचन किया। यह विशेषांक भारत में हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफर को दर्शाता है। हरिवंश ने राष्ट्र निर्माण में हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध विरासत और उसकी बदलती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहाकि त्‍वरित परिवर्तन के दौर में साक्षर और निरक्षर की परिभाषा पारंपरिक पढ़ने-लिखने के दायरे से आगे बढ़ चुकी है, निरंतर सीखते रहने और उभरती ज्ञान प्रणालियों के अनुरूप स्वयं को ढालने की क्षमता अनिवार्य हो गई है। उन्होंने कहाकि जो प्रौद्योगिकियां पहले विकसित होने में सदियां लेती थीं, वे अब कुछ वर्ष और महीनों में ही बदल रही हैं।
उपसभापति हरिवंश ने विशेषकर युवा संचारकों का आह्वान कियाकि वे इस बदलते परिदृश्य में सार्थक सपने देखें और उन्हें अटूट प्रतिबद्धता केसाथ साकार करें। उन्होंने कहाकि केवल तभी कोई व्यक्ति अपनी अमिट छाप छोड़ सकता है, ठीक उसी तरह जैसे 1826 में कलकत्ता से प्रकाशित पहले हिंदी समाचार पत्र ‘उदंत मार्तंड’ ने छोड़ी थी। विकसित भारत 2047 के विज़न को रेखांकित करते हुए हरिवंश ने भारत के भविष्य को आकार देने में संचार, अनुसंधान और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने वर्तमान युग को कौशल प्रधान युग करार दिया, जहां कौशल का अर्जन और उसका प्रभावी उपयोग जीवन को परिवर्तित करने की क्षमता रखता है। आर्थिक परिवर्तन पर उन्होंने कहाकि यही व्यापक सामाजिक बदलाव की दिशा निर्धारित करता है और देश में हालके वर्ष में हाईस्‍पीड रेल, आधुनिक बंदरगाहों और प्रमुख क्षेत्रों सहित बुनियादी ढांचे में हुई अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख किया। हरिवंश ने कहाकि सूचना क्रांति युग में व्यक्तिगत और राष्ट्रीय भविष्य को आकार देने केलिए नवाचार एवं पारंपरिक मार्गों से आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
उपसभापति हरिवंश ने कहाकि पत्रकारिता को यह सुनिश्चित करना होगाकि सूचनाओं का सबसे छोटा अंश भी जन-जन तक पहुंचे, ताकि राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सुविज्ञ सार्वजनिक चर्चा हो सके और आम सहमति बन सके। उन्होंने कहाकि संचारकों को राष्ट्र केप्रति अपनी जिम्मेदारी का पूरा एहसास होना चाहिए। आईआईएमसी की कुलपति डॉ प्रज्ञा पालीवाल गौड़ ने कहाकि संचार माध्यम का यह विशेषांक प्रमुख शिक्षाविदों और मीडिया पेशेवरों के आलेखों का संकलन है, जो पिछली दो शताब्दियों में हिंदी पत्रकारिता के विकास के महत्वपूर्ण पड़ावों को दर्शाते हैं। उन्होंने कहाकि जहां एक ओर यह पत्रिका पत्रकारिता के उभरते रुझानों पर निरंतर नज़र रखती है, वहीं भारत की समृद्ध ज्ञान परंपराओं के तत्वों को समकालीन परिप्रेक्ष्य में पुनः समझने और प्रस्तुत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस अवसर पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ केके निराला और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]