प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वियतनाम के राष्ट्रपति की गर्मजोशीभरी भेंट
'भारत व वियतनाम की साझेदारी में विरासत और विकास दोनों महत्वपूर्ण'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 6 May 2026 04:53:46 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी और वियतनाम के राष्ट्रपति तो लम का हैदराबाद हाउस नई दिल्ली में हार्दिक स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने संयुक्त प्रेस वक्तव्य में उनके भारत आने पर अत्यंत खुशी व्यक्त की और कहाकि वियतनाम के राष्ट्रपति बनने केबाद एक महीने के भीतर ही उनका भारत आना और उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल समेत कई व्यापारिक नेताओं केसाथ आना स्पष्ट करता हैकि वे भारत-वियतनाम संबंधों को कितनी प्राथमिकता देते हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि इतना ही नहीं उन्होंने भारत यात्रा की शुरुआत बोधगया से की है, जो दोनों देशों की साझा सभ्यतागत, बौद्ध विरासत और आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि सार्थक चर्चाओं से हम अपने आपसी हितों को कई ठोस परिणामों में बदल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहाकि भारत वियतनाम की साझेदारी में विरासत और विकास दोनों का महत्व है, बीते वर्ष जब भारत से बौद्ध अवशेष वियतनाम गए तो उनके दर्शन डेढ़ करोड़ से अधिक यानि पूरे वियतनाम की आबादी के 15 प्रतिशत लोगों ने किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि साझा बौद्ध विरासत को जीवंत रखने केलिए हम वियतनाम के प्राचीन चम्पा सभ्यता के मी सॉन और न्हान टवर मंदिरों का रेस्टोरैशन कर रहे हैं, अब हम चम्पा सभ्यता की पांडुलिपियों को डिजिटल करेंगे और इस अमूल्य धरोहर को आनेवाली पीढ़ियों केलिए संरक्षित करेंगे। प्रधानमंत्री ने कहाकि एक दशक पहले उनकी वियतनाम यात्रा के दौरान वियतनाम, आसियान में भारत का पहला व्यापक रणनीतिक साझेदार बना था, तबसे भारत वियतनाम संबंधों ने तेज़ और व्यापक प्रगति की है। उन्होंने कहाकि सभ्यतागत संबंधों केसाथ दोनों देशों में व्यापार, तकनीक और पर्यटन संबंध भी और मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहाकि इस मजबूत नींव पर आगे बढ़ते हुए आज हम अपने संबंधों को संवर्धित व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तरपर ले जा रहे हैं, अब हम अपनी साझेदारी को और ऊंचे लक्ष्यों की ओर अग्रसर करेंगे, संस्कृति कनेक्टिविटी, क्षमता निर्माण, स्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन हर क्षेत्रमें हमारा सहयोग नए स्तर पर पहुंचेगा।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि भारत वियतनाम का बाइलैटरल ट्रेड एक दशक में डबल होकर 16 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, 2030 तक इसे 25 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने केलिए हमने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, हमारी ड्रग अथॉरिटीज़ केबीच एमओयू से अब भारत की दवाइयों का वियतनाम में एक्सेस बढ़ेगा, भारत के एग्रीकल्चर, फिशरीज़, एनिमल प्रोडक्ट्स का वियतनाम तक एक्सपोर्ट और सुगम होने जा रहा है, बहुत जल्द वियतनाम भारत के अंगूर और अनार का स्वाद लेगा और हम वियतनाम के डूरियन और पोमेलो का। प्रधानमंत्री ने कहाकि इतना ही नहीं हमने भारत-आसियान ट्रेड एग्रीमेंट ‘आईटिगा’ को वर्ष के अंततक अपडेट करने पर भी सहमति बनाई है, इससे भारत और आसियान के देशों केबीच ट्रेड और इनवेस्टमेंट को नई ऊर्जा मिलेगी, क्रिटिकल मिनरल्स, रेअर अर्थ और एनर्जी सहयोग में नई पहलों से हम दोनों देशों की इकोनॉमिक सिक्योरिटी और सप्लाई चैन रिज़िल्यंस सुनिश्चित करेंगे। नरेंद्र मोदी ने कहाकि कनेक्टिविटी और कपैसिटी बिल्डिंग हमारी पार्ट्नर्शिप के अहम स्तंभ हैं, हमें बहुत खुशी हैकि दोनों देशों केबीच एयर कनेक्टिविटी लगातार बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि फाइनेंशियल कनेक्टिविटी को बूस्ट करने केलिए हमने अपने सेंट्रल बैंक केबीच सहयोग बढ़ाने का निर्णय किया है, भारत के यूपीआई और वियतनाम के फास्ट पेमेंट सिस्टम भी जल्द ही लिंक हो जाएंगे, साथही अब हम दोनों देशों केबीच स्टेट to स्टेट और सिटी to सिटी को-ऑपरेशन को भी मजबूत करने जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि वियतनाम भारत की ऐक्ट-ईस्ट पॉलिसी और विज़न महासागर का एक मुख्य स्तंभ है, इंडो-पैसिफिक क्षेत्रमें भी हमारा सामान्य दृष्टिकोण है, हम अपनी सुदृढ़ होती हुई रक्षा और सुरक्षा सहयोग से कानून का शासन, शांति, स्थिरता और समृद्धि केप्रति योगदान देते रहेंगे। उन्होंने कहाकि वियतनाम के सहयोग से भारत आसियान केसाथ अपने संबंधों को भी और व्यापक बनाएगा। प्रधानमंत्री ने पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा करने और आतंकवाद के विरुद्ध भारत के संघर्ष में साथ खड़े रहने केलिए वियतनाम को आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि वैश्विक उथल-पुथल और आर्थिक चुनौतियों के इस दौर में अपनी प्रतिभा, सुशासन और आर्थिक सुधार के बल पर भारत और वियतनाम दुनिया की सबसे तेज़ीसे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं के रूपमें उभर रहे हैं, अब हमारी संवर्धित रणनीतिक साझेदारी से हम एक-दूसरे के तेज़ विकास के सहायक बनेंगे। उन्होंने कहाकि जैसाकि ‘भगवान बुद्ध की शिक्षाओं की भावना हैकि यदि आप किसी और केलिए दीप जलाते हैं तो वह आपके अपने मार्ग कोभी प्रकाशमान करता है।’ उन्होंने कहाकि इसी भावना केसाथ हम एकदूसरे के विजन और लक्ष्य को सहयोग करते हुए विकसित राष्ट्र बनने की अपनी आकांक्षाओं को मिलकर साकार करेंगे।