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आधुनिक बख्तरबंद वाहन सेना को समर्पित!

डीआरडीओ प्रयोगशाला परिसर अहिल्यानगर में हुआ अनावरण

गतिशील मारक क्षमता व सुरक्षा की आधुनिक सुविधाओं से लैस

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Monday 27 April 2026 01:06:47 PM

modern armored vehicles dedicated to the army

अहिल्यानगर (महाराष्ट्र)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने अपने प्रयोगशाला परिसर अहिल्यानगर में उन्नत बख्तरबंद सैन्य वाहन सेना को समर्पित कर दिए। इन अत्याधुनिक वाहनों को स्वदेश में व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट ने डिजाइन और विकसित किया है। भारतीय रक्षा विभाग के सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने इनका अनावरण किया। आधुनिक तकनीक से लैस ये बख्तरबंद वाहन सशस्त्र बलों की बदलती और जटिल परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं। ये उन्नत बख्तरबंद वाहन स्वदेशी रूपसे डिजाइन और विकसित हैं। इन्हें 30 मिमी के क्रूलेस टरेट से सुसज्जित किया गया है, जो गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा की आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं। इनमें हाईपावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगे हैं, जिससे उच्च पावर-टू-वेट अनुपात, बेहतर गति, तीव्र ढलानों एवं कठिन बाधाओं को पार करने की क्षमता सुनिश्चित होती है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से इन वाहनों में चारों ओर मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक प्रोटेक्शन प्रदान किया गया है, जो एसटीएएनएजी लेवल 4 व 5 के मानकों के अनुरूप है। हाइड्रो जेट प्रणाली से युक्त यह एम्फीबियन प्लेटफ़ॉर्म जल अवरोधों को पार करने में सक्षम हैं, जिससे इनकी ऑपरेशनल लचीलेपन और बहुउद्देशीय उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। ये वाहन 30 मिमी का क्रू-लेस टरेट 7.62 मिमी पीकेटी गन केसाथ एकीकृत हैं और इन्हें एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के प्रक्षेपण केलिए कॉन्फ़िगर किया गया है, जिससे इनकी मारक क्षमता व बहुआयामी उपयोगिता और ज्यादा बढ़ जाती है। इन वाहनों को विभिन्न परिचालन भूमिकाओं के अनुरूप आसानी से कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। इन उन्नत बख्तरबंद वाहनों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी वर्तमान में लगभग 65 प्रतिशत है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक ले जानेकी योजना है, जो देश के रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता को और सुदृढ़ करेगा।
बख्तरबंद सैन्य वाहनों का निर्माण दो औद्योगिक साझेदारों टाटा एडवांस्ड सिस्टमस लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड ने किया है, जिन्हें कई एमएसएमई से सहायता प्राप्त है। इस सहयोग के परिणामस्वरूप विकसित हो रहे रक्षा इकोसिस्टम को मजबूती मिली है। अनावरण के अवसर पर प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग सिस्टम्स, प्रोडक्शन कोऑर्डिनेशन एंड सर्विसेज इंटरैक्शन (पीसीएंडएसआई) के महानिदेशक, टीएएसएल पुणे के सीईओ व एमडी, बीएफएल पुणे के वाइस चेयरमैन तथा जॉइंट एमडी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के निदेशक, वैज्ञानिक व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटरी, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी, कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) उपस्थित थे।

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