'शिक्षा जनकल्याण के अनुकरणीय कार्य आजभी अत्यंत प्रासंगिक'
देशभर में महामना महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जन्म जयंती मनाईस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Saturday 11 April 2026 02:27:57 PM
नई दिल्ली। देश के महान समाज सुधारक और शिक्षाविद् महामना महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जन्म जयंती आज देशभर में मनाई जा रही है। इस अवसर पर देश-प्रदेश में विभिन्न जागरुकता कार्यक्रमों के जरिए खासतौर से शिक्षा को सशक्तिकरण का माध्यम बनाने की उनकी प्रतिबद्धता से अवगत कराया जा रहा है। संसद परिसर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सहित कई सांसदों ने महात्मा ज्योतिबा फुले की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पितकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। एक्स पर पोस्टों की श्रृंखला में प्रधानमंत्री ने महात्मा ज्योतिबा फुले को एक दूरदर्शी समाज सुधारक बताया, जिन्होंने अपना जीवन समानता न्याय और शिक्षा के आदर्शों केलिए समर्पित कर दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उल्लेख कियाकि महात्मा ज्योतिबा फुले महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के पक्षधर के रूपमें अग्रणी थे और उनके प्रयासों से शिक्षा सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम बनी। प्रधानमंत्री ने कहाकि महात्मा ज्योतिबा फुले हमारे प्रेरणापुंज हैं और शिक्षा ज्ञान तथा जनकल्याण केलिए किए गए उनके अनुकरणीय कार्य आजके समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं। गृहमंत्री अमित शाह ने भी एक्स पर महान समाज सुधारक एवं शिक्षाविद् महात्मा ज्योतिबा फुले को उनकी जयंती पर सादर नमन किया है। उन्होंने लिखाकि ज्योतिबा फुले शिक्षा को समाज सुधार का सबसे प्रभावी माध्यम मानते थे, उन्होंने महिलाओं की शिक्षा केलिए अभूतपूर्व कार्य किए, ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापनाकर समाज में समानता और न्याय की दिशामें उल्लेखनीय योगदान दिया। ज्ञातव्य हैकि महात्मा ज्योतिबा फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने महिलाओं की शिक्षा केलिए पुणे में पहला बालिका विद्यालय वर्ष 1848 में शुरू किया था। वे भारत की पहली महिला शिक्षिका, प्रसिद्ध समाज सुधारक और कवियित्री थीं।