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लाइब्रेरी मैन पीएन पणिक्कर पर पुस्तक विमोचित

पुस्तकें पढ़ने और चिंतन की संस्कृति पुनर्जीवित करती हैं-उपराष्ट्रपति

'निरक्षरता व्यक्ति की गरिमा, अवसर और प्रगति में बड़ी बाधक'

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Saturday 23 May 2026 02:13:00 PM

book on 'library man' p.n. panicker released

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पीपी सत्यन की 'द लाइब्रेरी मैन ऑफ इंडिया: द स्टोरी ऑफ पीएन पणिक्कर' शीर्षक से पुस्तक का उपराष्ट्रपति भवन में विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने पीएन पणिक्कर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उन्हें एक दूरदर्शी व्यक्ति बताया, जिन्होंने पुस्तकों और ज्ञान की मौन शक्ति से लाखों लोगों के भाग्य को बदल दिया। लेखक पीपी सत्यन को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि यह प्रकाशन पीएन पणिक्कर की असाधारण दूरदृष्टि और अमिट विरासत का प्रमाण है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि पीएन पणिक्कर ने सादगीभरा जीवन बिताते हुए एक असाधारण सपना देखा थाकि जाति, वर्ग, गरीबी या भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना प्रत्येक व्यक्ति को ज्ञान प्राप्त होना चाहिए।
केरल के कुट्टानाड में पीएन पणिक्कर की साधारण शुरुआत को याद करते हुए उन्होंने कहाकि पीएन पणिक्कर ने जीवन के शुरुआती दौर में ही यह जान लिया थाकि निरक्षरता केवल पढ़ने में असमर्थता नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति की गरिमा, अवसर और प्रगति में बड़ी बाधा है। केरल में पुस्तकालय और साक्षरता आंदोलन की शुरुआत में पीएन पणिक्कर की भूमिका का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि सनातन धर्म पुस्तकालय नामक एक साधारण वाचनालय से शुरू हुआ यह प्रयास आखिरकार केरल के सामाजिक और बौद्धिक परिदृश्य में बदलाव लाने में सहायक रहा। उन्होंने कहाकि पीएन पणिक्कर ने गांवों और दूरदराज के आदिवासी बस्तियों में अथक यात्रा की और ‘पढ़ो और आगे बढ़ो’ के सरल किंतु शक्तिशाली संदेश से आम लोगों और स्वयंसेवकों को प्रेरित किया। पीएन पणिक्कर को केरल के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जनक बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि उनका मानना थाकि ज्ञान कभीभी कुछ लोगों का विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए, बल्कि मानवता की सार्वभौमिक सेवा करनी चाहिए और सामाजिक जागृति की शक्ति बनना चाहिए।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने नालंदा और तक्षशिला जैसे भारत के गौरवशाली शिक्षा केंद्रों की परंपरा का उल्लेख किया, जिन्होंने दुनियाभर के विद्वानों का ध्यान अपनी ओर खींचा। उन्होंने कहाकि हालांकि पुस्तकालय ई-पुस्तकों, डिजिटल अभिलेखागारों और ऑनलाइन संसाधनों से डिजिटल युग में प्रवेश कर चुके हैं, फिरभी युवाओं में पढ़ने की आदतों में लगातार हो रही गिरावट एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और संक्षिप्त मनोरंजन पर बहुत अधिक निर्भरता पर चिंता जताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि गहन पठन, चिंतन और विचारपूर्वक सीखना धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। उपराष्ट्रपति ने चेतावनी दीकि प्रौद्योगिकी ने सुविधा तो दी है, लेकिन साथ ही धैर्य, एकाग्रता और साहित्य एवं ज्ञान केसाथ सार्थक जुड़ाव को भी कम कर दिया है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि जो समाज पढ़ना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे आलोचनात्मक चिंतन, रचनात्मक कल्पना और गहन समझ की क्षमता खो देता है। उन्होंने कहाकि 'द लाइब्रेरी मैन ऑफ इंडिया' जैसी पुस्तकें युवा पीढ़ी में पढ़ने और चिंतन की संस्कृति को पुनर्जीवित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
पीएन पणिक्कर फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एन बालगोपाल के नेतृत्व में पीएन पणिक्कर फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि संस्थान पठन-पाठन और शिक्षा को प्रोत्साहन देने के उल्लेखनीय प्रयासों से पीएन पणिक्कर की विरासत को आगे बढ़ा रहा है। उपराष्ट्रपति ने भारत के जानकारी के इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार की कई पहलों पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' में साझा किए गए दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहाकि पुस्तकालयों को रचनात्मकता के गतिशील केंद्रों के तौरपर विकसित होना चाहिए। उन्होंने देशभर के छात्रों और शोधकर्ताओं केलिए अंतर्राष्ट्रीय शोध और पत्रिकाओं तक पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार की ‘एक राष्ट्र, एक सदस्यता’ पहल की भी सराहना की। उन्होंने प्रौद्योगिकी और नवाचार के जरिए भारत की अमूल्य हस्तलिखित विरासत को संरक्षित करने, डिजिटाइज़ करने और प्रसारित करने के प्रयासों केलिए ज्ञान भारतम मिशन की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने कहाकि पीएन पणिक्कर की महानता केवल पुस्तकालयों के निर्माण में ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों में आशा, जागरुकता और आत्मविश्वास जगाने में भी निहित है। उन्होंने पुस्तकों का जीवन में महत्व बतलाते हुए कहाकि एक पुस्तकालय एक बच्चे का भविष्य बदल सकता है, एक किताब जीवन को बदल सकती है और एक दृढ़ निश्चयी व्यक्ति पूरे समाज को बदल सकता है। उपराष्ट्रपति ने समाज से पढ़ने, सीखने और ज्ञान के प्रसार केप्रति अपनी प्रतिबद्धता को नवप्रवर्तित करने का आह्वान किया एवं माता-पिता, शिक्षकों और संस्थानों से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने केलिए प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। इस मौके पर केंद्रीय पेट्रोलियम प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी, राज्यसभा के पूर्व उपसभापति पीजे कुरियन और गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

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