वनमंत्री भूपेंद्र यादव ने की चीता परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक
चीतों के पर्यावास की अनुकूलता और शिकार संवर्धन उपाय संतोषजनक!स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 20 May 2026 12:25:47 PM
नई दिल्ली। पहली इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस समिट-2026 बस कुछ ही हफ़्ते दूर है। इसी केतहत पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने चीता परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कार्यक्रम की प्रगति का आकलन किया और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार विमर्श किया। बैठक में पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, परियोजना विशेषज्ञ और देश में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े वरिष्ठ प्रक्षेत्र अधिकारी उपस्थित थे। चीता परियोजना भारत में चीतों के विलुप्त होने केबाद उन्हें पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अग्रणी पहल है। इसकी शुरुआत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों के एक संस्थापक समूह को स्थानांतरित करके की गई थी, जिसमें समन्वित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक योजना से बोत्सवाना से 9 चीतों को और शामिल किया गया।
वन्यजीवों के स्थानांतरण से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद इस परियोजना ने उत्साहजनक परिणाम दर्ज किए हैं। वर्तमान में चीतों की संख्या 53 है, जिनमें से 33 भारत में जन्मे हैं। यह भारतीय परिस्थितियों में सफल अनुकूलन और प्रजनन के कारण हुई वृद्धि को दर्शाता है। स्थानांतरित चीतों और उनके शावकों की उत्तरजीविता दर वैश्विक मानकों के बराबर पाई गई है। कुछ मामलों में तो यह उनसे बेहतर भी है, जो वैज्ञानिक प्रबंधन और निगरानी प्रोटोकॉल की प्रभावशीलता को प्रदर्शित करता है। कार्यांवयन कार्यलिपी दीर्घकालिक स्थिरता केलिए भूदृश्य आधारित दृष्टिकोण अपनाती है। कुनो राष्ट्रीय उद्यान को आबादी की स्थापना केलिए प्राथमिक स्थल के रूपमें विकसित किया गया है, जबकि गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य को एक अतिरिक्त पर्यावास के रूपमें तैयार किया गया है। ये स्थल मध्य भारत में फैले एक बड़े परस्पर जुड़े भूदृश्य का हिस्सा हैं, जो फैलाव और आनुवंशिक आदान प्रदान को सुगम बनाते हैं। गुजरात के बन्नी घास के मैदान सहित नए क्षेत्रों में परियोजना के विस्तार का कार्य चल रहा है, जहां पर्यावास की अनुकूलता और शिकार संवर्धन उपाय संतोषजनक स्तरपर पहुंच गए हैं।
वैज्ञानिक निगरानी से पता चलता हैकि चीते भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल अच्छी तरह से ढल रहे हैं, उनका विचरण स्थिर है, वे शिकार का प्रभावी ढंग से उपयोग करते हैं और विभिन्न प्रबंधन व्यवस्थाओं में कोई महत्वपूर्ण शरीर संबंधी तनाव नहीं देखा गया है। परियोजना के अगले चरण में अतिरिक्त स्थानांतरणों से समेकन और विस्तार मध्य प्रदेश में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य जैसे नए स्थलों का विकास और चिन्हित भूभागों में एक मेटापॉपुलेशन ढांचे को सुदृढ़ करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। आनुवंशिक विविधता को बनाए रखने और आबादी वृद्धि को बढ़ावा देने केलिए अफ्रीकी देशों से चीतों की निरंतर आपूर्ति की परिकल्पना की गई है। चीता परियोजना लगातार वैश्विक स्तरपर महत्वपूर्ण संरक्षण पहल के रूपमें उभर रही है। निरंतर वैज्ञानिक मार्गदर्शन, संस्थागत सहयोग और समन्वित कार्यांवयन केसाथ यह परियोजना दीर्घकालिक सफलता केलिए अच्छी स्थिति में है और देश में चीता संरक्षण और खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम के पुनर्स्थापन में महत्वपूर्ण योगदान देने की उम्मीद है।