सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की किताबों का विमोचन किया गया
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Monday 11 May 2026 12:26:57 PM
नई दिल्ली। गृहमंत्री अमित शाह ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की किताबें The Bench, the Bar, and the Bizarre और The Lawful and the Awful का दिल्ली में कार्यक्रमपूर्वक विमोचन किया। गृहमंत्री ने इस अवसर पर कहाकि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं, लोकतंत्र की मजबूती टकराव से नहीं, बल्कि संस्थागत संतुलन और पारस्परिक मर्यादाओं से ही है। अमित शाह ने कहाकि न्यायपालिका से जुड़ी मनोरंजक कहानियों के माध्यम से ये पुस्तकें एक ऐसे पहलू को सामने लाती हैं, जिसपर आमतौर पर किसी का ध्यान नहीं जाता, ये पुस्तकें पाठकों को लोकतंत्र और उसकी संस्थाओं के महत्व के बारेमें भी जागरूक करती हैं। उन्होंने कहाकि तुषार मेहता ने ये पुस्तकें अपनी मां को समर्पित की हैं और ‘मदर्स डे’ के दिन विमोचन किया है। उन्होंने कहाकि जब किसी किताब में तुषार मेहता की किताब की तरह निष्पक्ष मीमांसा सामने आती है तो हमें अपने बारे, अपने इंस्टीट्यूशन के बारेमें और समूचे क्षेत्रके बारेमें मीमांसा करके पुनर्विचार करने का बड़ा अवसर प्राप्त होता है। उन्होंने जिक्र कियाकि कैसे कभी कोर्ट में कविता की गूंज सुनाई देती है तो कभी काफी सारे जजों के मौलिक अंदाज का भी तुषार मेहता ने अपनी किताबों में उल्लेख किया है।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि तुषार मेहता की किताबें एक जिज्ञासु व्यक्ति की तरह दिखाई पड़ती है, जिनमें एआई और आधुनिक तकनीकों, न्यायपालिका के सामने भविष्य में आनेवाली चुनौतियों के ठोस उदाहरण हैं। अमित शाह ने कहाकि भारतीय संविधान की 76 साल की यात्रा में हमने अपने लोकतंत्र की जड़ें काफी गहरी कर ली हैं, हमारी बहुदलीय लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली को हमने निश्चित रूपसे मजबूत किया है और 1947 से आजतक इस देश में संसद और विधानसभाओं के जरिए जितने भी परिवर्तन हुए, वह स्वीकार किए गए। उन्होंने कहाकि यह बताता हैकि हमारे लोकतंत्र की जड़ें बहुत गहरी हैं और इसमें हमारे संविधान, देश की जनता और हमारी न्यायपालिका का बहुत बड़ा योगदान है। अमित शाह ने कहाकि देश की जनता को विश्वास हैकि अगर उसके साथ कोई अन्याय हुआ तो संविधान जाग रहा है, अगर उसके अधिकारों पर आघात होगा तो न्याय के द्वार खुले हैं और कहीं भी यदि कमजोर व्यक्ति की आवाज़ या कमजोर विचार को दबाया जाएगा तो न्यायालय में आवाज़ जरूर सुनी जाएगी।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि इन आधारों पर ही हमारा लोकतंत्र मजबूत है और न्याय को लेकर आम आदमी की आशा ही समाज का संतुलन और राष्ट्र के चरित्र का महत्वपूर्ण प्रमाण है। उन्होंने कहाकि हम सबकी जिम्मेदारी हैकि इस व्यवस्था में भी जो छोटे-छोटे लूप होल्स हैं, उन्हें न्यायपालिका और कार्यपालिका दोनों मिलकर सुधारने का काम करेंगी। उन्होंने कहाकि इसके लिए कंक्रीट टाइम बाउंड रोड मैप केसाथ आगे आना पड़ेगा। अमित शाह ने कहाकि हमारे लोकतंत्र की सुंदरता हैकि संविधान ने विभिन्न संस्थाएं एक-दूसरे का विरोध करने केलिए नहीं, परंतु एक-दूसरे को संतुलित करने केलिए बनाई हैं, इस स्पिरिट को हमें सही अर्थ में समझना पड़ेगा, कार्यपालिका निर्णय लेती है और न्यायपालिका उन निर्णयों की संवैधानिक समीक्षा करती है। उन्होंने कहाकि हमारे संविधान निर्माताओं ने संवाद, मर्यादा और संतुलन तीनों को बनाए रखने केलिए बहुत अच्छे तरीके से एक स्पिरिट केसाथ संविधान को लिखा है। इस अवसर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।