अल्पसंख्यकों केलिए कल्याणकारी योजनाओं की डिलिवरी में सुधार
दिल्ली में राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के सम्मेलन में वृहद विमर्शस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Wednesday 20 May 2026 12:51:09 PM
नई दिल्ली। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा हैकि भारत अल्पसंख्यकों केलिए सबसे सुरक्षित और सबसे समावेशी देशों में से एक है। उन्होंने कहाकि जब हम भारतीय उपमहाद्वीप के पड़ोसी देशों को देखते हैं तो हम अक्सर देखते हैंकि वहां अल्पसंख्यक समुदाय अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे हैं और भारत में शरण ले रहे हैं, अफगानिस्तान से लेकर श्रीलंका तक पूरे क्षेत्रके अल्पसंख्यकों ने हमेशा भारत को आश्रय, सुरक्षा और सम्मान की जगह के रूपमें देखा है। वे राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। किरेन रिजिजू ने कहाकि भारत की प्रगति और विकास में सभी अल्पसंख्यक समुदायों का योगदान अतुलनीय है, पारसी समुदाय ने उद्योग और अर्थव्यवस्था में असाधारण योगदान दिया है, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्रमें ईसाइयों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जबकि मुस्लिम, बौद्ध, जैन और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों ने भारत के सांस्कृतिक, बौद्धिक और सामाजिक ताने-बाने को अनगिनत तरीकों से समृद्ध किया है।
राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के सम्मेलन में राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के प्रतिनिधि, राज्य सरकारों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, अल्पसंख्यक समुदाय के प्रमुख प्रतिनिधियों ने अल्पसंख्यक कल्याण, संस्थागत मजबूती और समावेशी विकास से जुड़े मुद्दों पर विचार विमर्श किया। यह सम्मेलन संवाद, समन्वय और विचारों के आदान प्रदान के एक महत्वपूर्ण मंच के रूपमें सामने आया, जिसका उद्देश्य देशभर में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करना और अल्पसंख्यक समुदायों केलिए कल्याणकारी योजनाओं की डिलिवरी में और ज्यादा सुधार लाना है। सम्मेलन में अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य बरजिस देसाई, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सदस्य एस मुनावरी बेगम, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सचिव अलका उपाध्याय, उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दानिश आज़ाद अंसारी, बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के संयुक्त सचिव डॉ अतिया नंद भी उपस्थित थे।
अल्पसंख्यक कार्य राज्यमंत्री जॉर्ज कुरियन ने पीएमजेवीके जैसी कल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया, जो आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करके अल्पसंख्यक समुदायों को सशक्त बना रही हैं। उन्होंने अल्पसंख्यक समुदायों को सुरक्षित करने और वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने केलिए उन्हें आगे ले जाने केप्रति केंद्र सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। अलका उपाध्याय ने आयोग के मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली के बारेमें बताया। उन्होंने जानकारी दीकि बीते पांच वर्ष में आयोग ने शिकायतों के निपटारे का एक बेहतरीन रिकॉर्ड बनाए रखा है, जो समय पर की गई पहल और समाधान केप्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 केबीच कुल 9,558 याचिकाएं प्राप्त हुईं, जिनमें से 9230 शिकायतों का निपटारा किया गया, जो लगातार हाई डिस्पोजल रेट को प्रदर्शित करता है। उन्होंने आयोग के अध्ययन और आउटरीच के क्षेत्रमें किए जा रहे नए कार्यों के बारेमें भी विस्तार से बताया, जिसमें बौद्ध, जैन और पारसी समुदायों पर केंद्रित सेमिनार शामिल हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने पसमांदा मुस्लिम समुदाय के कल्याण एवं सशक्तिकरण केलिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के विजन को साकार करने केलिए यह प्रयास अत्यंत आवश्यक हैं।
बिहार सरकार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मोहम्मद जमा खान ने अल्पसंख्यक कल्याण योजनाओं की आवश्यकता और उनके बीच सुरक्षा की भावना सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। एनसीएम के सदस्य बरजिस देसाई ने आयोग के क्षेत्राधिकार की कुछ सीमाओं को रेखांकित किया और कहाकि राज्य अल्पसंख्यक आयोगों केबीच बेहतर और मजबूत तालमेल से सार्थक बदलाव लाया जा सकता है तथा अल्पसंख्यक अधिकारों के संरक्षण को और अधिक मजबूती दी जा सकती है। एनसीएम की सदस्य एस मुनावरी बेगम ने अल्पसंख्यक समुदायों को सशक्त बनाने में पीएम विकास योजना की अपार संभावनाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहाकि व्यापक जागरुकता केसाथ किए गए सामूहिक प्रयास महत्वपूर्ण प्रगति और विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। सम्मेलन में कई सत्र भी हुए जैसे-राष्ट्र निर्माण और विकास में अल्पसंख्यक समुदायों का योगदान, राज्य अल्पसंख्यक आयोगों के कार्य और उनके सामने चुनौतियां, अल्पसंख्यक कल्याण केलिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सफल प्रयास और बेहतरीन मॉडल।
सत्रों के दौरान चर्चा में भाग लेने वाले राज्यों ने अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंच बढ़ाने और उनतक सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही शैक्षणिक सहायता, कौशल विकास, छात्रवृत्ति सहायता, आजीविका संवर्धन, सामुदायिक कल्याण योजनाओं और संस्थागत नवाचारों से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। इन सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान से नीतिगत सीख मिलने और विभिन्न राज्यों में चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं केबीच बेहतर तालमेल स्थापित होने की उम्मीद है। सम्मेलन का समापन अल्पसंख्यक अधिकारों के संरक्षण और उनके कल्याण को सुनिश्चित करने केलिए सहयोगात्मक कार्रवाई, मजबूत संस्थागत समन्वय तथा निरंतर जुड़ाव केप्रति एक नए संकल्प केसाथ हुआ। यह उम्मीद जताई गई हैकि इस चर्चा के निष्कर्ष देशभर में इन्क्लूसिव गवर्नेंस को सुदृढ़ करने और अल्पसंख्यक कल्याण तंत्र की प्रभावशीलता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।