ऑपरेशन सिंदूर तकनीकी युद्ध और राष्ट्रीयता का उत्कृष्ट उदाहरण
प्रयागराज में भारतीय सेना की तीन दिवसीय 'रक्षा त्रिवेणी' संगोष्ठीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 4 May 2026 04:06:10 PM
प्रयागराज। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने तीव्र तकनीकी क्रांति के युग में भविष्य केलिए तैयार रहने हेतु अनुसंधान पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और अप्रत्याशित नवाचार की रणनीति अपनाने के महत्व पर जोर दिया है। रक्षामंत्री आज प्रयागराज में भारतीय सेना की उत्तरी एवं मध्य कमान और भारतीय रक्षा निर्माता सोसायटी की तीन दिवसीय नॉर्थ टेक संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में रक्षा कर्मियों, उद्योगपतियों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और शिक्षा जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए विचार व्यक्त किए। रक्षामंत्री ने आधुनिक युद्ध में तकनीकी बदलावों की त्वरित गति और अप्रत्याशित रूपसे उभरते हुए अनायास हमलों की भी जानकारी दी। उन्होंने कहाकि रूस-यूक्रेन संघर्ष में युद्ध का स्वरूप महज तीन-चार वर्ष में टैंकों और मिसाइलों से बदलकर ड्रोन सेंसर जैसे क्रांतिकारी उपकरणों में परिवर्तित हो गया। उन्होंने जिक्र कियाकि दैनिक जीवन का हिस्सा बन चुकी वस्तुएं भी घातक हथियार बनती जा रही हैं, लेबनान और सीरिया में हुए पेजर हमलों ने आधुनिक युद्ध पद्धतियों के पुनर्मूल्यांकन को प्रेरित किया है, ऐसी स्थिति में हमें सतर्कतापूर्वक तैयार रहना होगा।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने और ऐसी क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो आवश्यकता पड़ने पर देश को अपने शत्रु पर अप्रत्याशित हमला करने में सक्षम बनाएं। उन्होंने कहाकि इतिहास साक्षी हैकि युद्ध में निर्णायक बढ़त सदैव उसी को मिलती है, जिसके पास अचानक हमला करने की शक्ति होती है, हालांकि हमारे रक्षा बल पहले से ही इस दिशा में कार्य कर रहे हैं, हमें और अधिक सक्रियता केसाथ आगे बढ़ना होगा। रक्षामंत्री ने कहाकि जो राष्ट्र तकनीकी क्रांति को सबसे तेजीसे अपनाएगा, उसे भविष्य के युद्ध परिदृश्य में निर्णायक बढ़त प्राप्त होगी। उन्होंने कहाकि आजकी दुनिया में अनुसंधान का कोई विकल्प नहीं है और भविष्य के युद्ध किस प्रकार लड़े जाएंगे, यह आज प्रयोगशालाओं में निर्धारित हो रहा है। राजनाथ सिंह ने कहाकि सरकार ने रक्षा अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं के केंद्र में रखा है और डीआरडीओ के माध्यम से इसे अगले स्तर तक ले जाने का प्रयास किया है। उन्होंने कहाकि डीआरडीओ अब इस यात्रा पर अकेला नहीं है, 'दूर तक जाने केलिए साथ चलें' के मंत्र से प्रेरित होकर यह बड़ी संख्या में उद्योगों केसाथ कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रहा है।
रक्षामंत्री ने बतायाकि रक्षा अनुसंधान एवं विकास बजट का 25 प्रतिशत हिस्सा उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को आवंटित किया गया है और अबतक इन संस्थाओं ने बजट का 4500 करोड़ रुपये से अधिक का उपयोग कर लिया है। उन्होंने कहाकि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की एक नई नीति लागू की गई है, जिसके अंतर्गत विकास-सह-उत्पादन साझेदारों, विकास साझेदारों और उत्पादन एजेंसियों केलिए पहले लगने वाला 20 प्रतिशत शुल्क पूरी तरह से माफ कर दिया गया है, परिणामस्वरूप डीआरडीओ ने अबतक विभिन्न उद्योगों को 2200 से अधिक प्रौद्योगिकियां हस्तांतरित की हैं। राजनाथ सिंह ने कहाकि डीआरडीओ ने भारतीय उद्योगों को अपने पेटेंट तक नि:शुल्क पहुंच प्रदान करने की नीति शुरू की है, जिससे उनकी तकनीकी क्षमताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता दोनों को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहाकि डीआरडीओ की परीक्षण सुविधाएं भी भुगतान के आधार पर उद्योगों केलिए खोल दी गई हैं, हर वर्ष सैकड़ों उद्योग अनुसंधान एवं विकास सहायता केलिए इन सुविधाओं का उपयोग करते हैं। रक्षामंत्री ने कहाकि उद्योगों को निर्देशित ऊर्जा हथियार, हाइपरसोनिक हथियार, जलमग्न क्षेत्र जागरुकता, अंतरिक्ष स्थिति जागरूकता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रोंमें आगे बढ़कर उत्कृष्टता हासिल करनी चाहिए, इसमें सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया।
राजनाथ सिंह ने बदलती परिस्थितियों का गहन विश्लेषण करने और भारत की तैयारियों को सुनिश्चित करने केलिए रक्षा बलों और उद्योग जगत की सराहना की और ऑपरेशन सिंदूर को तकनीकी युद्ध और राष्ट्र की तत्परता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहाकि ऑपरेशन सिंदूर ने विश्व के सामने हमारे रक्षा बलों की वीरता और क्षमताओं का प्रदर्शन किया, इस दौरान आकाशतीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणालियों सहित अत्याधुनिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया, यह इस बात का अकाट्य प्रमाण हैकि हम न केवल युद्ध की बदलती प्रकृति को समझते हैं, बल्कि अटूट आत्मविश्वास केसाथ तकनीकी प्रगति को भी लागू कर रहे हैं। रक्षामंत्री ने देश के रक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों का उल्लेख करते हुए कहाकि इनोवेशन फॉर डिफेंस एक्सीलेंस, एसीटिंग डेवलपमेंट ऑफ इनोवेटिव टेक्नोलॉजीज विद आईडेक्स और टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड जैसी पहलें नवाचार को बढ़ावा देने और निजी क्षेत्रकी भागीदारी को उल्लेखनीय रूपसे बढ़ाने केलिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहाकि रक्षाक्षेत्र में अवसंरचना विकास को प्राथमिकता दी जा रही है, उत्तर प्रदेश में शुरू की गई रक्षाक्षेत्र से सीधे जुड़ी कई अवसंरचना परियोजनाओं रक्षा औद्योगिक गलियारा देश की रक्षा क्षमताओं को सक्रिय रूपसे बढ़ावा दे रहा है।
रक्षामंत्री ने कहाकि सरकार के आत्मनिर्भरता प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं, क्योंकि वित्तीय वर्ष 2025-26 में घरेलू रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि रक्षा निर्यात सर्वकालिक उच्चस्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहाकि यह वृद्धि औरभी तेज होने की संभावना है और इस उपलब्धि में निजी क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जर्मनी की अपनी हालकी यात्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहाकि विदेशी कंपनियां भारतीय रक्षा कंपनियों केसाथ साझेदारी करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं, जो अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय रक्षा उद्योग की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रमाण है। रक्षामंत्री ने 'रक्षा त्रिवेणी संगम-जहां प्रौद्योगिकी, उद्योग और सैन्य शक्ति का संगम होता है' विषय पर नॉर्थ टेक संगोष्ठी को नवाचार को बढ़ावा देने और भारत की तकनीकी एवं रक्षा तैयारियों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने हितधारकों को अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने में सक्षम बनाने केलिए ठोस सुझावों की आशा व्यक्त की। उन्होंने हितधारकों को विशेषज्ञता साझा करने और उभरते एवं अनछुए क्षेत्रों में सामूहिक रूपसे क्षमताओं को बढ़ाने में सक्षम बनाने के एक ज्ञान गलियारे के निर्माण का सुझाव दिया। उन्होंने कहाकि यह हमारा सामूहिक प्रयास हैकि हम आनेवाले समय में विश्व की सबसे शक्तिशाली सैन्य शक्ति के रूपमें खुदको स्थापित करें।
केंद्रीय कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्या सेनगुप्ता ने कहाकि यह संगोष्ठी रक्षा बलों, उद्योग, स्टार्टअप, नवप्रवर्तकों और शिक्षाविदों को महत्वपूर्ण परिचालन चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करने केलिए एक अनूठा मंच प्रदान करती है। उन्होंने कहाकि यह प्रयास संयुक्तता, आत्मनिर्भरता और नवाचार के सिद्धांत से निर्देशित है, जो देश की युद्ध क्षमता को मजबूत करने केलिए आवश्यक है। उत्तरी कमान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने कहाकि संगोष्ठी का उद्देश्य विचारों, नवाचारों और अनुभवों को तैनाती योग्य क्षमताओं में परिवर्तित करना है। उन्होंने कहाकि हालके संघर्षों को देखते हुए मानवरहित हवाई प्रणाली, काउंटर-यूएएस सिस्टम, एआई-सक्षम निर्णय लेने वाले उपकरण, सटीक मारक क्षमताएं और उन्नत तोपखाना प्रणालियां जैसी विशिष्ट क्षमताएं युद्धक्षेत्र में प्रभुत्व स्थापित करने केलिए अपरिहार्य हो गई हैं। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के औद्योगिक विकास, निर्यात प्रोत्साहन, एनआरआई एवं निवेश प्रोत्साहन मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी, सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, केंद्रीय वायु कमान के वायु अधिकारी कमान इन चीफ एयर मार्शल बालकृष्णन मणिकांतन, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा के महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, एसआईडीएम के अध्यक्ष अरुण टी रामचंदानी और आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर रामकृष्णन एस उपस्थित थे।
रक्षा त्रिवेणी संगम संगोष्ठी में उत्तरी और मध्य कमानों के समस्या परिभाषा वक्तव्यों पर हितधारक विस्तार से चर्चा करेंगे, जिसका उद्देश्य भविष्य का मार्ग निर्धारित करना है। ये समस्या परिभाषा वक्तव्य पर्यावरण की आवश्यकताओं को समझने, समकालीन संघर्षों को ध्यान में रखते हुए तकनीकी कमियों की पहचान करने और आवश्यकताओं का विश्लेषण एवं प्राथमिकता निर्धारण करने जैसी संरचित प्रक्रियाओं के माध्यम से तैयार किए गए हैं। जमीनी स्तरपर तैनात सैनिकों, उद्योग भागीदारों और शिक्षाविदों के साथ संवाद स्थापित करने केलिए विभिन्न क्षेत्रों में आठ फोकस टीमें गठित की गई हैं। संगोष्ठी के भाग के रूपमें प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें लघु एवं मध्यम उद्यमों, निजी रक्षा प्रौद्योगिकी फर्मों, स्टार्टअप्स और वर्दीधारी नवोन्मेषकों सहित विभिन्न प्रतिभागियों के प्रस्तुत स्वदेशी समाधानों को प्रदर्शित किया गया। लगभग 284 कंपनियों ने अपने नवीनतम नवाचारों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने केलिए स्टॉल लगाए।