भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली का सफल परीक्षण
डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के सहयोग से डिज़ाइन और विकसित कियास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 8 May 2026 12:35:54 PM
भुवनेश्वर। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन और भारतीय वायुसेना ने सामरिक उन्नत रेंज संवर्धन हथियार (टीएआरए) का ओडिशा तट पर पहला सफल उड़ान परीक्षण किया। टीएआरए एक मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट है, जो भारत की पहली स्वदेशी ग्लाइड हथियार प्रणाली है। टीएआरए एक साधारण बिना गाइडेंस वाले बम को एक सटीक गाइडेंस वाले हथियार में बदल देती है। यह पारंपरिक बमों केसाथ काम करती है, पांच किलोमीटर की ऊंचाई से गिराए जाने पर यह 150 से 180 किलोमीटर तककी मारक क्षमता देती है। इसकी सटीकता लक्ष्य से 3 मीटर के दायरे में होती है। यह आईएनएस, जीपीएस और इलेक्ट्रो ऑप्टिकल गाइडेंस के मिले-जुले सिस्टम का इस्तेमाल करती है। इसे जगुआर, मिराज 2000, एसयू-30 एमकेआई और तेजस विमानों में इंटीग्रेट किया जा रहा है।
भारत ने इस तकनीक को किसी अन्य देश से नहीं खरीदा है, बल्कि इसे हैदराबाद इमारात अनुसंधान केंद्र ने डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं के सहयोग से डिज़ाइन और विकसित किया है। इसका उद्देश्य ज़मीनी लक्ष्यों को नष्ट करने केलिए कम लागत वाले हथियार की मारक क्षमता और सटीकता को बढ़ाना है। यह अत्याधुनिक कम लागत वाली प्रणालियों का उपयोग करने वाला पहला ग्लाइड हथियार है। इसका निर्माण विकास सह उत्पादन साझेदारों और भारतीय उद्योगों के सहयोग से किया गया है। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने प्रथम उड़ान परीक्षण केलिए डीआरडीओ, आईएएफ, डीसीपीपी और उद्योग जगत को बधाई दी है और इसे भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण से जुड़ी टीमों को बधाई दी है।