आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में भारतीय ज्ञान परंपराओं के समावेश पर जोर
भारतीय शिक्षा दर्शन राष्ट्रचेतना सांस्कृतिक मूल्यों पर गहन विचार विमर्शस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 27 April 2026 06:54:25 PM
भोपाल। राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) भोपाल में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा दर्शन, राष्ट्रचेतना और सांस्कृतिक मूल्यों पर गहन विचार विमर्श किया गया। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष डॉ रविंद्र कान्हेरे ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहाकि भारत की परंपरा में शिक्षा सदैव समाज का विषय रही है, शासन का नहीं। उन्होंने भारतीय शिक्षा दर्शन को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम न मानकर चरित्र निर्माण और सामाजिक दायित्व से जोड़ने पर बल दिया।
राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ सीसी त्रिपाठी ने कहाकि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को भारतीय संस्कृति और परंपरा केप्रति जागरुक करने केसाथ-साथ आधुनिक शिक्षण पद्धतियों में भारतीय ज्ञान परंपराओं के समावेश की दिशा भी प्रदान करता है। वंदे मातरम् की ऐतिहासिक यात्रा के माध्यम से निखिलेश माहेश्वरी ने राष्ट्रीय आंदोलन की चेतना को प्रस्तुत करते हुए कहाकि वंदे मातरम् मात्र एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वाभिमान और आध्यात्मिक चेतना की अनवरत यात्रा का गौरवगान है। इस अवसर पर देशभर के शिक्षकों ने भागीदारी की।
ज्ञातव्य हैकि एनआईटीटीटीआर की स्थापना 1965 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के उद्देश्य से की गई थी। यह संस्थान अनुसंधान और विकास के जरिए कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखता है जैसे-नई तकनीकों से जुड़ी विशेष क्षमताओं का विकास, विषयवस्तु का विकास, कक्षा और प्रयोगशाला आधारित शिक्षण, उद्योग संस्थान इंटर्नशिप, तकनीकी संस्थानों का प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास, उद्यमिता विकास, परीक्षा सुधार और छात्रों का मूल्यांकन, शिक्षण और निर्देशात्मक संसाधनों का विकास, वीडियो निर्माण और मल्टीमीडिया विकास, शैक्षिक परियोजनाओं की योजना और प्रबंधन, सामुदायिक विकास तथा कार्यक्रमों और परियोजनाओं का मूल्यांकन।