वित्तीय समावेशन बढ़ाना व महिला स्वयं सहायता समूहों का सशक्तिकरण
ईपीपीबी का मिशन अंतिम छोर तक बैंकिंग को सुलभ व समावेशी बनानास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 30 April 2026 06:23:30 PM
नई दिल्ली। भारतीय डाक विभाग के अंतर्गत पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई इंडिया पोस्ट पेमेन्ट्स बैंक (आईपीपीबी) ने स्वयं सहायता समूह बचत खाता की शुरूआत कर दी है। इसका उद्देश्य देशभर के ग्रामीण क्षेत्रमें वित्तीय समावेशन बढ़ाना और महिला नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाना है। आईपीपीबी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी आर विश्वेश्वरन ने स्वयं सहायता समूह बचत खाता के शुभारंभ पर कहाकि आईपीपीबी का मिशन हर भारतीय केलिए बैंकिंग को सरल, सुलभ और समावेशी बनाना है। स्वयं सहायता समूह बचत खाता, महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को विश्वसनीय और किफायती बैंकिंग समाधान प्रदानकर उन्हें सशक्त बनाने का एक उल्लेखनीय कदम है। उन्होंने कहाकि अपने डोरस्टेप बैंकिंग मॉडल यानी (ऐसी सेवा जिसके तहत बैंक अपने ग्राहकों को बैंक शाखा में आए बिना, उनके घर या कार्यस्थल पर ही बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करते हैं) और डिजिटल माध्यम से वित्तीय व्यवस्था में अधिक सक्रिय रूपसे भाग लेने और सतत आर्थिक विकास को गति देने में सक्षम बनाना है।
गौरतलब हैकि भारत में ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन को गति देने में स्वयं सहायता समूहों की अहम भूमिका है और ये ग्रामीण विकास मंत्रालय केतहत राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन जैसी प्रमुख पहल और राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक-नाबार्ड से समर्थित कार्यक्रमों से जुड़े हुए हैं। डाक विभाग के व्यापक डाक नेटवर्क और डिजिटल क्षमताओं के जरिए आईपीपीबी का लक्ष्य डाककर्मियों और ग्रामीण डाक सेवकों के बड़े नेटवर्क की सहायता से डिजिटल माध्यम से स्वयं सहायता समूहों केलिए घर-घर बैंकिंग सेवा वित्तीय पहुंच मुहैया कराना है। इंडिया पोस्ट पेमेन्ट्स बैंक स्वयं सहायता समूह बचत खाते में किफायती शून्य बैलेंस, शून्य शुल्क खाते, इसमें शामिल होने की डिजिटल सक्षम सरलीकृत प्रक्रिया, डाकघरों और डाककर्मियों या ग्रामीण डाक सेवकों के विशाल नेटवर्क जैसी सेवाएं हैं। इसकी विशेषताओं में हैकि न्यूनतम प्रारंभिक जमा राशि की आवश्यकता नहीं, मासिक औसत शेष राशि की आवश्यकता नहीं, अधिकतम राशि सीमा 2 लाख रुपये है, लागू बचत दरों के अनुसार त्रैमासिक ब्याज भुगतान, नकद जमा और निकासी पर कोई शुल्क नहीं, प्रतिमाह निःशुल्क खाता विवरण, खाता बंद करने पर कोई शुल्क नहीं और क्यूआर कार्ड जारी करने पर कोई शुल्क नहीं है।
स्वयं सहायता समूहों केलिए विशेष रूपसे तैयार आईपीपीबी स्वयं सहायता समूह बचत खाता सरल, सुलभ और शून्य लागत वाला बैंकिंग समाधान है, जो समावेशी विकास और संवहनीय आजीविका की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप है। ज्ञातव्य हैकि इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक में भारत सरकार की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी है। आईपीपीबी का शुभारंभ 1 सितंबर 2018 को किया गया था। देश के आम लोगों को सुलभ, किफायती और भरोसेमंद बैंकिंग सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से इसकी स्थापना की गई है। इसका मूल उद्देश्य बैंकिंग सुविधाओं से वंचित और कम लाभांवित लोगों की बाधाएं दूरकर अंतिम छोर तक सुविधा पहुंचाना है। इसके लिए वह ग्रामीण क्षेत्रोंमें लगभग 1 लाख 40 हजार डाकघर सहित लगभग 1 लाख 65 हजार डाकघरों और करीब 3 लाख डाक कर्मचारियों की व्यापक डाक नेटवर्क का इस्तेमाल करता है। आईपीपीबी की पहुंच और संचालन मॉडल इंडिया स्टैक के प्रमुख स्तंभों पर आधारित है, जो ग्राहकों को घर पर ही कोर बैंकिंग सिस्टम एकीकृत स्मार्टफोन और बायोमेट्रिक उपकरण द्वारा सरल और सुरक्षित तरीके से कागज रहित, नकदी रहित और उपस्थिति रहित बैंकिंग सुविधा प्रदान करता है।
इंडिया पोस्ट पेमेन्ट्स बैंक किफायती नवाचार और आम लोगों केलिए बैंकिंग सुगम बनाने पर विशेष ध्यान देते हुए भारत के पांच लाख सत्तावन हजार गांव और कस्बों में व्याप्त 13 करोड़ से अधिक ग्राहकों को 13 भाषाओं में सहज इंटरफेस से सरल और किफायती बैंकिंग सुविधा प्रदान करता है। इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक नकदीमुक्त अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और डिजिटल इंडिया के विज़न में योगदान केलिए प्रतिबद्ध है। उसका मानना हैकि भारत तभी समृद्ध होगा, जब प्रत्येक नागरिक को आर्थिक रूपसे सुरक्षित और सशक्त बनने का समान अवसर प्राप्त होगा। इसका आदर्श वाक्य ‘सत्य सिद्ध होता है-प्रत्येक ग्राहक महत्वपूर्ण है, प्रत्येक लेनदेन सार्थक है और प्रत्येक जमा राशि मूल्यवान है।’