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राष्ट्रपति की आईआरएस प्रशिक्षुओं को प्रेरणाएं!

'कर अनुपालन सुधार से नागरिक और प्रशासन केबीच विश्वास बढ़ा'

भारत की आर्थिक यात्रा अत्यंत गतिशील और प्रेरणादायक-राष्ट्रपति

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Thursday 16 April 2026 01:51:23 PM

the president's words of inspiration to irs trainees

नागपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्‍ट्रीय प्रत्‍यक्ष कर अकादमी नागपुर में भारतीय राजस्व सेवा (आयकर) के 78वें बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों के विदाई समारोह में उन्हें प्रेरणा देने वाला संबोधन दिया है। उन्होंने कहाकि हालके वर्षों में भारत की आर्थिक यात्रा अत्यंत गतिशील और प्रेरणादायक रही है। उन्होंने कहाकि प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर वृद्धि होना कर अनुपालन में सुधार और कर आधार के विस्तार का संकेत है, यह नागरिकों और प्रशासन केबीच बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। राष्ट्रपति ने कहाकि 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुआ आयकर अधिनियम-2025 इस परिवर्तनकारी यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है और यह सुधार आधुनिक, सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि इसकी वास्तविक सफलता केवल इसके सही, पारदर्शी और प्रभावी क्रियांवयन से ही सुनिश्चित होगी और यह दायित्‍व आईआरएस अधिकारियों के कंधों पर है। द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारियों की भूमिका केवल कर संग्रह तकही सीमित नहीं है, वे जनविश्वास के संरक्षक हैं, वे न्याय और निष्पक्षता के प्रहरी हैं, वे देश की आर्थिक प्रगति, सामाजिक न्याय और सुशासन के स्तंभ के रूप में कार्य करते हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्मरण करायाकि विनम्रता, संयम और संवेदनशीलता उनकी कार्यशैली के अभिन्न अंग होने चाहिएं। उन्होंने कहाकि उनका दायित्‍व केवल नियमों को लागू करने तक ही सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करना भी है। उन्होंने रेखांकित कियाकि न्याय, पारदर्शिता और ईमानदारी के आधार पर लिए गए निर्णय न केवल शासन को सुदृढ़ बनाते हैं, बल्कि राष्ट्र और उसके नागरिकों के समग्र विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
राष्ट्रपति ने कहाकि देश के किसीभी नागरिक केद्वारा दाखिल किए गए प्रत्येक आयकर रिटर्न के पीछे परिश्रम, आकांक्षा और उद्यम की कहानी होती है। उन्होंने कहाकि आईआरएस अधिकारियों का दायित्‍व केवल कानून का अनुपालन सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि यहभी सुनिश्चित करना हैकि सभी नागरिकों, विशेषकर समाज के वंचित वर्गों से संबंधित लोगों केसाथ सम्‍मान और निष्पक्षता का व्यवहार किया जाए। राष्ट्रपति ने कहाकि आज हमारा देश ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशामें तीव्रगति से अग्रसर है, ऐसे समय में प्रशासनिक व्यवस्था और उससे जुड़े प्रत्येक संस्थान का दायित्‍व और अधिक बढ़ जाता हैकि वे उच्चतमस्‍तर की दक्षता और पारदर्शिता अपनाएं तथा समावेशी दृष्टिकोण केसाथ कार्य करें।

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