मकर संक्रांति पर सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन ने मनाया स्थापना दिवस
'गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना'स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 16 January 2026 04:28:54 PM
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन प्रभाग ने देशभर में उल्लासपूर्ण मनाए गए मकर संक्रांति पर्व पर अपना स्थापना दिवस समारोहपूर्वक मनाया। यह कार्यक्रम इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के समवेत सभागार में आयोजित किया गया था। इसमें भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव राजेश कुमार सिंह और संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव डॉ शाह फैसल मुख्य अतिथि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने की और स्वागत भाषण कला निधि प्रभाग के प्रमुख और एनएमसीएम के प्रभारी प्रोफसर आरसी गौर ने दिया। एनएमसीएम के निदेशक डॉ मयंक शेखर भी इस अवसर पर उपस्थित थे। डॉ सच्चिदानंद जोशी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहाकि मकर संक्रांति का त्योहार देशभर में उत्तरायण, बिहू, पोंगल और खिचड़ी अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। अलग-अलग तरीकों से मनाए जाने के बावजूद देश एक ही समय पर इस त्योहार को मनाता है।
डॉ सच्चिदानंद जोशी ने सुझाव दियाकि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में इस त्योहार को मनाने की परंपराओं जिनमें खानपान, वस्त्र, रीति रिवाज और परंपराएं शामिल हैं का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन प्रभाग से आग्रह कियाकि वह अगले वर्ष अपने वार्षिक दिवस पर भारतभर में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है, पर एक प्रकाशन प्रकाशित करे। उन्होंने एनएमसीएम की चुनौतियों और उपलब्धियों के बारेमें कहाकि जब हमें यह कार्य सौंपा गया था, तब यह अपने आपमें एक बहुत बड़ी चुनौती थी, करीब 650000 गांवों का दस्तावेजीकरण करना आसान काम नहीं है, लेकिन एनएमसीएम ने जिस तरह से अपना काम शुरू किया, यहां सभीकी कड़ी मेहनत और विभिन्न एजेंसियों से मिले सहयोग के कारण हम 623000 गांवों का दस्तावेजीकरण कर चुके हैं। उन्होंने कहाकि बढ़ते शहरीकरण केबीच हम अक्सर अपने गांवों को याद करते हैं, जहां हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत आज भी मौजूद हैं, अगर हम इन गांवों को संरक्षित करते हैं तो नि:स्संदेह हम इस दौर में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक जागृति में योगदान देंगे।
राजेश कुमार सिंह ने कहाकि गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण सरकार की एक बहुत ही महत्वाकांक्षी परियोजना है और यह अत्यंत आवश्यक भी है। उन्होंने कहाकि किसी गांव को देखने और उसकी विरासत को समझने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति केलिए एकही स्थान पर प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध होने से बढ़कर कोई सुविधा नहीं हो सकती। उन्होंने कहाकि जब हम अपनी विरासत के बारेमें जानेंगे, तभी हम उसपर चर्चा कर सकेंगे और उसपर गर्व कर सकेंगे। उन्होंने कहाकि संविधान में पंचायतों केलिए 29 कार्य निर्धारित हैं, जिनमें से एक सांस्कृतिक गतिविधियां भी हैं, इस पहलू को अबतक नज़रअंदाज किया गया था, इसी बात को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज मंत्रालय ने 'पंचायत विरासत' कार्यक्रम शुरू किया है। शाह फैसल ने कहाकि भारतीय संस्कृति का सार पीढ़ियों से लिखित संहिताओं के जरिए नहीं, बल्कि मौखिक परंपरा और ऐतिहासिक कथाओं के माध्यम से हस्तांतरित होता रहा है, इसलिए इस जीवंत संस्कृति का दस्तावेजीकरण करना कई चुनौतियों से भरा है।
शाह फैसल ने कहाकि मध्य पूर्व या यूरोप जैसी सभ्यताओं में लिखित ग्रंथों का अत्यधिक महत्व है, जिससे परिवर्तन की संभावनाएं सीमित हो गई हैं। इसके विपरीत भारतीय संस्कृति लचीली और निरंतर विकसित होती रही है। उन्होंने कहाकि यदि दस्तावेजीकरण में त्रुटियां हों, अधूरी जानकारी हो या प्रमाणीकरण में चूक हो तो यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं रह जाती, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत केसाथ अन्याय बन जाती है, इसलिए इस संपूर्ण कार्य में प्रामाणिकता और अखंडता सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। प्रोफेसर रमेश गौर ने उल्लेख करते हुए कहाकि भारत त्योहारों की भूमि है, जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है (उत्तरायण), तब मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल जैसे त्योहार देशभर में मनाए जाते हैं। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) का शुभारंभ भी 2021 में मकर संक्रांति पर किया गया था। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने एनएमसीएम की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को नोडल एजेंसी के रूपमें सौंपी थी। डॉ मयंक शेखर ने विभाग की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने 'मेरा गांव मेरी धरोहर' पोर्टल के बारेमें भी कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।
सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन प्रभाग के स्थापना दिवस कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण भारतीय पारंपरिक वाद्य संगीत 'पंचवाद्यम' की प्रस्तुति से हुआ, इसके बाद एनएमसीएम ब्रोशर और इसकी अर्धवार्षिक पत्रिका 'माटी' का दूसरा अंक जारी किया गया, जिसे सांस्कृतिक अनुसंधान और जनसंपर्क के क्षेत्रमें एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में आओ नागा जनजाति की पारंपरिक नृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। प्रज्ञा आर्ट्स की प्रस्तुति और नीतीश कुमार के संगीत प्रस्तुति ने समारोह को औरभी जीवंत बना दिया। कार्यक्रम के समापन पर रंगोली विजेताओं को पुरस्कार दिए गए। अतिथियों और आगंतुकों ने मकर संक्रांति के विशेष भोज का आनंद लिया। गौरतलब हैकि एनएमसीएम का यह स्थापना दिवस न केवल मकर संक्रांति की सांस्कृतिक भावना से जुड़ा हुआ था, बल्कि भारत की विविध लोक, जनजातीय और शास्त्रीय परंपराओं को एकही मंच पर एकत्रकर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश भी देता है।