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लोकसभा अध्यक्ष ने किया भारत पर्व का उद्घाटन

लालकिले में संस्कृति, लोकतंत्र, सृजनशीलता और राष्ट्रीयता का प्रदर्शन

नागरिकों से भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण संवर्धन का आह्वान

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Friday 30 January 2026 05:08:27 PM

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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज ऐतिहासिक लालकिले के प्रांगण में भारत पर्व का उद्घाटन किया। उन्होंने भारत पर्व को भारत की आत्मा की सजीव और सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए कहाकि यह ऐसा उत्सव है, जहां संस्कृति, लोकतंत्र, सृजनशीलता और राष्ट्रीय एकता एकसाथ मूर्तरूप में दिखाई देते हैं। उन्होंने कहाकि भारत पर्व केवल एक सांस्कृतिक आयोजन मात्र नहीं है, बल्कि यह उन संविधानिक मूल्यों की सशक्त स्मृति है, जो देश को एकसूत्र में बांधते हैं। ओम बिरला ने कहाकि भारत पर्व आत्मनिर्भर भारत का जीवंत उदाहरण है। गणतंत्र दिवस के महत्व का उल्लेख करते हुए ओम बिरला ने कहाकि भारत की शक्ति उसके संविधान में निहित है, जो लोकतंत्र, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल मूल्यों पर आधारित है।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हर्ष व्यक्त कियाकि भारत पर्व इन आदर्शों और जनता केबीच एक सजीव सेतु का कार्य करता है तथा संस्कृति, परंपरा और सामूहिक उत्सव से संविधानिक मूल्यों को जनसुलभ बनाता है। उन्होंने कहाकि कला, शिल्प, व्यंजन, संगीत और विचारों से भारत पर्व नागरिकों को एक भारत, श्रेष्ठ भारत का साकार अनुभव कराता है और इस धारणा को सुदृढ़ करता हैकि लोकतंत्र तब फलता-फूलता है, जब लोग अपनी विरासत और एकदूसरे से गहराई से जुड़े होते हैं। नागरिक सहभागिता विशेषकर युवाओं की भूमिका पर लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि संस्कृति से जुड़कर युवा अपनी जड़ों से पुनः जुड़ते हैं और राष्ट्रीय मूल्यों एवं नवाचार पर आधारित भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने कहाकि भारत पर्व जैसे आयोजन पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को सशक्त बनाते हैं और हस्तशिल्प, हथकरघा एवं स्थानीय व्यंजनों के जरिए आजीविका सृजनकर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को बल प्रदान करते हैं।
ओम बिरला ने कहाकि संस्कृति केवल पहचान नहीं है, बल्कि अवसर भी है। भारत पर्व की समावेशिता को इसकी सबसे बड़ी विशेषता बताते हुए ओम बिरला ने कहाकि इसमें आगंतुक गणतंत्र दिवस समारोह की भव्यता, सशस्त्र सुरक्षा बलों की प्रेरक प्रस्तुतियां, देश के प्रत्येक क्षेत्र की सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां, रंग-बिरंगे हस्तशिल्प एवं हथकरघा बाज़ार, अखिल भारतीय व्यंजनालय तथा जीवंत लोककला प्रस्तुतियां देख सकते हैं। ओम बिरला ने कहाकि ये सभी तत्व मिलकर भारत की बहुलतावादी पहचान का एक सशक्त चित्र प्रस्तुत करते हैं और यह दर्शाते हैंकि विविधता भारत की चुनौती नहीं, बल्कि उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। कलाकारों, लोक कलाकारों, संगीतकारों और शिल्पकारों को शुभकामनाएं देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें भारत की जीवंत परंपराओं के संरक्षक तथा देश की सांस्कृतिक एवं नैतिक शक्ति के स्तंभ बताया। उन्होंने कहाकि उनका सृजन केवल रचनात्मक अभिव्यक्ति नहीं है, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान, मूल्य और कौशल के हस्तांतरण का माध्यम है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि भारत पर्व सम्मान, पहचान और आजीविका का गरिमामय मंच प्रदान करता है। उन्होंने सशस्त्र बलों को नमन किया और कहाकि उनकी अनुशासित प्रस्तुतियां सेवा, त्याग और देशभक्ति जैसे मूल्यों को प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने कहाकि जब संस्कृति और सुरक्षा एकही मंच साझा करते हैं तो राष्ट्रीय आत्मविश्वास और सामूहिक संकल्प और अधिक सुदृढ़ होता है। आयोजन स्थल के प्रतीकात्मक महत्व पर लोकसभा अध्यक्ष ने लालकिले को केवल एक ऐतिहासिक धरोहर ही नहीं, अपितु भारत की सामूहिक स्मृति बताया। उन्होंने कहाकि इसी स्थल से कभी स्वतंत्रता के स्वप्न ने आकार लिया था और आज यही स्थान भारत के सांस्कृतिक आत्मविश्वास के गौरवशाली प्रदर्शन का मंच है। उन्होंने कहाकि लालकिले पर इतिहास और आधुनिकता का यह संगम राष्ट्र को प्रेरित करता हैकि वह अपनी सभ्यतागत जड़ों में निहित रहते हुए प्रगति के पथ पर आगे बढ़े।
लोकसभा अध्यक्ष ने नागरिकों से भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन का आह्वान किया और स्पष्ट कियाकि संरक्षण केवल सरकार का दायित्व नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की साझा जिम्मेदारी है, जिसे भारत पर्व प्रभावी रूपसे सुदृढ़ करता है। उन्होंने संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, राज्य सरकारों, सहयोगी संस्थाओं, कलाकारों, स्वयंसेवकों और आयोजन से जुड़े हितधारकों केप्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जतायाकि भारत पर्व देश विदेश से आए आगंतुकों केलिए एक स्मरणीय अनुभव सिद्ध होगा। लोकसभा अध्यक्ष ने कहाकि भारत पर्व एक ऐसा अनुभव है, जो लोगों को जोड़ता है, प्रेरित करता है और गर्व की अनुभूति कराता है। उन्होंने नागरिकों से आह्वान कियाकि वे स्थानीय कला को अपनाकर, शिल्पकारों का सम्मान करके, भाषाओं और परंपराओं का संरक्षण करके तथा दैनिक जीवन में लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात करके इस भावना को पूरे वर्ष जीवंत रखें। उद्घाटन कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, कला संस्कृति जगत के कलाकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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