स्वतंत्र आवाज़
word map

युवा 'नशे को ना कहें'-उपराष्ट्रपति

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय का दीक्षांत

मेधावियों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 14 March 2026 06:37:08 PM

convocation of central university of himachal pradesh

धर्मशाला। उपराष्ट्रपति चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन ने आज धर्मशाला में हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के 9वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की नशा मुक्त परिसर की पहल सराही और युवाओं से ‘नशे को ना कहें’ का आह्वान किया। उपराष्ट्रपति ने कहाकि नशा युवाओं, समाज और राष्ट्र को बुरी तरह से प्रभावित करता है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से खासतौपर पर नशाखोरी के खिलाफ जागरुकता फैलाने का आग्रह किया। उपराष्‍ट्रपति ने युवाओं का समाज कल्याण केलिए अपने ज्ञान का उपयोग करने, राष्ट्र की उन्नति केलिए जीने, नशा न करने और सबसे बढ़कर राष्ट्र को सर्वोपरि 'राष्ट्र प्रथम' रखने का आह्वान किया। हिमाचल प्रदेश की 'देवभूमि' और 'वीरभूमि' के रूपमें सराहना करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि यहां के वीर जवानों ने देश के सशस्त्रबलों में अनुकरणीय योगदान दिया है। उन्होंने राज्य की समृद्ध मेहमाननवाज़ी, जीवंत संस्कृति और चिरस्थायी परंपराओं की भी प्रशंसा की।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने भारत की समृद्ध शैक्षणिक विरासत का जिक्र करते हुए कहाकि नालंदा विश्वविद्यालय और तक्षशिला जैसे महान प्राचीन शिक्षा केंद्र अपने शिक्षकों के ज्ञान, विद्वता और निरंतर बौद्धिक विकास के कारण फले-फूले। उन्होंने कहाकि इन शिक्षण संस्थानों के गुरु और आचार्य आजीवन शिक्षार्थी थे, जिन्होंने वाद विवाद, संवाद और शोध के माध्यम से अपने ज्ञान को परिष्कृत किया, जिससे विचारों के विकास और सभ्यताओं की उन्नति का वातावरण बना। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने कहाकि आधुनिक विश्वविद्यालयों को संकाय विकास को प्राथमिकता देनी चाहिए और शिक्षण में नवाचार, अंतःविषयक अनुसंधान और वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। उपराष्ट्रपति ने कहाकि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को उत्साहपूर्वक लागू कर रहा है और भारतीय ज्ञान परंपराओं से संबंधित विषयों को शामिल किया है, जिससे एक नए दृष्टिकोण केसाथ शिक्षा की एक नई संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।
सीपी राधाकृष्णन ने विश्वविद्यालय की कई रचनाओं का डोगरी में अनुवाद करने और हिंदी साहित्य का पंजाबी में अनुवाद करने की पहल की प्रशंसा करते हुए कहाकि स्वदेशी चिंतन और भारतीय शोध पद्धतियों पर इसका जोर भारत की बौद्धिक परंपराओं में नए सिरे से विश्वास को दर्शाता है। सीपी राधाकृष्णन ने केंद्र और राज्य सरकारों के उच्चशिक्षा संस्थानों केबीच अधिक सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहाकि संयुक्त शोध, शिक्षकों की साझा विशेषज्ञता, डिजिटल संसाधनों और अकादमिक आदान प्रदान की साझेदारियां एक व्यापक शिक्षण समुदाय का निर्माण कर सकती हैं, जिससे छात्रों और विद्वानों दोनों को लाभ होगा एवं एक विकसित भारत केलिए वैश्विक स्तरपर प्रतिस्पर्धी उच्चशिक्षा प्रणाली के निर्माण में योगदान मिलेगा। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी पहलों ने युवा नवप्रवर्तकों केलिए नए रास्ते खोले हैं। उन्होंने युवाओं में नवाचार को प्रोत्साहित करने और विश्वविद्यालय की कम्युनिटी लैब पहल की सराहना की, जिससे छात्र और शिक्षक आसपास के समुदायों से जुड़कर ग्रामीण भारत की वास्तविकताओं को समझते हैं।
उपराष्‍ट्रपति ने विकसित भारत 2047 का जिक्र करते हुए कहाकि स्वतंत्रता शताब्दी तक भारत को एक विकसित राष्ट्र में बनाने केलिए आर्थिक विकास, सामाजिक समावेश, तकनीकी उन्नति, पर्यावरणीय स्थिरता और नैतिक नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने कहाकि इसको साकार करने में छात्र और युवा सबसे महत्वपूर्ण हितधारकों में से हैं। सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि विकसित भारत की परिकल्पना समावेशी विकास पर आधारित होनी चाहिए, जिसमें हमारा कोईभी राज्य या समाज का कोई भी वर्ग पीछे नहीं रह जाए। उन्होंने खुशी व्यक्त कीकि आज के दीक्षांत समारोह में 700 से अधिक मेधावी छात्रों को उपाधियां और पदक प्रदान किए गए, जिनमें से अधिकांश छात्राएं हैं। उन्होंने कहाकि 32 स्वर्ण पदक विजेताओं में से 23 महिलाओं की हिस्‍सेदारी राष्ट्र की प्रगति में महिलाओं के बढ़ते सशक्तिकरण और योगदान को दर्शाती हैं। दीक्षांत समारोह में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता, हिमाचल प्रदेश के कृषिमंत्री चंद्रकुमार, हिमाचल प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर, सांसद राजीव भारद्वाज और अनुराग सिंह ठाकुर, कुलाधिपति हरमोहिंदर सिंह बेदी और कुलपति सत प्रकाश बंसल, संकाय सदस्य, छात्र और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]