उपसभापति ने राष्ट्रमंडल देशों से किया संसदीय सहयोग का आह्वान
नई दिल्ली में हुई राष्ट्रमंडल संसदों में एआई अपनाने पर कार्यशालास्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 16 January 2026 05:05:32 PM
नई दिल्ली। भारतीय संसद के उच्च सदन राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा हैकि अगर एआई को संसदों में लाना है तो इसे उत्तरदायी, संदर्भपूर्ण एवं विश्वसनीय होना चाहिए। उन्होंने संसदीय व्यवस्थाओं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग को आकार देने में इंसानों की संस्थागत ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। हरिवंश ने ये टिप्पणियां नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल के अध्यक्षों एवं पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपनाने पर आयोजित कार्यशाला में की। उन्होंने भारतीय संसद के कुशल कामकाज केलिए विकसित की जा रही विभिन्न डिजिटल एवं एआई उपकरणों की सूची भी प्रस्तुत की। उपसभापति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास केलिए हाइब्रिड दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को स्पष्ट करते हुए कहाकि जब कोई व्यक्ति किसी नए संगठन में जाता है तो वह अपने साथ दो आवश्यक गुण लेकर जाता है, जिसमें पहला कौशल और दूसरा ज्ञान है।
उपसभापति हरिवंश ने कहाकि कौशल अर्जित किया जा सकता है, स्थानांतरित किया जा सकता है या आउटसोर्स किया जा सकता है, लेकिन ज्ञान प्रासंगिक होता है और संस्था में गहराई से समाहित होता है। हरिवंश ने कहाकि संसदीय ज्ञान अद्वितीय होता है, क्योंकि यह दशकों से चर्चाओं, निर्णयों, परंपराओं एवं संवैधानिक प्रथाओं से निर्मित होता है, यही सिद्धांत कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर भी समान रूपसे लागू होता है। उन्होंने कहाकि संसदों केलिए जवाबदेह एआई विकसित करने में मनुष्यों का संस्थागत ज्ञान का केंद्रीय महत्व है। उन्होंने कहाकि मानवीय निगरानी एवं मध्यवर्तन की क्षमता व्यवस्था का अभिन्न अंग होना चाहिए, बिना संयम के नवाचार जोखिम भरा होता है जबकि नवाचार के बिना संयम से ठहराव हो सकता है। उन्होंने कहाकि इसलिए संसद को इन दोनों केबीच सावधानीपूर्वक एवं सोच समझकर संतुलन स्थापित करना चाहिए। संसद में पहले से चल रहे एआई के व्यावहारिक उपयोग पर विस्तार से जानकारी प्रदान करते हुए हरिवंश ने व्यावसायिक दस्तावेजों के अनुवाद, संसदीय चर्चाओं का विश्लेषण एवं 22 भाषाओं में प्रश्नों को तैयार करने केलिए मॉडलों के उपयोग का उल्लेख किया।
उपसभापति हरिवंश ने कहाकि हमने लगभग 48,000 शब्दों वाली एक संसदीय भाषा शब्दकोश विकसित की है, जिसे विशेष रूपसे संसदीय उपयोग केलिए डिजाइन किएगए एक कस्टम एआई मॉडल में एकीकृत किया गया है। हरिवंश ने कहाकि इस कारण आंतरिक उपयोगकर्ताओं में इसकी स्वीकार्यता बहुत बढ़ी है और इसकी सटीकता में सुधार हुआ है, मानव अनुवादक अभीभी पूर्ण नियंत्रण में हैं, जबकि एआई एक सहायक उपकरण के रूपमें कार्य करता है। उन्होंने कहाकि विधायी संदर्भ में संसद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता सत्य पर आधारित होनी चाहिए, नैतिकता से पूर्ण होनी चाहिए, मानवीय निर्णय से निर्देशित होनी चाहिए एवं लोकतांत्रिक मूल्यों केप्रति जवाबदेह होनी चाहिए। उन्होंने राष्ट्रमंडल देशों केबीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अनुप्रयोग में ज्यादा संसदीय सहयोग का आह्वान किया। भारत ने चौथी बार इस दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी की है, इससे पहले भारत में यह सम्मेलन 1971, 1986 और 2010 में हुआ था और सम्मेलन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के सेंट्रल हॉल (संविधान सदन) में किया था।