राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ का अध्ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम
आयुर्वेद के छात्रों और विशेषज्ञों केबीच संवादात्मक सत्रस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Friday 30 January 2026 12:24:22 PM
वायनाड (केरल)। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत आनेवाली एक स्वायत्त संस्था राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ ने 27 से 29 जनवरी तक वायनाड जिले के जैवविविधता से समृद्ध क्षेत्र में वनस्पतियों की पहचान विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इसका उद्देश्य पश्चिमी घाट की विविध परिस्थितियों में व्यापक क्षेत्रीय अनुभव के जरिए औषधीय पौधों की पहचान और अध्ययन में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना था। द्रव्यगुण में विशेषज्ञता रखने वाले 30 छात्रों ने अध्ययन प्रशिक्षण कार्यक्रम में हिस्सा लिया और पश्चिमी घाट के सबसे पारिस्थितिक रूपसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में से एक वायनाड की समृद्ध जैवविविधता का सीधा अनुभव प्राप्त किया।
वनस्पतियों की पहचान और अध्ययन प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने मार्गदर्शित क्षेत्रीय भ्रमण और विषय विशेषज्ञों केसाथ संवादात्मक सत्रों में भाग लिया, इसमें उन्हें औषधीय पौधों की पहचान की तकनीकें, आवास विशिष्ट वनस्पतियां और संरक्षण के सिद्धांतों की जानकारी दी गई। इस अनुभव ने आयुर्वेदिक शिक्षा और नैदानिक अभ्यास केलिए आवश्यक उनके अनुप्रयुक्त समझ को सुदृढ़ किया। इस प्रकार की पहलों से राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ, आयुर्वेद के छात्रों और चिकित्सकों केबीच अनुभवात्मक शिक्षा और क्षमता निर्माण को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है, साथही पारंपरिक ज्ञान और जैवविविधता संरक्षण के एकीकरण को भी बढ़ावा दे रहा है। इस अवसर पर वैद्य रवींद्रनारायण आचार्य महानिदेशक केंद्रीय आयुर्वेदिक विज्ञान अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, वैद्य मोहनलाल जायसवाल सेवानिवृत्त प्रोफेसर राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान जयपुर, वैद्य मधु केपी एसोसिएट प्रोफेसर वैद्यरत्न पीएस वारियर आयुर्वेद कॉलेज कोट्टक्कल और रोज़ जोसेफ रेंज अधिकारी उत्तर वायनाड प्रभाग वन विभाग केरल सरकार उपस्थित थे।