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आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली गुजराती में प्रकाशित

'आदि शंकराचार्य का ज्ञानसागर युवाओं के लिए एक बहुत बड़ा खजाना'

गृहमंत्री ने सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट के कार्यक्रम में किया विमोचन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Friday 16 January 2026 01:34:32 PM

the complete works of adi shankaracharya have been published in gujarati

अहमदाबाद। गृहमंत्री अमित शाह ने सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट की गुजराती भाषा में प्रकाशित आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का अहमदाबाद में कार्यक्रमपूर्वक विमोचन किया। अमित शाह ने खुशी व्यक्त कीकि आदि शंकराचार्य रचित ज्ञानसागर का गुजराती भाषा में उपलब्ध होना गुजरात के पाठकों केलिए बड़ी बात है। उन्होंने कहाकि गुजराती भाषा में आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली खासतौर पर गुजरात के युवाओं केलिए एक बहुत बड़ा खजाना है। अमित शाह ने कहाकि संस्कृत में रचित आदि शंकराचार्य का यह ज्ञानसागर गुजराती युवाओं को उपलब्ध कराया गया है और आनेवाले वर्ष में जब अच्छे साहित्य की चर्चा होगी, तब निश्चित तौरपर 'सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट' का यह प्रयास उसमें उल्लेखनीय होगा।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहाकि सस्तु साहित्य मुद्रणालय ट्रस्ट ने कौटिल्य के अर्थशास्त्र सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों को गुजराती भाषा में उपलब्ध कराया है। उन्होंने जिक्र कियाकि गुजरात के सामूहिक चरित्र निर्माण में स्वामी अखंडानंद का बहुत बड़ा योगदान है, उन्होंने कई साहित्यिक सामग्रियों को एकत्रित करके बहुत सरल तरीके से युवाओं तक पहुंचाने का कार्य किया है। स्वामी अखंडानंद ने अनेक ऋषि-मुनियों के कथनों के माध्यम से सनातन धर्म के सार को गुजराती में प्रस्तुत करने का कार्य किया, साथही व्यक्ति के अस्तित्व को जागृत करने केलिए स्वामी अखंडानंद ने कई बोधकथाएं भी गुजराती युवाओं को उपलब्ध कराईं। गृहमंत्री ने कहाकि स्वामी अखंडानंद का जीवन ही ऐसा थाकि लोगों ने उस महान व्यक्ति के नाम में 'भिक्षु' जोड़ दिया। भिक्षु अखंडानंद ने आयुर्वेद, सनातन धर्म और समाज में उच्च विचारों को प्रस्तुत करने वाले साहित्य केलिए अपना जीवन दिया। स्वामी अखंडानंद ने अपने जीवनकाल में यह परिकल्पना की थीकि गुजरात के युवाओं को उत्कृष्ट साहित्य रचनाएं बहुत ही किफायती दामों में उपलब्ध हो।
गृहमंत्री अमित शाह ने एक बड़ी संस्था स्थापित की और अपने जीवनकाल में अनेकानेक ग्रंथों को प्रकाशित किया, जिनमें श्रीमद्भगवद्गीता, महाभारत, रामायण, योग वशिष्ठ, स्वामी रामतीर्थ के उपदेश, रामकथामृत और नीति विषयक ग्रंथ शामिल हैं। अमित शाह ने कहाकि लोग इंटरनेट आने केबाद सोचते थेकि शायद अब कोई पुस्तकें पढ़ेगा ही नहीं, परंतु इन 24 पुस्तकों के प्रकाशन ने इस भरोसे को मजबूत कर दिया हैकि नई पीढ़ी भी पढ़ती है। उन्होंने कहाकि आदि शंकराचार्य का ज्ञानसागर आजसे गुजराती युवाओं केलिए उपलब्ध है और इसका उनके जीवन एवं कार्यों पर निश्चित रूपसे गहरा असर पड़ेगा। उन्होंने कहाकि आदि शंकराचार्य ने ऐसी परंपरा स्थापित की, जिससे युगों-युगों तक सनातन की सेवा की जाती रहे। अमित शाह ने कहाकि इस सृष्टि पर अबतक जितना ज्ञान उपलब्ध है, उसमें ‘शिवोऽहम्’ से बढ़कर कुछ नहीं है, इतनी सरल, सटीक और सत्य के निकट उपनिषदों की व्याख्या और कोई नहीं दे सकता, यह कार्य केवल आदि शंकराचार्य ही कर सकते थे। गृहमंत्री ने कहाकि ढेर सारी कुरीतियां आने के कारण सनातन धर्म को लेकर कई आशंकाएं उत्पन्न हो गईं थीं।
अमित शाह ने कहाकि आदि शंकराचार्य के ग्रंथों को क्रमबद्ध रूपसे पढ़ने पर पता चलता हैकि उन्होंने अपने जीवनकाल में ही सारी आशंकाओं का निराकरण कर दिया और सभी किंतु-परंतु के तर्कबद्ध उत्तर उपलब्ध कराए। अमित शाह ने युवाओं से आग्रह कियाकि गुजराती अनुवाद और भावानुवाद उपलब्ध होने से अब वे आदि शंकराचार्य के रचित ग्रंथ ‘विवेकचूड़ामणि’ को एकबार अवश्य पढ़ें। उन्होंने कहाकि आदि शंकराचार्य ने केवल विचार नहीं दिए, उन्होंने विचार केसाथ-साथ भारत को संयोजन भी प्रदान किया। आदि शंकराचार्य ने सिर्फ मोक्ष का विचार नहीं दिया, बल्कि मोक्ष तक पहुंचने का मार्ग भी बताया। अमित शाह ने कहाकि इतनी अल्प आयु में उन्होंने कई बार देश की पदयात्रा की, आदि शंकराचार्य ने एक प्रकार से उस जमाने में पैदल चलते विश्वविद्यालय की भूमिका निभाई, सिर्फ पैदल यात्रा ही नहीं की, बल्कि भारत की पहचान को प्रस्तुत किया। अमित शाह ने कहाकि आदि शंकराचार्य ने चार दिशाओं में चार मठ स्थापित किए, ज्ञानद्वीप की स्थापना की और पूर्व-पश्चिम, उत्तर-दक्षिण चारों दिशाओं में सनातन की ध्वजा फहराने का कार्य किया।
अमित शाह ने इन चारों मठों के तत्वावधान में सारे वेदों और उपनिषदों को बांटकर उनके संरक्षण और संवर्धन केलिए हमेशा केलिए एक व्यवस्था स्थापित की। उन्होंने कहाकि कठिन से कठिन परिस्थितियों में सनातन धर्म कालबाह्य न हो, इसके लिए आदि शंकराचार्य ने अखाड़ों की स्थापना की और सनातन संस्कृति केलिए संगठन का निर्माण किया। अमित शाह ने कहाकि भक्ति, कर्म और ज्ञान, तीनों मार्गों से मोक्ष संभव है, यह समन्वित विचार आदि शंकराचार्य की महान देन है। उन्होंने कहाकि आदि शंकराचार्य ने शास्त्रार्थ की परंपरा को पुनर्जीवित कर संवाद से समाधान और बहस की संस्कृति की नींव रखी। उन्होंने यहभी कहाकि आदि शंकराचार्य ने प्रकृति की पूजा से लेकर सनातन के मूल तत्व को पहचानने का रास्ता आम लोगों केलिए प्रशस्त किया।

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