उत्तराखंड की संकटग्रस्त पारंपरिक शिल्प विधाओं का संरक्षण और संवर्धन
केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय की भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की से साझेदारीस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Thursday 22 January 2026 05:24:49 PM
रुड़की (उत्तराखंड)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की ने केंद्रीय कपड़ा मंत्रालय के राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के अंतर्गत ‘संचय’ शिल्प संसाधन केंद्र की स्थापना की स्वीकृति की घोषणा की है। यह केंद्र आईआईटी रुड़की के ऐतिहासिक परिसर में स्थापित किया जाएगा, जो भारत की शिल्प विरासत को प्रौद्योगिकी, डिज़ाइन एवं समकालीन नवाचार केसाथ एकीकृत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह संसाधन केंद्र विकास आयुक्त हस्तशिल्प कार्यालय के जरिए वस्त्र मंत्रालय से समर्थित है। संचय यानी सेफगार्डिंग, अक्यूमुलेटिंग, नर्चरिंग क्राफ्ट एंड हैरिटेज टू स्टिमुलेट आत्मनिर्भर एंड योग्यता को भारत की विविध शिल्प परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन एवं विकास केलिए एक राष्ट्रीय केंद्र के रूपमें परिकल्पित किया गया है।
उत्तराखंड केंद्रित यह केंद्र पारंपरिक एवं संकटग्रस्त शिल्पों के पुनरुद्धार तथा शिल्पकार समुदायों के सशक्तिकरण हेतु संरचित प्रशिक्षण, डिज़ाइन विकास, डिजिटल प्रलेखन और आधुनिक तकनीकी सहयोग प्रदान करेगा। राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास पहल का नेतृत्व डिज़ाइन विभाग कर रहा है, इसके अध्यक्ष प्रोफेसर अपूर्बा कुमार शर्मा हैं। प्रोफेसर स्मृति सरस्वत (समन्वयक), प्रोफेसर इंदरदीप सिंह, प्रोफेसर उषा लेंका, प्रोफेसर विभूति भट्टाचार्य (सह समन्वयक) इस पहल से जुड़े हैं, इन्हें शोधार्थी सैयद इफराह असफर और आदित्य जैन का सहयोग प्राप्त है। सीबीआरसी में अत्याधुनिक सुविधाएं, प्रौद्योगिकी सक्षम कार्यस्थल, डिज़ाइन एवं प्रदर्शनी स्टूडियो, मेकर लैब्स तथा डिजिटल अभिलेखागार स्थापित किए जाएंगे। केंद्र एक व्यापक शिल्प विश्वकोश और शिल्पकार निर्देशिका विकसित करेगा, जिन्हें ओएनडीसी और मेक इन इंडिया प्लेटफॉर्म्स केसाथ एकीकृत किया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। सीबीआरसी शिल्पकारों केलिए कौशल उन्नयन, नवाचार, बाज़ार तक पहुंच और समकालीन डिज़ाइन दृष्टिकोणों से जुड़ने हेतु विशिष्ट राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंच के रूपमें कार्य करेगा। संचय क्षेत्रीय फोकस केसाथ भारत की वैश्विक शिल्प कूटनीति में योगदान देगा, सतत आजीविका को समर्थन, सांस्कृतिक संरक्षण को सुदृढ़ करना, भौतिक संस्कृति को बढ़ावा देना, डिज़ाइन सोच को प्रोत्साहित करना तथा अनुसंधान, उद्यमिता और रचनात्मक उद्योगों केलिए नए अवसर सृजित करना। आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रोफेसर केके पंत ने कहाकि संचय भारत की समृद्ध शिल्प विरासत को आधुनिक विज्ञान, डिज़ाइन एवं प्रौद्योगिकी केसाथ एकीकृत करने की दिशामें आईआईटी रुड़की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहाकि यह केंद्र नवाचार शिल्प पुनरुद्धार और सामुदायिक सशक्तिकरण का राष्ट्रीय मॉडल प्रस्तुत करेगा, जिससे भारत की सांस्कृतिक अर्थव्यवस्था और रचनात्मक क्षेत्रमें वैश्विक नेतृत्व सुदृढ़ होगा। कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) ने कहाकि संचय शिल्प संरक्षण एवं नवाचार केलिए दूरदर्शी मॉडल प्रस्तुत करता है।
कपड़ा मंत्रालय के विकास आयुक्त ने कहाकि आईआईटी रुड़की केसाथ साझेदारी से हम पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को सशक्त करने, शिल्प समुदायों का समर्थन करने तथा प्रौद्योगिकी आधारित समाधानों को एकीकृत करने का लक्ष्य रखते हैं, जिससे भारतीय शिल्पों की दृश्यता, स्थिरता और वैश्विक पहुंच बढ़े। उनका कहना हैकि यह सहयोग शिल्पकारों को सशक्त बनाने और भारत की सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की ओर ले जाने की दिशामें एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहाकि संचय विरासत, नवाचार और सतत विकास के संगम पर आईआईटी रुड़की को स्थापित करता है, जिससे डिज़ाइन, अभियांत्रिकी, सामाजिक विज्ञान और उद्यमिता के क्षेत्रोंमें बहुविषयक सहयोग संभव होगा। उन्होंने कहाकि यह केंद्र शिल्प संरक्षण, कौशल विकास और सांस्कृतिक नवाचार केलिए एक लाइटहाउस संस्थान बनने की ओर अग्रसर है, जो राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और वैश्विक रचनात्मक संवादों में सार्थक योगदान देगा।