भारतीय वायुसेना का असाधारण वायु श्रेष्ठता वाला लड़ाकू विमान है तेजस
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी को दी बधाईस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Monday 5 January 2026 01:13:38 PM
बेंगलुरु। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की दो दिवसीय ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स बेंगलुरु में हुई। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने संगोष्ठी में लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के गौरवशाली 25 वर्ष पूरे होने पर एडीए को बधाई दी और निरंतर बदलते समय में भारतीय वायुसेना को परिचालन रूपसे तैयार रखने केलिए सुपुर्दगी की समयसीमा का पालन करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने रक्षा आयात पर निर्भरता को कम करने केलिए स्वदेशी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास के महत्व पर जोर दिया, जिससे 2047 तक विकसित भारत के परिकल्पना को साकार किया जा सके।
एयरोनॉटिक्स संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, औद्योगिक भागीदार, शिक्षाविद, विमानन क्षेत्र के अग्रणी और एयरोस्पेस क्षेत्र के वक्ता एकसाथ आए और वैमानिकी के विकास, डिजाइन नवाचार, विनिर्माण और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए। एयरोनॉटिक्स-2047 का मुख्य उद्देश्य आधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं का पता लगाना है, जिनमें अगली पीढ़ी के विमानों के लिए विनिर्माण और असेंबली, डिजिटल विनिर्माण, अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों केलिए वायुगतिकी, प्रणोदन प्रौद्योगिकियां, उड़ान परीक्षण तकनीकें, डिजिटल ट्विन प्रौद्योगिकी, प्रमाणन चुनौतियां, उड़ान नियंत्रण प्रणाली और एवियोनिक्स, लड़ाकू विमानों में रखरखाव संबंधी चुनौतियां, विमान डिजाइन में एआई और एक्चुएटर्स केलिए सटीक विनिर्माण शामिल हैं। संगोष्ठी में भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के भविष्य और एलसीए तेजस के प्रारंभिक डिजाइन से स्क्वाड्रन में शामिल होने तकके सफर पर चर्चा की गई।
एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी ने एलसीए तेजस को डिजाइन और विकसित किया है, इसके 5600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण हो चुके हैं, इसमें सरकारी प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों सहित 100 से अधिक डिजाइन कार्य केंद्र शामिल थे। एलसीए को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने केलिए कार्बन कंपोजिट, हल्के पदार्थ, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल, डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम, ग्लास कॉकपिट आदि कई विशिष्ट प्रौद्योगिकियों का विकास किया गया। एलसीए एमके1ए स्वदेशी रूपसे डिजाइन और निर्मित लड़ाकू विमान का एक उन्नत संस्करण है और आशा हैकि यह भारतीय वायुसेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने केलिए एक शक्तिशाली मंच के रूपमें कार्य करेगा। एलसीए एमके II और एलसीए नेवी पर वर्तमान में कार्य चल रहा है। संगोष्ठी में तेजस कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठित वक्ताओं ने तकनीकी वार्ता की एक श्रृंखला प्रस्तुत की।
भारत को एलसीए तेजस के विकास से अपार लाभ हुआ है, क्योंकि अब उसके पास स्वदेशी रूपसे लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता और सामर्थ्य दोनों हैं। एलसीए कार्यक्रम सबसे सफल स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में से एक है, जिसके माध्यम से भारतीय वायुसेना को असाधारण वायु श्रेष्ठता वाला लड़ाकू विमान प्राप्त हुआ। अबतक 38 विमान (32 लड़ाकू विमान और 6 प्रशिक्षण विमान) भारतीय वायुसेना के दो स्क्वाड्रनों में शामिल किए जा चुके हैं। संगोष्ठी के एक भाग के रूपमें बड़ी संख्या में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, डीपीएसयू, उद्योग और एमएसएमई ने अपने स्वदेशी रूपसे डिजाइन और विकसित किए गए उत्पादों का प्रदर्शन किया, जो हवाई अनुप्रयोगों केलिए उपयुक्त हैं।