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भारत की भाषाई विरासत पर गौरव करें-शिक्षा मंत्री

ऐतिहासिक सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया

शिक्षा मंत्री ने भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में साहित्यिक कृतियां जारी कीं

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 7 January 2026 12:29:10 PM

literary works are being released in indian classical languages.

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय शास्त्रीय भाषाओं में 55 साहित्यिक कृतियां जारी कीं। उन्होंने सभी का आह्वान कियाकि भारत की भाषाई विरासत पर गौरव करें। वे कल नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इन साहित्यिक कृतियों में भारतीय भाषा संस्थान के अंतर्गत शास्त्रीय भाषाओं केलिए सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस की 41 पुस्तकें, केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान की 13 पुस्तकें और एक तिरुक्कुरल सांकेतिक भाषा संग्रह प्रमुख हैं। संग्रह में कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, ओडिया और तमिल भाषाओं में महत्वपूर्ण विद्वानों के काम शामिल हैं, तिरुक्कुरल की भारतीय सांकेतिक भाषा में भी व्याख्या है। ये प्रकाशन भारत की भाषाई विरासत को शिक्षा और अनुसंधान के केंद्र में रखने और सांस्कृतिक गौरव को प्रोत्साहन देने केलिए एक बड़े राष्ट्रीय प्रयास का हिस्सा हैं, साथही शास्त्रीय ज्ञान परंपरा केसाथ जुड़ाव को भी सुदृढ़ करते हैं।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहाकि नरेंद्र मोदी सरकार ने सभी भारतीय भाषाओं को सुदृढ़ करने और प्रोत्साहन देने केलिए बड़े पैमाने पर जैसेकि शेड्यूल लिस्ट में और भाषाओं को शामिल करने, शास्त्रीय ग्रंथों का भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने और भारतीय भाषाओं में शिक्षा को प्रोत्साहन देने का उल्लेखनीय कार्य किया है। उन्होंने कहाकि भारतीय भाषाओं को खत्म करने के प्रयासों के बावजूद वे समय की कसौटी पर खरी उतरी हैं। उन्होंने कहाकि भारत लोकतंत्र की जननी है और बहुत अधिक भाषाई विविधता वाला देश है और यह समाज की जिम्मेदारी हैकि देश की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित किया जाए और आनेवाली पीढ़ियों को इसके बारेमें जागरुक किया जाए। उन्होंने कहाकि भाषाएं जोड़ने वाली शक्ति हैं और बतायाकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बातपर हमेशा जोर दिया हैकि सभी भारतीय भाषाएं राष्ट्रीय भाषाएं हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने जिक्र कियाकि सांकेतिक भाषा में तिरुक्कुरल के सार को शामिल करना एक समावेशी भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करता है, जहां सभी केलिए ज्ञान तक पहुंच सुनिश्चित की जाती है और यह प्रकाशन भारत के बौद्धिक साहित्य में एक मूल्यवान योगदान है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 भारतीय भाषाओं में शिक्षा के विजन को आगे बढ़ाती है और भारत विविधता में एकता का एक जीवंत उदाहरण बना हुआ है, जहां भाषाएं समाज को जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने कहाकि औपनिवेशिक युग की मैकाले की मानसिकता के विपरीत भारतीय सभ्यता ने हमेशा भाषाओं को संवाद और सांस्कृतिक सद्भाव के सेतु के रूपमें देखा है। धर्मेंद्र प्रधान ने भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहित करने केलिए भारतीय भाषा समिति, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, भारतीय भाषा संस्थान और केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्रालय सचिव (उच्चशिक्षा) विनीत जोशी, भारतीय भाषा समिति अध्यक्ष चामु कृष्ण शास्त्री, सीआईआईएल निदेशक प्रोफेसर शैलेंद्र मोहन, सीआईसीटी निदेशक प्रोफेसर आर चंद्रशेखरन, सलाहकार (लागत) मनमोहन कौर और शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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