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'आवाज़ों के जुगनू' पुस्तक का विमोचन

भारतीय गायन जगत की विशिष्ट यादगार आवाज़ों का संग्रह

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में वक्ताओं का पुस्तक पर विमर्श

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 10 January 2026 03:17:49 PM

book 'aavaazon ke juganoo' was launched

नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में 'आवाज़ों के जुगनू: वॉयस मास्‍टर्स ऑफ इंडिया' पुस्तक का विमोचन और व्यापक विमर्श हुआ। इस कार्यक्रम का आयोजन आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र ने किया था, जिसकी अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ सच्चिदानंद जोशी ने की। डॉ सच्चिदानंद जोशी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहाकि कला का दायरा विशाल है, इसलिए आईजीएनसीए ने 'आवाज़ों के जुगनू' पुस्तक और ऑडियो प्रारूप के जरिए गैरपारंपरिक कला विधा यानी आवाज़ों की दुनिया के कलाकारों की यात्राओं को दस्तावेज़ी करने की साहसिक पहल की है। उन्होंने घोषणा कीकि पुस्तक का अंग्रेजी संस्करण भी प्रकाशित किया जाएगा। महाभारत में 'समय' को अपनी आवाज़ देने वाले अभिनेता हरीश भिमानी भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने कहाकि आवाज़ केवल संचार का माध्यम नहीं है, बल्कि संस्कृति और संवेदनशीलता की वाहक है।
हरीश भिमानी ने मानव जीवन में आवाज़ की महत्ता बताते हुए एक संस्कृत सुभाषित का उल्‍लेख किया और समझायाकि कोयल और कौआ दोनों काले रंग के होते हैं, फिरभी उनकी आवाज़ में अंतर होता है। उन्होंने 'आवाज़ों के जुगनू' पुस्तक को एक उल्लेखनीय पहल बताया और कहाकि यह पुस्तक केवल पत्रों का संग्रह नहीं है, बल्कि उस अदृश्य जीवनशक्ति को पकड़ने का प्रयास है, जो सदियों से हमारी सामूहिक स्मृति का हिस्सा है। उन्होंने कहाकि 'आवाज़ों के जुगनू' हमारे सांस्कृतिक डीएनए का दस्तावेज है, जो हमें याद दिलाता हैकि भले ही शब्द मौन हो जाएं, उनकी गढ़ी हुई ध्वनि की गूंज सभ्यता की प्रतिध्वनि को जीवित रखती है। दिल्ली मेट्रो की जानी-पहचानी आवाज़ शम्मी नारंग ने भारतीय प्रसारण जगत में आवाज़ के कलाकारों की भूमिका के बारेमें बात की और इस तरह के दस्तावेजीकरण प्रयासों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बतायाकि इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने केबाद उन्होंने आवाज़ की दुनिया में कैसे कदम रखा।
शम्मी नारंग ने सही उच्चारण और लहजे के महत्व पर कहाकि अच्छी तरह बोलना जरूरी है, क्योंकि अच्छी वाणी श्रोता पर सकारात्मक प्रभाव डालती है। सोनल कौशल ने युवा पीढ़ी केलिए आवाज़ उद्योग में मौजूद संभावनाओं और चुनौतियों के बारेमें अनुभव साझा किए। उन्होंने अपने सफर के बारेमें विस्तार से बताया और सभागार में मौजूद बच्चों को डोरेमोन, छोटा भीम के संवाद सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। अनुराग पुनेथा ने स्वागत भाषण में कहाकि आवाज़ विश्वास पैदा करती है। उन्होंने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान संयुक्तराज्य अमेरिका में हुए एक प्रसारण का ज़िक्र किया, जब एक अभिनेता ने रेडियो नाटक के दौरान घोषणा कीकि अमेरिका पर मंगल ग्रहवासी हमला कर रहे हैं, लोगों ने इस घोषणा पर विश्वास किया और सड़कों पर जमा हो गए, यह आवाज़ की शक्ति को दर्शाता है। पुस्तक का परिचय देते हुए इसकी संकलक और संपादक डॉ शेफाली चतुर्वेदी ने बतायाकि 'आवाज़ों के जुगनू' भारतीय गायन जगत की उन विशिष्ट और यादगार आवाज़ों का संग्रह है, जिन्होंने रेडियो, दूरदर्शन, विज्ञापन, डबिंग, घोषणाओं और रंगमंच से भारतीय प्रसारण को समृद्ध किया है।
डॉ शेफाली चतुर्वेदी ने कहाकि यह पुस्तक इन कलाकारों के जीवन सफर, रचनात्मक संघर्षों और योगदानों को विस्तार से प्रस्तुत करती है। कार्यक्रम में जानेमाने रेडियो जॉकी (आरजे) नितिन खुराफती, सिमरन, जसलीन भल्ला, साइमा रहमान, प्रख्यात प्रसारक राजेंद्र चुघ, राजीव कुमार शुक्ला, रिनी खन्ना, रमा पांडे, श्रीवर्धन त्रिवेदी और नरेंद्र जोशी ने भी विचार साझा किए। अपनी तरह के इस अनूठे कार्यक्रम ने भारतीय आवाज़ उद्योग केप्रति समझ और संवेदनशीलता को और गहरा किया। कला, मीडिया और संस्कृति से जुड़े विद्वानों, कलाकारों, छात्रों और श्रोताओं की भी अच्छी खासी उपस्थिति देखी गई। आईजीएनसीए के मीडिया केंद्र के नियंत्रक अनुराग पुनेथा ने अतिथियों का स्वागत किया और कार्यक्रम का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर एक क्यूआर कोड जारी किया गया, जिससे लोग पुस्तक में शामिल सभी हस्तियों के साक्षात्कार देख सकते हैं।

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