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स्वामी प्रभुपाद पर हिंदोल सेनगुप्ता ने ​लिखी पुस्तक

'गाओ, नाचो व नेतृत्व करो: श्रील प्रभुपाद के जीवन से नेतृत्व का सबक'

उपराष्ट्रपति ने स्वामी प्रभुपाद के आध्यात्मिक और मानवीय कार्य सराहे

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Thursday 8 January 2026 05:03:27 PM

hindol sengupta's book on swami prabhupada was launched

नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हिंदोल सेनगुप्ता की ‘गाओ, नाचो एवं नेतृत्व करो: श्रील प्रभुपाद के जीवन से नेतृत्व का सबक’ शीर्षक से पुस्तक का समारोहपूर्वक विमोचन किया। उपराष्ट्रपति ने उपराष्ट्रपति आवास पर उपस्थित महानुभावों को संबोधित करते हुए भारत को सभ्यतागत नेता के रूपमें वर्णित किया, जिसकी प्राचीन परंपराओं ने निरंतर मूल्यों, सेवा एवं आंतरिक अनुशासन पर आधारित नेतृत्व पर जोर दिया है। उन्होंने कहाकि भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद का जीवन इस परंपरा में दृढ़ता केसाथ खड़ा है, जो उद्देश्य, विनम्रता एवं नैतिक स्पष्टता आधारित नेतृत्व का उदाहरण प्रस्तुत करता है। उपराष्ट्रपति ने उल्लेख कियाकि स्वामी प्रभुपाद के विचार एवं शिक्षाएं तेजीसे बदलती दुनिया में पहले से ज्यादा प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहाकि स्वामी प्रभुपाद ने ऐसे संस्थान स्थापित किए, जो पीढ़ियों तक मानवता की सेवा करते रहेंगे।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि उनके नेतृत्व का स्तविक प्रमाण इस तथ्य में निहित हैकि कई लोग उनका नाम नहीं जानते, लेकिन उनके कार्य एवं इसके स्थायी प्रभाव से विश्व के लाखों लोग प्रभावित हैं। उपराष्ट्रपति ने याद कियाकि स्वामी प्रभुपाद ने अधिक उम्र में भी महाद्वीपों की असाधारण यात्रा की, जहां वह न केवल एक धार्मिक दर्शन, बल्कि अनुशासन, भक्ति एवं आनंद पर आधारित जीवनशैली भी अपने साथ ले गए। वर्ष 1966 में स्थापित इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि इसकी वैश्विक सफलता इस बातका प्रमाण हैकि नेतृत्व अधिकार पर नहीं, बल्कि दृढ़ विश्वास, सेवा एवं स्पष्ट दृष्टिकोण पर आधारित है। उन्होंने पुस्तक के मुख्य विषय पर कहाकि ‘गाओ, नाचो एवं नेतृत्व करो' एक सशक्त विचार प्रस्तुत करता हैकि नेतृत्व आनंदमय, सहभागी और गहन मानवीय हो सकता है। उन्होंने कहाकि स्वामी प्रभुपाद ने आदेश से नहीं, बल्कि प्रेरणा से नेतृत्व किया और सादगी एवं भक्ति में अडिग रहते हुए स्थायी संस्थाओं का निर्माण किया।
संत और कवि तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि नेतृत्व की शुरुआत स्पष्ट सोच एवं उच्चतर आंतरिक दृष्टि से होती है, जिसे फिर सामूहिक कार्रवाई में बदलना चाहिए। उन्होंने कहाकि यह पुस्तक स्वामी प्रभुपाद के जीवन को नैतिक एवं परिवर्तनकारी नेतृत्व के अध्ययन के रूपमें प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करती है, जो इतिहास, दर्शन एवं समकालीन नेतृत्व संबंधी विचारों को आपस में जोड़ती है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि इस प्रकार के कार्य विशेष रूपसे उन लोगों केलिए बहुत प्रासंगिक हैं, जो सार्वजनिक जीवन में शामिल हैं, जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं विश्वास, संयम एवं सेवा भावना पर फलती-फूलती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त कीकि यह पुस्तक युवा पाठकों को भौतिक सफलता से परे उद्देश्य खोजने एवं नेतृत्व को दूसरों की उन्नति तथा सामूहिक भलाई में एक साधन के रूपमें सोचने केलिए प्रेरित करेगी। कार्यक्रम में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, अक्षय पात्र फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा इस्कॉन बैंगलोर के अध्यक्ष मधु पंडित दास, अक्षय पात्र फाउंडेशन के उपाध्यक्ष एवं सह संस्थापक तथा इस्कॉन बैंगलोर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंचलपति दास और विद्वान उपस्थित थे।

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