स्वतंत्र आवाज़
word map

'राह वीर बिना किसी डर के जीवन बचाएं'

सड़क दुर्घटनाओं में घायलों और मौतों में वृद्धि बड़ी चिंताजनक!

राह वीरों को मान्यता वित्तीय सहायता और सम्मानित किया जाएगा

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Sunday 4 January 2026 04:46:11 PM

'raah veer' save lives without any fear!

नई दिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से सड़क दुर्घटना पीड़ित की सहायता हेतु एक विशेष जानकारी देते हुए बताया गया हैकि सड़क दुर्घटना के दौरान हर पल महत्‍वपूर्ण होता है, विशेषकर उस महत्‍वपूर्ण गोल्डन आवर में जब समय पर सहायता मिलने से किसीकी जान बच सकती है। ऐसे क्षणों में आगे आनेवाले लोगों का समर्थन और सुरक्षा करने केलिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम-2019 की धारा 134ए के तहत 2020 में गुड समैरिटन रूल्स अधिसूचित किए हैं। ये नियम एक सरल विश्वास पर आधारित हैं-दुर्घटना पीड़ित की सहायता करने वाले किसीभी व्यक्ति को ऐसा करने से कभी डरना नहीं चाहिए। जो लोग साहस दिखाते हुए किसी घायल अजनबी को उठाकर, अक्सर उसका नाम भी जाने बिना, उसे निकटतम अस्पताल ले जाते हैं, उन्हें राह वीर कहा जाता है। किसी दुर्घटना पीड़ित की सहायता करने वाले नेक आदमी को कानूनी झंझटों में नहीं फंसाया जा सकता, उससे व्यक्तिगत जानकारी देने केलिए मजबूर नहीं किया जा सकता या उसे अनावश्यक रूपसे हिरासत में नहीं लिया जा सकता है। उनकी सहायता करने की इच्छा का सम्मान किया जाता है और उनकी गरिमा और निजता की रक्षा की जाती है।
कानून के अनुसार सड़क दुर्घटना में गंभीर चोट लगने केबाद का पहला घंटा 'गोल्डन आवर' कहलाता है, जो चिकित्सा सहायता केलिए सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इस अवधि में त्वरित सहायता से आजीवन विकलांगता, आघात और अनगिनत मौतों को रोका जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह हैकि राहवीर बनने केलिए आपको चिकित्सा प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है, आपको विशेष उपकरणों की भी आवश्यकता नहीं है, कभी-कभी आपकी सहायता करने की इच्छा ही सबसे बड़ी सहायता होती है। आपको जानना चाहिए क्या करें और क्या न करें। बिना किसी डर के सहायता करें, सद्भावना से कार्य करने पर आपको कानूनी रूप से नागरिक या आपराधिक दायित्व से सुरक्षा प्राप्त है। यह जान लेंकि आप गुमनाम रह सकते हैं, जबतक आप गवाह बनना न चाहें, तबतक आपको व्यक्तिगत विवरण साझा करने की आवश्यकता नहीं है। कृपया केवल एकबार ही पुलिस को बयान दे सकते हैं, यदि आप गवाह के रूप में स्वेच्छा से उपस्थित होते हैं तो आपकी सुविधानुसार किसीभी समय और स्थान पर आपसे एक बार पूछताछ की जा सकती है। राहवीर केवल एक योजना या नीति से कहीं बढ़कर है। यह साहस, सहानुभूति और सामूहिक जिम्मेदारी है। अगलीबार जब आप कोई दुर्घटना देखें तो याद रखेंकि त्रासदी और जीवन केबीच आप ही एकमात्र उम्मीद हो सकते हैं और किसीकी जान बचाने केलिए आपको डॉक्टर होने की जरूरत नहीं है, बस इंसान होना जरूरी है।
अस्पताल से रसीद अवश्य प्राप्त करें, आपको इस बातकी साधारण पुष्टि प्राप्त करने का अधिकार हैकि आप पीड़ित को उपचार केलिए लाए थे। क्या न करें-वे मिथक जिनपर आपको विश्वास नहीं करना चाहिए, कानूनी चिंताओं के कारण संकोच न करें, यह प्रणाली राहवीरों की रक्षा केलिए बनाई गई है। अस्पताल में रुकने केलिए बाध्य महसूस न करें, एकबार मरीज को भर्ती कर लिया जाए तो आप जाने केलिए स्वतंत्र हैं। इलाज केलिए भुगतान न करें, अस्पताल आपातकालीन देखभाल केलिए आपसे भुगतान की मांग नहीं कर सकते। एफआईआर दर्ज कराने या गवाही देने केलिए खुदको बाध्य महसूस न करें, गवाह बनना आपकी व्यक्तिगत पसंद है। यदि आप गुमनाम रहना पसंद करते हैं तो व्यक्तिगत विवरण प्रकट न करें, यह आपका अधिकार है। अधिकारियों को हिरासत में लिए जाने की अनुमति न दें, इसकी अनुमति‍ नहीं है। बेहतर सड़कों और बढ़ते बुनियादी ढांचे के बावजूद, भारत में सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने और मरने वालों की संख्या में चिंताजनक वृद्धि हो रही है। भारत दुनिया में सबसे अधिक सड़क दुर्घटनाओं वाले देशों में से एक है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी कहा हैकि सड़क दुर्घटनाओं का आर्थिक प्रभाव बहुत बड़ा है, इससे देश को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का लगभग 3 प्रतिशत नुकसान होता है। यह आईआईटी दिल्ली की एक रिपोर्ट में बताया गया है।
सड़कें लोगों को जोड़ने और अवसर पैदा करने केलिए होती हैं, फिरभी अक्सर वे दुखद, रोकी जा सकने वाली दुर्घटनाओं का कारण बन जाती हैं। इनमें से कई मौतें इसलिए नहीं होतीकि सहायता संभव नहीं थी, बल्कि इसलिए होती हैं, क्योंकि सहायता समय पर नहीं पहुंच पाती। राहगीर अक्सर पुलिस की पूछताछ, अस्पताल की प्रक्रियाओं या कानूनी पेचीदगियों के डर से दुर्घटना पीड़ितों की सहायता करने में हिचकिचाते हैं। इस हिचकिचाहट के कारण गोल्डन आवर के कीमती मिनट बर्बाद हो जाते हैं, जब समय पर चिकित्सा देखभाल जीवन बचा सकती है। राहवीर (नेक आदमी) योजना इन व्यक्तियों को वित्तीय मान्यता भी प्रदान करती है और उन्हें वास्तविक जीवन के नायकों के रूपमें सम्मानित करती है, जिन्होंने संकोच के बजाय करुणा को चुना। इस योजना के तहत जोभी व्यक्ति दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता दिलाने में मदद करता है, उसे 25000 रुपये का पुरस्कार और प्रशंसा पत्र दिया जाता है। बहादुरी के ऐसे कार्यों को दोहराने पर साल में पांच बार तक यह सम्मान प्राप्त किया जा सकता है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह हैकि यह योजना आत्मविश्वास, भरोसा और एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देती है, जहां सड़क पर दूसरों की सहायता करना एक साझा जिम्मेदारी और राष्ट्र केलिए गर्व होता है।

हिन्दी या अंग्रेजी [भाषा बदलने के लिए प्रेस F12]