उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने फरीदाबाद में किया मेले का उद्घाटन
मिस्र की समृद्ध कलात्मक विरासत और आत्मनिर्भर भारत का उत्सवस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Sunday 1 February 2026 03:15:30 PM
फरीदाबाद। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने फरीदाबाद में 39वें सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेले का समारोहपूर्वक उद्घाटन किया। उपराष्ट्रपति ने इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय स्तरपर ख्याति प्राप्त यह मेला भारत और विदेश के कारीगरों, शिल्पकारों और सांस्कृतिक कलाकारों को एकसाथ लाता है, जो देश की समृद्ध कलात्मक विरासत और आत्मनिर्भर भारत की भावना का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने कहाकि पिछले चार दशक में सूरजकुंड मेला भारत की सांस्कृतिक आत्मा, कलात्मक उत्कृष्टता और सभ्यतागत निरंतरता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है। उन्होंने कहाकि 30 से अधिक देशों की भागीदारी केसाथ यह मेला वास्तव में भारत के शाश्वत दर्शन 'वसुधैव कुटुंबकम' अर्थात विश्व एक परिवार है को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहाकि आत्मनिर्भर भारत पर केंद्रित होने से इसका महत्व औरभी बढ़ जाता है, क्योंकि शिल्पकार सदियों पुराने ज्ञान और परंपराओं के संरक्षक हैं। उन्होंने कहाकि उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था के निर्माण केलिए आवश्यक है। उपराष्ट्रपति ने कहाकि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसी पहल कौशल विकास, बाजार तक पहुंच और आर्थिक सहायता के माध्यम से हस्तशिल्प के क्षेत्र को मजबूत कर रही है। उत्तर प्रदेश और मेघालय को विषय बनाकर आयोजित मेले की थीम का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहाकि ये दोनों राज्य भारत की विविधता में एकता का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, उत्तर प्रदेश में वस्त्र, धातु शिल्प और कढ़ाई में उत्कृष्ट शिल्प की विरासत झलकती है, वहीं मेघालय के स्वदेशी शिल्प सतत विकास, प्रकृति केसाथ सामंजस्य और सामुदायिक परंपराओं का उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो मिलकर 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मूर्तरूप देते हैं।
उपराष्ट्रपति ने इसवर्ष के मेले के साझेदार देश मिस्र का हार्दिक स्वागत किया और कहाकि मिस्र की प्राचीन सभ्यता, कलात्मक परंपराएं और सांस्कृतिक गहराई भारत की ऐतिहासिक यात्रा से गहराई से मेल खाती हैं। उन्होंने इससे पहले मिस्र के पवेलियन का दौरा किया और देश की समृद्ध परंपराओं और कलात्मक उत्कृष्टता की सराहना करते हुए जन-जन संबंधों को मजबूत करने में सांस्कृतिक कूटनीति की भूमिका पर बल दिया। उपराष्ट्रपति ने कहाकि आत्मनिर्भर भारत पर फोकस इस कार्यक्रम को औरभी गहरा अर्थ देता है, क्योंकि कारीगर सदियों पुराने ज्ञान और परंपराओं के संरक्षक हैं। उन्होंने कहाकि उन्हें सशक्त बनाना एक समावेशी, टिकाऊ और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने केलिए ज़रूरी है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना जैसी पहल कौशल विकास, बाज़ार तक पहुंच और आर्थिक सहायता के ज़रिए हस्तशिल्प इकोसिस्टम को मज़बूत कर रही हैं।
उपराष्ट्रपति ने 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' विषय पर प्रस्तुत जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना की, इनमें भारत की बहुलतावादी भावना और सांस्कृतिक सद्भाव को दर्शाया गया। उन्होंने मेले से संबंधित जानकारी को सुगम बनाने और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से 'मेला साथी' मोबाइल ऐप भी लॉंच किया। उपराष्ट्रपति ने सूरजकुंड मेला प्राधिकरण, पर्यटन मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और हरियाणा सरकार की मेले के सफल आयोजन के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने आगंतुकों से शिल्पकारों को सीधे सहयोग देने और भारत की जीवंत विरासत को आगे बढ़ाने का आग्रह किया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय सहकारिता राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा के मंत्री डॉ अरविंद कुमार शर्मा, विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम, मिस्र के राजदूत कामेल जायद गलाल, हरियाणा विधानसभा के सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।