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स्वदेशी एडवांस्ड जहाज तारागिरी नौसेना को सुपुर्द

आत्मनिर्भर युद्धपोत डिजाइन निर्माण इंजीनियरिंग में एक बड़ी उपलब्धि

प्रोजेक्ट 17ए का यह चौथा और एमडीएल का निर्मित तीसरा जहाज है

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 29 November 2025 02:19:49 PM

indigenous advanced yard taragiri handed over to navy

मुंबई। स्वदेशी एडवांस्ड नीलगिरि श्रेणी (प्रोजेक्ट 17ए) का चौथा और मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड का निर्मित तीसरा जहाज तारागिरि (यार्ड 12653) एमडीएल मुंबई में भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया है। इसीके साथ युद्धपोत डिजाइन और निर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशामें एक और उपलब्धि जुड़ गई है। गौरतलब हैकि प्रोजेक्ट 17ए के फ्रिगेट बहुमुखी बहुमिशन प्लेटफॉर्म हैं, जिन्हें समुद्री क्षेत्र में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का समाधान करने केलिए डिज़ाइन किया गया है। तारागिरी पूर्व आईएनएस तारागिरी का एक नया रूप है, जो एक लिएंडर श्रेणी का युद्धपोत था और 16 मई 1980 से 27 जून 2013 तक भारतीय नौसेना के बेड़े का हिस्सा रहा और इसने राष्ट्र को 33 वर्ष की शानदार सेवा प्रदान की। यह अत्याधुनिक युद्धपोत नौसेना के डिज़ाइन, स्टेल्थ, मारक क्षमता, स्वचालन और उत्तरजीविता में एक बड़ी छलांग को दर्शाता है और युद्धपोत निर्माण में आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो के डिज़ाइन और युद्धपोत निरीक्षण दल मुंबई की देखरेख में निर्मित पी17ए फ्रिगेट स्वदेशी जहाज़ डिज़ाइन, स्टेल्थ, उत्तरजीविता और युद्ध क्षमता में एक पीढ़ीगत छलांग को दर्शाते हैं। एकीकृत निर्माण के दर्शन से प्रेरित होकर इस जहाज़ का निर्माण और वितरण निर्धारित समयसीमा में किया गया। प्रोजेक्ट 17ए जहाज़ों में प्रोजेक्ट 17 (शिवालिक) श्रेणी की तुलना में उन्नत हथियार और सेंसर सूट लगे हैं। इन जहाजों में संयुक्त डीज़ल या गैस प्रणोदन संयंत्र लगे हैं, जिनमें एक डीज़ल इंजन और एक गैस टर्बाइन शामिल है, जो प्रत्येक शाफ्ट पर एक नियंत्रणीय पिच प्रोपेलर और अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली को चलाता है। शक्तिशाली हथियार और सेंसर सूट में ब्रह्मोस एसएसएम, एमएफएसटीएआर और एमआरएसएएम कॉम्प्लेक्स, 76 मिमी एसआरजीएम और 30 मिमी और 12.7 मिमी निकटरक्षा हथियार प्रणालियों का संयोजन साथही पनडुब्बीरोधी युद्ध केलिए रॉकेट और टॉरपीडो शामिल हैं।
तारागिरी इन 11 महीनों में भारतीय नौसेना को सौंपा जाने वाला चौथा प्रोजेक्ट 17ए जहाज है। पहले दो प्रोजेक्ट 17ए जहाजों के निर्माण से प्राप्त अनुभव के आधार पर तारागिरी के निर्माण की अवधि को घटाकर 81 महीने कर दिया गया है, जबकि प्रथम श्रेणी (नीलगिरी) के निर्माण में 93 महीने लगे थे। प्रोजेक्ट 17ए के शेष तीन जहाज (एक एमडीएल में और दो जीआरएसई में) अगस्त 2026 तक क्रमिक रूपसे वितरित किए जाने की योजना है। तारागिरी की डिलीवरी देश की डिज़ाइन, जहाज निर्माण और इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाती है और जहाज डिज़ाइन एवं जहाज निर्माण दोनों में आत्मनिर्भरता पर भारतीय नौसेना के निरंतर ध्यान को दर्शाती है। स्वदेशीकरण केसाथ इस परियोजना में 200 से अधिक एमएसएमई शामिल हैं और इसने लगभग 4000 कर्मियों को प्रत्यक्ष रूपसे और 10000 से अधिक कर्मियों को अप्रत्यक्ष रूपसे रोज़गार सृजन में सक्षम बनाया है।

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