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उदयगिरि और हिमगिरि ने नौसेना की ताकत बढ़ाई

युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो में डिज़ाइन हुए हैं 100वें और 101वें युद्धपोत

सुरक्षा से लेकर मानवीय सहायता करेंगे युद्धपोत-रक्षामंत्री राजनाथ

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Wednesday 27 August 2025 12:21:54 PM

udayagiri and himgiri increased the strength of the navy

विशाखापत्तनम। भारत के जहाज निर्माण कौशल और आत्मनिर्भरता के प्रमाण के रूपमें परियोजना 17ए के दो बहुमिशन स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में समारोहपूर्वक नौसेना बेस विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। ऐसा पहली बार हैकि जब दो अलग-अलग स्वदेशी फ्रंटलाइन सतह लड़ाकू जहाज शिपयार्ड मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड मुंबई के आईएनएस उदयगिरि और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड कोलकाता के आईएनएस हिमगिरि को एकसाथ कमीशन किया गया है। इस अवसर पर रक्षामंत्री ने विश्वास जतायाकि ये युद्धपोत न केवल सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत और समुद्री हितों की रक्षा करने का काम करेंगे, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में भी सहायता करेंगे। राजनाथ सिंह ने कहाकि इन युद्धपोतों का जलावतरण भारत की पड़ोसी पहले और महासागर नीति को बल प्रदान करता है। उन्होंने कहाकि ये युद्धपोत भारतीय नौसेना की क्षमता को बढ़ाएंगे और यह संदेश देंगेकि भारत अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा करने में पूरी तरह सक्षम है और किसीभी स्थिति का तुरंत जवाब देने केलिए तैयार है।
आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि प्रोजेक्ट 17 शिवालिक श्रेणी के उत्तराधिकारी वर्ग के प्रमुख जहाज आईएनएस नीलगिरि का अनुसरण करते हैं। इनमें बेहतर स्टेल्थ सुविधाएं, कम रडार सिग्नल, उन्नत निगरानी रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली, सतह से सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और रैपिड फायर गन सिस्टम शामिल हैं। युद्धपोतों में उच्चगति और बेहतर ईंधन दक्षता प्रदान करने वाली संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन संयंत्र और एक अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणाली है। भारत में निर्मित ये 100वें और 101वें युद्धपोत भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिज़ाइन ब्यूरो ने स्वयं डिज़ाइन किए हैं। ये स्वदेशी सामग्री और आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के नौसेना के निरंतर प्रयासों की एक और उपलब्धि है। उच्च स्वदेशी सामग्री 75 प्रतिशत से अधिक अनेक एमएसएमई की भागीदारी और भारतीय मूल उपकरण निर्माताओं से प्रमुख हथियारों और सेंसरों की खरीद के माध्यम से प्राप्त की गई है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने इस जलावतरण को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम और सरकार के विजन एवं प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहाकि आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि आत्मनिर्भरता के प्रति सरकार के दृढ़ संकल्प के ज्वलंत उदाहरण हैं, ये एक परिवर्तनकारी आंदोलन के प्रतीक हैं और इस दृष्टिकोण के प्रमाण हैंकि राष्ट्र सभी हितधारकों के सम्मिलित प्रयासों से नई ऊंचाइयों को छुएगा और आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। उन्होंने दोनों शक्तिशाली युद्धपोतों के निर्माण और वितरण में एमडीएल और जीआरएसई के बीच निर्बाध सहयोग की सराहना की। इस बहुमिशन फ्रिगेट में महत्वपूर्ण परिचालन क्षमताएं हैं, जिनसे नौसेना के समुद्री अभियानों की पूरी श्रृंखला में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की क्षमता और अधिक बढ़ेगी। ये अगली पीढ़ी के हथियारों, सेंसरों और एकीकृत प्लेटफ़ॉर्म प्रबंधन प्रणालियों से लैस हैं और वायुरोधी, सतहरोधी और पनडुब्बीरोधी युद्ध, समुद्री नियंत्रण और मानवीय अभियानों केलिए तैयार हैं। राजनाथ सिंह ने कहाकि आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि का जलावतरण न केवल नौसेना की युद्ध क्षमता को मज़बूत करेगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और वरीय सुरक्षा सहयोगी के रूपमें इसकी भूमिका को भी बढ़ाएगा।
रक्षामंत्री ने कहाकि समुद्री डकैती से निपटने से लेकर तस्करी और अवैध तस्करी के ख़िलाफ़ लड़ाई, समुद्री आतंकवाद पर अंकुश लगाने या प्राकृतिक आपदा के बाद राहत प्रदान करने तक ये युद्धपोत जटिल और जोखिम भरे अभियानों में निर्णायक साबित होंगे। रक्षामंत्री ने भारतीय नौसेना को देश की समुद्री शक्ति का प्रतीक बताया, क्योंकि यह अरब सागर से लेकर मध्य पूर्व और पूर्वी अफ्रीकी समुद्री तट तक की नौसेना गतिविधियों के बीच देश के हितों की रक्षा कर रही है। उन्होंने कहाकि भूरणनीतिक स्थिति ऐसी हैकि यह देश के आर्थिक विकास को सीधे प्रभावित करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कहाकि हमारी ऊर्जा आवश्यकताएं, तेल और प्राकृतिक गैस, काफी हदतक इस क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर करती हैं, भारतीय नौसेना हमारी राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के एक प्रमुख स्तंभ के रूपमें उभरी है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय नौसेना की त्वरित योजना और क्रियांवयन की सराहना करते हुए राजनाथ सिंह ने कहाकि दुश्मन को हमारी नौसेना की ताकत और क्षमता का एहसास है। रक्षामंत्री ने कहाकि भारत आक्रामकता की नीति में विश्वास नहीं करता, हम कभी किसी देश पर हमला नहीं करते और किसी को उकसाते नहीं हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं हैकि हम उन लोगों के सामने झुक जाएं, जो हमें नुकसान पहुंचाना चाहते हैं, जब हमारी सुरक्षा को खतरा होता है तो हम मुंहतोड़ जवाब देना जानते हैं, पहलगाम में हमने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से एक प्रभावी और सटीक जवाब दिया, हमने आतंकवादी ठिकानों को नष्टकर अपने लक्ष्य सफलतापूर्वक प्राप्त किए।
नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने इस बहुमिशन फ्रिगेट को भारत की समुद्री शक्ति की निरंतर प्रगति और गतिशील विस्तार का स्पष्ट प्रमाण बताया। उन्होंने अनिश्चितताओं और प्रतिस्पर्धा के युग में समुद्र से जबरदस्त ताकत से हमला करने की भारतीय नौसेना की क्षमता पर भी प्रकाश डाला और इसे देश के दुश्मनों के खिलाफ एक विश्वसनीय निवारक बताया। नौसेना प्रमुख ने कहाकि आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्‍तेमाल किया जाना रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है। एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि के कमांडिंग अधिकारियों और कमीशनिंग क्रू को बधाई दी। इस अवसर पर पूर्वी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ वाइस एडमिरल राजेश पेंढारकर, नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी और नौसेना के पूर्व सैनिक उपस्थित थे।

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