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व्‍यापारिक समुद्री गतिविधियां सुविधाजनक

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Wednesday 18 September 2013 08:39:31 AM

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नई दिल्‍ली। नौवहन मंत्रालय ने समुद्री द्वीपों और तट के किनारे व्‍यापारिक समुद्री मार्गों पर व्‍यापार को सुविधाजनक बनाने के लिए निर्देश जारी किए हैं। नौवहन महानिदेशालय ने समुद्री क्षेत्र अधिनियम के तहत 'द्वीपीय जल' के अनुरूप स्‍पष्‍टीकर के अनुसार बेसलाइन पर जल की आवक पर आदेश जारी किया। इस आदेश में है कि इस बेसलाइन के साथ उन पोतों का इस्‍तेमाल किया जा सकता है, जिनकी अनुमति केवल नदी और अन्‍य द्वीप पर ही थी, इससे देशभर और तट सीमा पर वस्‍तुओं के यातायात और व्‍यापार में अच्‍छा योगदान अपेक्षित किया जा रहा है।
संशोधित द्वीप पोत अधिनियम, 1917 और व्‍यापारिक नौवहन अधिनियम का अनुभाग 3(41) इस प्रकार की कार्रवाई की अनुमति देता है। ये पोत उन क्षेत्रों में होंगे, जहां दो मीटर से अधिक लहरें न हों और जल शांत हो। आदेश में कहा गया है कि जो तटीय राज्‍य द्वीपीय जल में बेस लाइन से परे का विस्‍तार चाहते हैं, वे समुद्र विज्ञान संस्‍थान के संबंधित विश्लेषण देखें। जिन तटीय राज्‍यों के पास समुद्री बोर्ड के प्रत्‍यायुक्‍त हैं वो भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍युएआई) के प्रस्‍तावित पोत की सुरक्षा संबंधी पंजीकरण व नियंत्रण पहलुओं को देख सकते हैं। जिन राज्‍यों के समुद्री बोर्ड नहीं हैं, वे सीधे नौवहन निदेशालय से पोत के पंजीकरण व नियंत्रण पहलुओं की जांच करा सकते हैं।
नौवहन महानिदेशालय ने इस साल अगस्‍त में व्‍यापार के संबंध में सभी पोतों के लिए नदी-समुद्री पोत स्‍पष्‍टीकरण जारी किया था। बाहरी मामलों के मंत्रालय ने समुद्री क्षेत्र अधिनियम के तहत पहले ही लक्षद्वीप और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में 'आंतरिक जल' सहित भारतीय बेसलाइन को स्‍पष्‍ट किया था। भारतीय अंतरदेशीय जलमार्ग प्राधिकरण (आईडब्‍ल्‍युएआई) और नौवहन महानिदेशालय की प्रस्‍तावित सुरक्षा शर्तों के अधीन होने से यह 'आंतरिक जल' अब 'द्वीपीय जल' हो गया है।

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