बिहार की जनता ने जंगलराज की जगह विकास का रास्ता चुना-मोदी
समाचार पत्र समूह इंडियन एक्सप्रेस का रामनाथ गोयनका व्याख्यानस्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम
Tuesday 18 November 2025 03:17:09 PM
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के प्रतिष्ठित समाचार पत्र समूह इंडियन एक्सप्रेस के छठे रामनाथ गोयनका व्याख्यान में रामनाथ गोयनका को भारत में लोकतंत्र, पत्रकारिता, अभिव्यक्ति और जन आंदोलनों की शक्ति को बढ़ाने वाला बताया है। उन्होंने कहाकि एक दूरदर्शी, संस्था निर्माता, राष्ट्रवादी और मीडिया लीडर के रूपमें रामनाथ गोयनका ने इंडियन एक्सप्रेस समूह को न केवल एक समाचार पत्र के रूपमें, बल्कि भारत के लोगों केबीच एक मिशन के रूपमें स्थापित किया है। प्रधानमंत्री ने कहाकि रामनाथ गोयनका के नेतृत्व में यह समाचार पत्र समूह भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों की आवाज़ बन गया। उन्होंने कहाकि 21वीं सदी में भारत के विकसित संकल्प में रामनाथ गोयनका की प्रतिबद्धता, प्रासंगिकता और प्रयास, दूरदर्शिता एवं प्रेरणाएं शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने इस व्याख्यान में आमंत्रित करने केलिए इंडियन एक्सप्रेस समूह का आभार व्यक्त किया।
रामनाथ गोयनका के भगवद् गीता के एक श्लोक से गहरी प्रेरणा प्राप्त करने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि सुख-दुःख, लाभ-हानि, जय-पराजय को समभाव समझते हुए अपना कर्तव्य निभाने की शिक्षा रामनाथजी के जीवन और कार्य में गहराई से समाहित थी। नरेंद्र मोदी ने कहाकि रामनाथ गोयनका ने जीवनभर कर्तव्य को सर्वोपरि रखा। उन्होंने कहाकि रामनाथ गोयनका ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का समर्थन किया, बाद में जनता पार्टी का समर्थन किया और जनसंघ के टिकट पर चुनाव भी लड़ा। विचारधारा से परे उन्होंने हमेशा राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता दी। प्रधानमंत्री ने कहाकि जिन लोगों ने वर्षों तक रामनाथजी केसाथ काम किया है, वे अक्सर उनके किस्से सुनाते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद जब हैदराबाद में रजाकारों का अत्याचार का मुद्दा उठा तो रामनाथजी ने सरदार पटेल की सहायता की, वर्ष 1970 के दशक में जब बिहार में छात्र आंदोलन को नेतृत्व की आवश्यकता थी, तब रामनाथ गोयनका ने नानाजी देशमुख केसाथ मिलकर जयप्रकाश नारायण को आंदोलन का नेतृत्व करने केलिए राजी किया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि आपातकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री के एक करीबी मंत्री ने जब रामनाथजी को बुलाकर कारावास की धमकी दी, तो उनकी साहसिक प्रतिक्रिया इतिहास के गुप्त अभिलेखों का हिस्सा बन गई थी। प्रधानमंत्री ने कहाकि चाहे उनके सामने कितनी भी बड़ी ताकत रही हो, फिरभी सभी रामनाथजी की सत्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और कर्तव्य केप्रति उनकी अडिग निष्ठा को दर्शाते हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि रामनाथ गोयनका को अक्सर नकारात्मक अर्थ में नहीं, बल्कि सकारात्मक अर्थ में अधीर कहा जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यही अधीरता बदलाव केलिए सर्वोच्चस्तर के प्रयासों को प्रेरित करती है, यही अधीरता स्थिर जल को भी गति प्रदान करती है। उन्होंने कहाकि एक समानता स्थापित करते हुए आज का भारत भी अधीर है, विकसित और आत्मनिर्भर बनने केलिए। उन्होंने कहाकि 21वीं सदी के पहले पच्चीस साल तेजी से बीत गए, एक केबाद एक चुनौतियां आईं, फिरभी कोई भी भारत की गति को रोक नहीं सका।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले चार-पांच वर्ष को वैश्विक चुनौतियों से भरा बताया और कहाकि इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था ने ऊंची विकास दर हासिल करके लचीलेपन का प्रदर्शन किया। नरेंद्र मोदी ने कहाकि 2022 में यूरोपीय संकट ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा बाजारों को प्रभावित किया, जिसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ा, मगर भारत की आर्थिक वृद्धि 2022-23 तक मजबूती से जारी रही, वर्ष 2023 में पश्चिम एशिया में हालात बिगड़ने के बावजूद भारत की विकास दर मजबूत बनी रही, इसवर्ष भी वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत की विकास दर सात प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। प्रधानमंत्री ने कहाकि ऐसे समय में जब दुनिया व्यवधानों से भयभीत है, तब भारत पूरे आत्मविश्वास से उज्ज्वल भविष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहाकि भारत न केवल एक उभरता हुआ बाज़ार है, बल्कि एक उभरता हुआ मॉडल भी है और दुनिया भारतीय विकास मॉडल को आशा के मॉडल के रूपमें देख रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि लोकतंत्र में लोगों का विश्वास और आशावाद चुनाव के दौरान सबसे ज्यादा दिखाई देता है, बीते 14 नवंबर को घोषित बिहार विधानसभा के चुनाव परिणाम ऐतिहासिक थे और एक महत्वपूर्ण पहलू उभरकर आया कि कोईभी लोकतंत्र अपने नागरिकों की बढ़ती भागीदारी को नज़रअंदाज नहीं कर सकता। उन्होंने कहाकि बिहार में इतिहास में इसबार सबसे ज्यादा मतदान हुआ, जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से लगभग नौ प्रतिशत ज्यादा रहा, यहभी लोकतंत्र की जीत है। प्रधानमंत्री ने कहाकि बिहार के नतीजे भारत के लोगों की ऊंची आकांक्षाओं को दर्शाते हैं, आज नागरिक उन राजनीतिक दलों पर भरोसा करते हैं, जो उन आकांक्षाओं को पूरा करने केलिए ईमानदारी से काम करते हैं। प्रधानमंत्री ने हर राज्य सरकार से बिहार के नतीजों से सीख लेने का आग्रह किया और कहाकि यह जनादेश आने वाले वर्षों में राजनीतिक दलों का भविष्य तय करेगा। उन्होंने बतायाकि बिहार की जनता ने विपक्ष को 15 साल दिए थे, जबकि उनके पास राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर था और उन्होंने जंगल राज का रास्ता चुना। नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकारों से बेहतर निवेश वातावरण बनाने और विकास के मानकों को आगे बढ़ाने में प्रतिस्पर्धा का आह्वान किया।
नरेंद्र मोदी ने कहाकि बिहार चुनाव में जीत केबाद कुछ लोगों, जिनमें उनके प्रति सहानुभूति रखने वाले कुछ मीडियाकर्मी भी शामिल हैंने एकबार फिर दावा किया हैकि उनकी पार्टी और वह खुद चौबीस घंटे चुनावी मोड में रहते हैं। उन्होंने इसके जवाब में कहाकि चुनाव जीतने केलिए चुनावी मोड में रहने की जरूरत नहीं, बल्कि चौबीस घंटे काम मोड में रहने की जरूरत होती है। उन्होंने कहाकि जब एक मिनट भी बर्बाद न करने, गरीबों की मुश्किलें कम करने, रोज़गार उपलब्ध कराने, स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने और मध्यम वर्ग की आकांक्षाओं को पूरा करने की आंतरिक बेचैनी हो तो निरंतर कड़ी मेहनत प्रेरक शक्ति बन जाती है। प्रधानमंत्री ने कहाकि जब इसी भावना और प्रतिबद्धता केसाथ शासन चलाया जाता है तो चुनाव के दिन ऐसे ही परिणाम दिखाई देते हैं जैसेकि हालही में बिहार में देखने को मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर अपनी बात जारी रखते हुए कहाकि यह भ्रष्टाचार और विघटन की राजनीति करने वालों को बड़ा सबक है।
रामनाथ गोयनका को विदिशा से जनसंघ का टिकट मिलने का एक किस्सा नरेंद्र मोदी ने सुनाया। उन्होंने कहाकि रामनाथजी और नानाजी देशमुख केबीच इसबात पर चर्चा हुई थीकि संगठन ज्यादा महत्वपूर्ण है या चेहरा? नानाजी देशमुख ने रामनाथजी से कहाकि उन्हें बस नामांकन दाखिल करने और बाद में विजय प्रमाण पत्र लेने आना है, इसके बाद नानाजी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के माध्यम से प्रचार अभियान का नेतृत्व किया और रामनाथजी की जीत सुनिश्चित की। नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कियाकि इस कहानी को साझा करने का उनका उद्देश्य यह नहीं हैकि उम्मीदवारों को केवल नामांकन दाखिल करना चाहिए, बल्कि पार्टी के अनगिनत कार्यकर्ताओं के समर्पण को उजागर करना है। उन्होंने कहाकि लाखों कार्यकर्ताओं ने अपने पसीने से पार्टी की जड़ों को सींचा है और सींच रहे हैं। उन्होंने कहाकि केरल, पश्चिम बंगाल और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यों में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पार्टी केलिए अपना खून तक बहा रहे हैं। नरेंद्र मोदी ने कहाकि ऐसे समर्पित कार्यकर्ताओं वाली पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि निरंतर सेवा से लोगों का दिल जीतना होता है। प्रधानमंत्री ने कहाकि जब सरकारी योजनाएं दलितों, उत्पीड़ितों, शोषितों और वंचितों तक पहुंचती हैं तो सच्चा सामाजिक न्याय सुनिश्चित होता है, जबकि पिछले दशक में सामाजिक न्याय की आड़ में कुछ दलों और परिवारों ने अपने स्वार्थ पूरे किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संतोष व्यक्त कियाकि आज देश सामाजिक न्याय को वास्तविकता में बदलते देख रहा है। उन्होंने सच्चे सामाजिक न्याय के अर्थ को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहाकि जब कोई सरकार प्रत्येक लाभार्थी तक पहुंचने के लक्ष्य से काम करती है तो वह भेदभाव की किसी भी गुंजाइश को समाप्त कर देती है, ऐसे प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले 11 वर्ष में 25 करोड़ लोग गरीबी से उबर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि जैसे-जैसे भारत एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में एक नई यात्रा पर अग्रसर हो रहा है, रामनाथ गोयनका की विरासत और भी प्रासंगिक होती जा रही है। उन्होंने याद दिलायाकि कैसे रामनाथजी ने ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन का कड़ा विरोध किया था, प्रधानमंत्री ने उनके संपादकीय कथन का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने लिखा थाकि मैं ब्रिटिश आदेशों का पालन करने के बजाय अखबार बंदकर देना ज्यादा पसंद करूंगा। नरेंद्र मोदी ने कहाकि आपातकाल में जब देश को गुलाम बनाने का एक और प्रयास किया गया तो रामनाथजी एकबार फिर अडिग रहे। प्रधानमंत्री ने कहाकि इसवर्ष आपातकाल के पचास वर्ष पूरे हो रहे हैं और इंडियन एक्सप्रेस ने तब यह दिखा दिया थाकि कोरे संपादकीय भी उस मानसिकता को चुनौती दे सकते हैं, जो लोगों को गुलाम बनाने की कोशिश करती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहाकि कोई राष्ट्र तब स्वयं का सम्मान करने में विफल रहता है जब वह अपने स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र को अस्वीकार कर देता है। उन्होंने कहाकि भारत की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति स्थानीय भाषाओं में शिक्षा पर विशेष जोर देती है। उन्होंने कहाकि सरकार अंग्रेजी भाषा के विरोध में नहीं है, बल्कि भारतीय भाषाओं का दृढ़ता से समर्थन करती है। प्रधानमंत्री ने इंडियन एक्सप्रेस समूह को देश के हर परिवर्तन और विकास की कहानी का साक्षी बताया। उन्होंने भारत के विकास में इंडियन एक्सप्रेस समूह की निरंतर भागीदारी की सराहना की। उन्होंने अपना भाषण समाप्त करते हुए रामनाथ गोयनका के आदर्शों को संरक्षित करने में उनके समर्पित प्रयासों केलिए इंडियन एक्सप्रेस टीम को बधाई और शुभकामनाएं दीं।