दिल्ली हरियाणा और महाराष्ट्र के बाद अब बिहार राज्य भी स्वीप
बिहार में मोदी, नीतीश के नाम पर एनडीए को ऐतिहासिक कामयाबीTuesday 11 November 2025 10:33:16 PM
दिनेश शर्मा
नई दिल्ली/ पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में बिहार की जनता ने एनडीए को विधायकों से मालामाल कर दिया है। एग्जिट पोल में स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम का विश्लेषण हैकि एनडीए ने दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र केबाद बिहार विधानसभा चुनाव में भी जबरदस्त स्वीप किया है। बिहार में मतदान के ऐन वक्त पर जबरदस्त ध्रुवीकरण भी हुआ है, जिसमें एनडीए ने दोहरा शतक जमा लिया है। यानी इसबार बिहार में भारी बहुमत से एनडीए की सरकार बनने जा रही है। कहना न होगाकि एनडीए को यह भारी सफलता भारतीय जनता पार्टी के बूते मिलने जा रही है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘प्रधान चेहरा’ हैं। मीडिया अलग-अलग दृष्टिकोण से अलग-अलग कयास लगा रहा था, मगर बिहार की जनता ने एनडीए केसाथ जाकर सारे कयासों को मिट्टी में मिला दिया है। बिहार में एनडीए की लगभग 175 से 200 विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दिख रही है। महिलाशक्ति, सर्वण, ओबीसी, दलित और जनसामान्य ने बिहार में एनडीए को अपनी पहली पसंद बनाया है। महागठबंधन आरजेडी की बिहार को लुभाने की रणनीतियां एक केबाद एक ध्वस्त होती गई हैं। मंडल और कमंडल एकतरफा रहे हैं।
बिहार विधानसभा चुनाव में भी विकास का मुद्दा ज्यादा नहीं चल पाया। सारा चुनाव छिछले आरोपों, गालीगलौज, हत्या और गंभीर नोकझोक में तय हुआ है। प्रशांत किशोर (पीके) की जिस जनसुराज पार्टी को चुनाव विश्लेषक बहुत गेमचेंजर बता रहे थे, बिहार ने उसे एकभी सीट नहीं दी है। बिहार में एनडीए की प्रमुख सहयोगी भाजपा और जदयू का महागठबंधन की प्रमुख सहयोगी आरजेडी और कांग्रेस से मुकाबला था। दिग्गज चुनाव विश्लेषक और सर्वेक्षण एजेंसियां एनडीए को मजबूत तो दिखाती रही हैं, लेकिन उनके आंकलनों में किसी एक गठबंधन को बहुमत के मुद्दे पर भारी उतार चढ़ाव भी मिल रहे थे। यहभी कहा जारहा थाकि इसबार जनता बदलाव चाहती है, इसलिए सरकार में तेजस्वी यादव आ रहे हैं, लेकिन बिहार के जनसामान्य का रुख भाजपा और जनता दल यू (जदयू) के सहयोगियों के पक्ष में बढ़त बनाते दिख रहा था। यही ट्रेंड लगातार सोशल मीडिया पर भी चला आ रहा था। सोशल मीडिया ने जैसे बिहार में एनडीए का खूंटा ही गाड़ दिया था, जिसे कोई नहीं हिला पाया और 14 नवंबर 2025 को फिर स्पष्ट हो जाएगा।
तेजस्वी यादव की बिहार पर राज करने की तमन्ना इसबार भी अधूरी दिख रही है। एनडीए को मिलता यह जनादेश इसबार बिहार की आगे की राजनीतिक दशा और दिशा तय करेगा और राज्यों के भावी चुनाव भी इससे प्रभावित होंगे। इंडी गठबंधन लगातार अपनी प्रासंगिकता खोता जा रहा है। बिहार में 243 विधानसभा सीट हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यहां भाजपा-जदयू एवं उनके सहयोगी दल सत्ता में हैं। इंडी गठबंधन के प्रमुख नेता लालू यादव, तेजस्वी यादव और कांग्रेस नेता राहुल गांधी का विश्वास और प्रचार वाईएम गठजोड़ पर केंद्रित था। इससे पता चलता हैकि चुनाव में जबरदस्त ध्रुवीकरण हुआ है, मगर इसका लाभ एनडीए को मिला है। एनडीए ने बड़ी रणनीति से यह चुनाव लड़ा, जिसमें उसने अपने विकास के मुद्दे को सबसे आगे रखा। एनडीए ने बिहार की जनता से वही वादे किए, जिन्हें वह पूरा कर सकता है, इनपर बिहार की जनता में भरोसा दिखाई दिया, जबकि इंडी अलायंस और उसके मुख्यमंत्री चेहरा तेजस्वी यादव ने जो चुनाव में वादे किए, उनपर बिहार की जनता को भरोसा नहीं हुआ।
लालू प्रसाद यादव परिवार जंगलराज, अपराध और भ्रष्टाचार के टैग से भी मुक्त नहीं हो पाया है। तेजस्वी यादव केलिए यह एक बड़ी राजनीतिक त्रासदी है, जो उसके राजयोग पर भारी है। जहां तक कांग्रेस नेता राहुल गांधी का सवाल है तो उनका भी एसआईआर मुद्दा फ्लाप गया है और वे भी लगातार राजनीतिक विफलताओं का सामना कर रहे हैं। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी यहां इंडी अलायंस के काम नहीं आ पाए हैं। चुनाव में इस मुद्दे ने लोगों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया हैकि बिहार में डबल इंजन सरकार है, विकास होगा, जबकि तेजस्वी की सरकार बनाकर बिहार जंगलराज में बदल जाएगा, आरजेडी एक ही परिवार की पार्टी है, जो केवल विघटन की राजनीति कर रही है, जबकि नीतीश कुमार बिहार और एनडीए के बड़े नेता हैं। हमारा यह चुनाव विश्लेषण सामाजिक, राजनीतिक, मतदाताओं, जनसामान्य से लगातार बातचीत और सोशल मीडिया, प्रिंट और टीवी मीडिया के आकलन पर आधारित है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एनडीए के प्रमुख स्टार प्रचारक थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान बिहार चुनाव के प्रभारी और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल एवं उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य उपप्रभारी थे।