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Saturday 30 August 2025 05:37:10 PM
नई दिल्ली। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा हैकि आतंकवाद, महामारियों और क्षेत्रीय संघर्षों के युग में रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता केवल एक विकल्प नहीं है, बल्कि अस्तित्व और प्रगति केलिए एक अनिवार्य स्थिति है। उन्होंने कहाकि यह संरक्षणवाद के बारेमें नहीं है, बल्कि संप्रभुता और राष्ट्रीय स्वायत्तता के बारेमें है। रक्षामंत्री आज नई दिल्ली में '21वीं सदी में युद्ध' विषय पर रक्षा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहाकि यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जब भारत के सशस्त्रबलों ने कुछ महीने पहले ही ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से वीरता का प्रदर्शन किया था, जबकि इसी दौरान संघर्ष व्यापार युद्ध और अस्थिरता वैश्विक परिदृश्य को आकार दे रहे हैं। राजनाथ सिंह ने उल्लेख कियाकि भूराजनीतिक बदलावों ने देश को दिखाया हैकि रक्षा क्षेत्रमें दूसरों पर निर्भरता अब कोई विकल्प नहीं है और नरेंद्र मोदी सरकार का हमेशा से मानना हैकि एक आत्मनिर्भर भारत ही अपनी सामरिक स्वायत्तता की रक्षा कर सकता है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि कई विकसित देश संरक्षणवादी उपायों का सहारा ले रहे हैं, जिससे व्यापार और आयात शुल्क क्षेत्र की स्थितियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। उन्होंने कहाकि रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता को अलगाव समझने की भूल नहीं करनी चाहिए, यह संरक्षणवाद नहीं है, यह संप्रभुता का मामला है। उन्होंने कहाकि जब युवा, ऊर्जा, तकनीक और संभावनाओं से भरपूर कोई देश आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है तो दुनिया रुककर इसपर ध्यान देती है, यही वह ताकत है, जो भारत को वैश्विक दबावों का सामना करने तथा और मज़बूती से उभरने में सक्षम बनाती है। राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत की बढ़ती स्वदेशी रक्षा क्षमताओं का एक शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने कहाकि स्वदेशी उपकरणों का उपयोगकर सशस्त्र बलों के लक्ष्यों पर किए गए सटीक हमलों ने यह प्रदर्शित किया हैकि दूरदर्शिता, दीर्घकालिक तैयारी और समन्वय के बिना कोईभी मिशन सफल नहीं हो सकता। उन्होंने कहाकि ऑपरेशन सिंदूर भलेही कुछ दिन के युद्ध, भारत की जीत और पाकिस्तान की हार की कहानी प्रतीत हो, लेकिन इसके पीछे वर्षों की रणनीतिक योजना और रक्षा तैयारियों की एक लंबी भूमिका रही है।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहाकि भारतीय सेनाओं ने वर्षों की कड़ी मेहनत और स्वदेशी उपकरणों पर निर्भरता के माध्यम से इस ऑपरेशन को प्रभावी और निर्णायक रूपसे अंजाम दिया। रक्षामंत्री ने सुदर्शन चक्र मिशन को भारत की भविष्य की सुरक्षा केलिए एक क्रांतिकारी पहल बताया और कहाकि मिशन का लक्ष्य अगले दशक में देशभर के महत्वपूर्ण स्थानों को रक्षात्मक और आक्रामक दोनों तकनीकों का उपयोग करके पूर्ण हवाई सुरक्षा प्रदान करना है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभव का हवाला देते हुए उन्होंने आधुनिक युद्ध में वायुरक्षा के बढ़ते महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहाकि डीआरडीओ ने 23 अगस्त को एक स्वदेशी एकीकृत वायुरक्षा हथियार प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण किया, इसने एकसाथ तीन लक्ष्यों को भेदा। उन्होंने विश्वास व्यक्त कियाकि यद्यपि इसके पूर्ण कार्यांवयन में समय लगेगा, लेकिन रक्षा मंत्रालय इस दिशा में पहले ही निर्णायक रूपसे आगे बढ़ चुका है। राजनाथ सिंह ने कहाकि हमारे सभी युद्धपोत अब भारत में ही बन रहे हैं, उन्नत हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों से लैस स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि का हालही में जलावतरण हमारी नौसेना के विदेश से कोईभी युद्धपोत न खरीदने के संकल्प को दर्शाता है, ये जहाज विश्वस्तरीय हैं और हिंद महासागर क्षेत्रमें भारत की ताकत बढ़ाएंगे।
रक्षामंत्री ने घोषणा कीकि भारत सरकार ने एक शक्तिशाली स्वदेशी एयरो इंजन के विकास और निर्माण की चुनौती स्वीकार की है, यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां भारत को लंबे समय से सीमित सफलता मिली है। उन्होंने बतायाकि इस महत्वपूर्ण परियोजना की तैयारियां अब लगभग पूरी हो चुकी हैं और जल्दही जमीनी स्तरपर काम दिखाई देने लगेगा। उन्होंने कहाकि पहले सवाल यह थाकि क्या भारत इतनी उन्नत प्रणालियां बना सकता है, लेकिन आज सवाल यह हैकि इन्हें कितनी जल्दी तैनात किया जा सकता है। राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारों के निर्माण को स्वदेशीकरण और नवाचार की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहाकि इन गलियारों ने पहले ही सकारात्मक परिणाम देने शुरू कर दिए हैं और अन्य राज्यों में भी इनका विस्तार किए जाने की संभावना है। उन्होंने कहाकि रक्षा विनिर्माण और नवाचार समूहों को बढ़ावा देकर, ये गलियारे विकास के इंजन बनेंगे और रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को मज़बूत करेंगे। रक्षामंत्री ने आयातक से निर्यातक बनने के भारत के परिवर्तन का उल्लेख करते हुए कहाकि रक्षा निर्यात 2014 के 700 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में लगभग 24000 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहाकि भारत अब केवल खरीदार नहीं, बल्कि निर्यातक है, यह सफलता केवल सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के कारण ही नहीं, बल्कि निजी उद्योग, स्टार्टअप और उद्यमियों के योगदान के कारण भी है।
राजनाथ सिंह ने रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने में सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों का उल्लेख करते हुए कहाकि इन सूचियों के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया हैकि 5500 से अधिक वस्तुओं का अब आयात नहीं किया जाएगा, बल्कि एक निश्चित समयसीमा के भीतर भारत मेंही उनका निर्माण किया जाएगा। उन्होंने बतायाकि 3000 से अधिक ऐसी वस्तुएं, जो पहले विदेशों से मंगाई जाती थीं, अब स्वदेशी रूपसे उत्पादित की जा रही हैं। रक्षामंत्री ने रक्षा की आर्थिक भूमिका पर कहाकि यह क्षेत्र विकास का एक स्तंभ बन गया है, घरेलू रक्षा उत्पादन 1.5 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया है, जिसमें 25 प्रतिशत निजी क्षेत्र का योगदान है। उन्होंने कहाकि रक्षा केवल व्यय नहीं है, बल्कि रक्षा अर्थशास्त्र है, जो रोज़गार, नवाचार और औद्योगिक विकास का वाहक है, आईटी या ऑटोमोबाइल की तरह रक्षा क्षेत्रभी आज विकास को गति प्रदान कर रहा है। उन्होंने बतायाकि लाखों लोग प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूपसे विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास और संबद्ध गतिविधियों में लगे हुए हैं। रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा देने केलिए सुधारों का ज्रिक करते हुए उन्होंने कहाकि सरकार ने महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव किए हैं, रक्षा लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 74 प्रतिशत कर दी गई है और निजी क्षेत्रकी अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने केलिए मेक इन इंडिया प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया गया है।
रक्षामंत्री ने कहाकि रक्षा नवाचार में आईडीएक्स योजना ने क्रांति ला दी है, आज स्टार्टअप और इनोवेटर्स ऐसे समाधान प्रदान कर रहे हैं, जिनके लिए पहले हम दूसरों पर निर्भर थे, हम युवाओं से कह रहे हैं, अपना नवाचार दिखाएं और जहांभी आवश्यकता होगी, सरकार आपके साथ खड़ी रहेगी। रक्षामंत्री ने कहाकि भारत किसी से दुश्मनी नहीं चाहता, लेकिन अपने हितों से समझौता भी नहीं करेगा, हमारे लोगों किसानों छोटे व्यवसायों और आम नागरिकों का कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है, दुनिया जितना दबाव डालेगी, भारत उतना ही मज़बूत होकर उभरेगा। रक्षामंत्री ने कहाकि दुनिया ने आतंकवाद और कोविड-19 महामारी से यूक्रेन, मध्य पूर्व और अफ्रीका में संघर्षों तक कई विनाशकारी चुनौतियों का सामना किया है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष विज्ञान जैसी प्रौद्योगिकियां जीवन और सुरक्षा को नए सिरे से परिभाषित कर रही हैं। उन्होंने कहाकि यह सदी शायद सबसे अस्थिर और चुनौतीपूर्ण है, ऐसे विश्व में भारत का एकमात्र स्थायी मार्ग आत्मनिर्भरता है। उन्होंने आयुध निर्माणी बोर्ड के निगमीकरण का उल्लेख किया, जो पुनर्गठन केबाद अधिक लाभ कमा रही हैं। उन्होंने रक्षा क्षेत्रमें क्रांतिकारी बदलाव लाने का श्रेय मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहल को दिया। उन्होंने कहाकि पुरानी व्यवस्थाओं से चिपके रहकर हम नए भारत की आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर सकते थे, इसीलिए हमने सेनाओं का पुनर्गठन किया और महिलाओं को युद्ध में शामिल करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया, महिला अधिकारी लड़ाकू विमान उड़ा रही हैं, जहाजों का संचालन कर रही हैं और सबसे कठिन इलाकों में हमारी सीमाओं की रक्षा कर रही हैं।
रक्षामंत्री ने कहाकि विमानवाहक पोतों और लड़ाकू विमानों से ड्रोन, रडार और मिसाइल प्रणालियों तक स्वदेशी तकनीकी प्रगति ने 1998 के पोखरण केबाद लगाए गए प्रतिबंधों को पारकर लिया है। उन्होंने कहाकि दुनिया जानती हैकि भारत मिनटों में अपने विरोधियों को निर्णायक रूपसे परास्त करने की क्षमता रखता है, ये उपलब्धियां हमारी तकनीकी और औद्योगिक शक्ति का प्रमाण हैं। उन्होंने मीडिया से युद्ध के समय संवेदनशीलता का परिचय देने का आह्वान किया। उन्होंने आगाह करते हुए कहाकि एक छोटी सी रिपोर्ट लाखों लोगों का मनोबल बढ़ा सकती है, लेकिन एक गलती जान ले सकती है, संघर्ष में स्वतंत्रता और ज़िम्मेदारी साथ-साथ चलनी चाहिए, मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रहरी भी बनता है। रक्षामंत्री ने कहाकि रक्षा क्षेत्रमें आत्मनिर्भर भारत एक नारा नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा, संप्रभुता और प्रगति का रोडमैप है, आनेवाले वर्ष में भारत न केवल अपनी ज़रूरतें पूरी करेगा, बल्कि दुनिया का एक विश्वसनीय साझेदार भी बनेगा। उन्होंने कहाकि यह विज़न भारत को 21वीं सदी में एक निर्णायक शक्ति के रूप में स्थापित करेगा। इस अवसर पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और वरिष्ठ सैन्याधिकारी भी उपस्थित थे।