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भारत कहानियों की सभ्यता-सुरेश गोपी

फिल्म पर्यटन रणनीतिक रूपसे डिज़ाइन किया जाना चाहिए

मुंबई में पीएचडी चैंबर एंड इंडस्ट्री का फिल्म पर्यटन सम्मेलन

स्वतंत्र आवाज़ डॉट कॉम

Saturday 14 February 2026 02:54:53 PM

phd chamber & industry's film tourism summit in mumbai

मुंबई। भारत के गंतव्य ब्रांडिंग और आर्थिक विकास रणनीति का फिल्म पर्यटन एक मुख्य स्तंभ बनकर उभरा है, वरिष्ठ नीति निर्माताओं और उद्योगजगत के प्रतिनिधियों ने मुंबई में पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के 8वें वैश्विक फिल्म पर्यटन सम्मेलन में यह बात कही है। वीडियो संदेश में अभिनेता और केंद्र सरकार में पर्यटन राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने कहा हैकि स्क्रीन में दिखाया गया एक स्थान केवल भूगोल नहीं रह जाता, यह आकांक्षा स्मृति और एक सपना बन जाता है, जिसे लोग स्वयं अनुभव करना चाहते हैं। भारत को ‘कहानियों की सभ्यता’ बताते हुए उन्होंने वाराणसी राजस्थान से पूर्वोत्तर और केरल तकके गंतव्यों की सिनेमाई गहराई का वर्णन किया। राज्यमंत्री सुरेश गोपी ने प्रगतिशील नीतिगत सुधारों और निर्बाध सुविधा से भारत को फिल्म अनुकूल गंतव्य स्थापित करने के सरकार के संकल्प को भी दोहराया। समावेशी विकास पर जोर देते हुए उन्होंने उल्लेख कियाकि फिल्म पर्यटन जीविकोपार्जन, सॉफ्ट पावर और जमीनी आर्थिक अवसरों का एक शक्तिशाली संचालक बन सकता है।
पर्यटन मंत्रालय में अपर सचिव और महानिदेशक सुमन बिल्ला ने कहाकि फिल्म पर्यटन को रणनीतिक रूपसे डिज़ाइन किया जाना चाहिए, नकि इसे संयोग पर छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने विश्वव्यापी शोध का हवाला देते हुए कहाकि सिनेमा और मीडिया से हर साल लगभग 8 करोड़ पर्यटक प्रभावित होते हैं, फिल्म पर्यटन सबसे लागत कुशल और उच्च प्रभाव वाले गंतव्य विपणन उपायों में से एक है। उन्होंने कहाकि एक प्रभावशाली कहानी पारंपरिक विज्ञापन की तुलना में आकांक्षा को कहीं अधिक प्रभावी ढंग से खोलती है। उन्होंने मॉडल दिशानिर्देश, मापनीय प्रोत्साहन संरचनाओं, पीपीपी व्यवस्था, डेटा आधारित मूल्यांकन और सतत राजस्व ट्रैकिंग की आवश्यकता की बातकी, ताकि सिनेमा को एक स्थायी आर्थिक इंजन में बदला जा सके। ‘सिनेमा पर्यटन को गति दे रहा है’ थीम पर यह सम्मेलन तेलंगाना पर्यटन और मेघालय पर्यटन समर्थित था, इसमें वरिष्ठ नीति निर्माता, प्रमुख निर्माता, स्टूडियो प्रमुख, कंटेंट निर्माता, आतिथ्य क्षेत्र के प्रतिनिधि और पर्यटन हितधारक शामिल हुए, ताकि सिनेमाई कहानी कहने की कला को मापने योग्य पर्यटन परिणामों में बदलने केलिए एक रोडमैप तैयार किया जा सके।
तेलंगाना पर्यटन विभाग के विशेष मुख्य सचिव जयेश रंजन ने राज्य के एकीकृत फिल्म निर्माण इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला, जिसमें स्टूडियो, स्थान और उन्नत तकनीक शामिल हैं। उन्होंने कहाकि हैदराबाद पोस्ट प्रोडक्शन सुविधाएं प्रदान करता है, जो वैश्विक मानकों के बराबर हैं, यह गैर हिंदी फिल्म उद्योगों की जरूरतों को भी बड़े स्तरपर पूरा कर रहा है। 'फिल्म इन तेलंगाना' डिजिटल पोर्टल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहाकि यह प्लेटफ़ॉर्म अनुमोदनों को सरल बनाता है और फ़िल्म निर्माण आवश्यकताओं की पूर्व पहचान करता है, जिससे फिल्म निर्माताओं केलिए प्रक्रिया काफी आसान हो जाती है। पीएचडीसीसीआई के सीईओ एवं महासचिव डॉ रंजीत मेहता ने सिनेमा को भारत का सबसे कम उपयोग किया गया पर्यटन अभियान बताया। उन्होंने न्यूज़ीलैंड और यूनाइटेड किंगडम जैसी वैश्विक फिल्म पर्यटन सफलता की कहानियों से तुलना करते हुए एक समन्वित राष्ट्रीय व्यवस्था, राज्यों के प्रोत्साहनों का समन्वय और प्रमुख प्रोडक्शन्स से जुड़े पर्यटन आवागमन के व्यवस्थित मानचित्रण की आवश्यकता बताई।
साउथ इंडियन फिल्म चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रवि कोत्तारकारा ने फिल्म पर्यटन को मेक इन इंडिया विजन से जोड़ते हुए उद्योगजगत से आग्रह कियाकि फिल्में भारत में शूट करें, भारत की खोज करें और दुनिया को दिखाएंकि भारत वास्तव में क्या प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहाकि सिनेमा भारत की संस्कृति, व्यंजन, त्योहारों, शिल्प और धरोहर को पुनर्जीवित कर सकता है और बढ़ा सकता है, लेकिन एकल खिड़की मंजूरी और व्यापक राष्ट्रीय फिल्म निर्माण दिशानिर्देश होने चाहिएं। अंतर्राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करते हुए उदय सिंह प्रबंध निदेशक मोशन पिक्चर एसोसिएशन इंडिया ने बतायाकि वैश्विक स्क्रीन उद्योग लगभग 26 लाख नौकरियों का समर्थन करता है और भारत को तेजीसे निर्माण और पोस्ट प्रोडक्शन गंतव्य की मान्यता मिल रही है, क्योंकि भारत पहलेही 120 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय प्रोडक्शन को आकर्षित कर चुका है। उन्होंने कहाकि दक्षता, पैमाना और पूर्वानुमानयोग्य प्रोत्साहन सतत विकास केलिए महत्वपूर्ण हैं। पर्यटन और आतिथ्य समिति पीएचडीसीसीआई के सह अध्यक्ष ने कहाकि फिल्म पर्यटन अब कोई सीमांत चर्चा नहीं है, यह भारत की गंतव्य ब्रांडिंग रणनीति में केंद्रीय है। यह सम्मेलन सरकार और रचनात्मक महत्वाकांक्षा केबीच व्यावहारिक सहयोग को सक्षम बनाता है।
शालिनी एस शर्मा ने बतायाकि ओटीटी प्लेटफार्मों और सीमारहित कंटेंट उपभोग के युग में डिजिटल कहानी कहने के माध्यम से गंतव्य स्थान अधिक से अधिक खोजे जा रहे हैं। सम्मेलन में तेलुगु फिल्म उद्योग को तेलंगाना में पर्यटन के संचालक के रूपमें नई गंतव्यों को मुख्यधारा में लाने में ओटीटी प्रेरित सामग्री की भूमिका और सिनेमा से उत्तर-पूर्व को बढ़ावा देने पर केंद्रित विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिसमें नीति प्रोत्साहन, कनेक्टिविटी और प्रामाणिक कथाओं से पर्यटन प्रवाह को आकार देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सम्मेलन का समापन एक बातचीत 'कहानियां, जो लोगों को यात्रा करने पर मजबूर करती हैं' केसाथ हुआ, जिसका संचालन प्रशांत शिशोदिया ने किया, इसमें फिल्म निर्माता और अभिनेता विचार व्यक्त कर रहे थेकि दर्शक सिनेमाई पलों केसाथ भावनात्मक रूपसे जुड़ने केलिए कैसे यात्रा करते हैं। प्रभावशाली कहानी कहने से फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने में उनके योगदान केलिए प्रतिष्ठित वक्ताओं को पीएचडीसीसीआई ने सम्मानित किया। हिल्टन, आईआरसीटीसी, मान फ्लीट पार्टनर्स, एडीटीओआई, एफएचआरएआई, आईएटीओ और टीएएआई ने सम्मेलन को समर्थन दिया, जिससे भारत एक प्रमुख वैश्विक फिल्म निर्माण और फिल्म पर्यटन गंतव्य को उद्योगजगत के मजबूत समर्थन की पुष्टि हुई है।

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